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Winter Session: संसद सत्र के बीच में रेपो रेट में बदलाव से सरकार ने विपक्ष का बड़ा दांव किया फेल, समझें समीकरण

Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्षी सांसद आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को घेर रहे हैं। रूपया के डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट, मार्केट में चल रहे उतार-चढ़ाव और मिडिल क्लास पर महंगाई की मार शामिल है। हालांकि, सत्र के बीच में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती का ऐलान किया है। इससे सबसे ज्यादा फायदा मध्यम वर्ग को हो सकता है। घर और कार की ईएमआई में मामूली कटौती होगी। हालांकि, दरों में यह बदलाव ऐसे वक्त में हुआ है जब विपक्ष के हाथ से मुद्दा छिटक गया।

रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कई गई है, जिसके बाद यह अब 5.25 प्रतिशत हो गया है। इस पूरे साल में रेपो रेट में कुल चार बार बदलाव किया गया है। सरकार के पास अब अपना मजबूत तर्क है कि मोदी सरकार मिडिल क्लास की महत्ता समझती है। आयकर में छूट देने के साथ ही लोन लेने में सुविधा और ईएमआई का बोझ कम करने के लिए सरकार ने अहम कदम उठाए हैं।

Winter Session repo rate change

Winter Session में विपक्ष के हाथ से निकला बड़ा मुद्दा

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सांसदों ने सत्र से पहले इस बात के संकेत दिए थे कि विपक्ष महंगाई और आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरेगी। खुद अखिलेश यादव ने कहा था कि वोट चोरी एक मुद्दा है, लेकिन यह सरकार आर्थिक मोर्चे पर नाकाम साबित हो रही है। नए लेबर कानून इनके अमीर कारोबारी दोस्तों के फायदे के लिए हैं और मिडिल क्लास को भारी नुकसान होगा।

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सत्र के बीच में रेपो रेट में बदलाव सीधे तौर पर मिडिल क्लास को प्रभावित करने वाला फैसला है। सरकार अपने स्तर पर यह तर्क देगी कि रेपो रेट में लगातार बदलाव के जरिए सिर्फ मिडिल क्लास ही नहीं, कम पूंजी के साथ अपना कारोबार करनेवाले उद्यमियों को भी राहत दी गई है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को एक गति मिलेगी।

मोदी सरकार के पास आर्थिक मोर्चे पर बचाव के लिए तर्क

हालांकि, रूपया में ऐतिहासिक गिरावट एक ऐसा मुद्दा है जिस पर विपक्ष तैयारी के साथ सरकार को घेर सकती है। अब तक ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि विपक्षी दलों की पूरी तैयारी सरकार को लेबर कोड और एसआईआर (SIR) पर ही घेरने की है। आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास लेबर कोड बड़ा मुद्दा है। खास तौर पर वामपंथी दल और समाजवादी पार्टी इस पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। हालांकि, मोदी सरकार की सत्ता में आने के बाद आयकर के दायरे में बड़ी छूट दी गई है। इसके अलावा, छोटे उद्यमियों के लिए भी कई ऋण सुविधाएं मुद्रा लोन, कृषि और मतस्य व्यवसाय के लिए आसान ऋण जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। जिन्हें आधार बनाकर सरकार अपना मजबूत बचाव कर सकती है।

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Repo Rate Change से आम लोगों को क्या राहत मिलेगी?

- रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती होने से उन लोगों को फायदा जो लोग आने वाले समय में लोन लेने का प्लान बना रहे हैं।

- जो लोग पहले से ही अपने लोन की EMI भर रहे हैं, उनके लोन की ब्याज दरें भी अब कम होंगी जिससे लोन की EMI में कटौती होगी।

- इसका सीधा असर मिडिल क्लास की जेब पर पड़ता है, जो अमूमन घर और कार की ईएमआई देते हैं। इसके अलावा, कारोबार या दूसरी जरूरतों के लिए लोन लेने वाले लोगों को भी फायदा मिलेगा।

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