सीआरपीएफ चीफ को नक्सली हमले की थी आशंका
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद ने फिर हमला करके बहुत से केन्द्रीय सुरक्षा पुलिस बल (सीआरपीएफ़) के जवानों को मार दिया। हैरानी इस बात पर हो रही है कि सीआरपीएफ के निवर्तमान महानिदेशक दिलीप त्रिवेदी ने रिटायर होते ही कहा था कि राज्य सरकारें नहीं चाहती हैं कि नक्सलवाद खत्म हो। अगर राज्यों का रवैया सख्त हो जाये तो कहीं भी नक्सली पैर नही जमा सकते।

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और माओवादियों पर लंबे समय से अध्ययन कर रहे अरुण दीक्षित कहते हैं कि त्रिवेदी के दावे की हकीकत देश को पता चलनी चाहिए।
मोदी सख्त रवैया अपनाएं
जानकार यह भी कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर अपना रुख साफ़ करना चाहिए। नक्सलवाद देश की समस्या है या फिर राज्यों की। अगर देश की है तो फिर सीआरपीएफ को पूरे अधिकार के साथ कमान सौंपी जानी चाहिए। यदि नहीं तो फिर कानून व्यवस्था राज्यों का विषय है। इसे वे ही संभालें।
कब बनेगा सीआरपीएफ चीफ
इस बीच, सीआरपीएफ पूर्व प्रमुख दिलीप त्रिवेदी शनिवार को रिटायर हो गए। वे 1978 बैच के आईपीएस अफसर थे। वे 15 महीनों तक सीआरपीएफ के चीफ रहे।
फिलहाल त्रिवेदी के उतराधिकारी के नाम की घोषणा होने तक सीआरपीएफ में स्पेशल डायरेक्टर जनरल आरसी तायल प्रमुख के पद पर काम करते रहेंगे। सीआरपीएफ में तीन लाख सुरक्षाकर्मी हैं। सीआरपीएफ मुख्यरूप से नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रहे है। जाहिर है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवादियों के हमले के बाद सरकार को इस बल के चीफ की तुरंत नियुक्ति करनी चाहिए ताकि नक्सलवादियों से लोहा लिया जा सके। जानकारों का मानना है कि सरकार को वक्त रहते उक्त पदों के प्रमुखों के नामों की घोषणा कर देनी चाहिए।












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