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क्या उद्धव ठाकरे राज में मुंबईकरों को लोकल ट्रेन में ही घिसना पड़ेगा पांव?

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बेंगलुरू। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की समीक्षा का आदेश देकर महाराष्ट्र की नवोदित उद्धव सरकार ने आम आदमी के बुलेट ट्रेन पर सफ़र करने के सपनों पर हथौड़ा चलाने की कोशिश की है। महाराष्ट्र और गुजरात दो राज्यों के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को जापान के सहयोग से बनाया जाना है, जिसका कुल खर्च 1.08 लाख करोड़ अनुमानित है।

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जापान बुलेट ट्रेन पर होने वाले कुल खर्च का 81 फीसदी हिस्सा जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जीका) के माध्‍यम से किया जाएगा जबकि भारत की ओर से 19 फीसदी यानी करीब 20,500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मार्च, 2020 से शुरू होने वाले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के वर्ष 2023 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है, जिसके लिए गुजरात में जमीन का अधिग्रहण कार्य भी पूरा कर लिया गया है।

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गौरतलब है महाराष्ट्र में गुजरात राज्य के बीच प्रस्तावित 501 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन के लिए महाराष्ट्र में अभी तक जमीन अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो सका है, क्योंकि उक्त जमीन के मालिक यानी किसान और आदिवासियों ने जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं।

अब बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की समीक्षा का राग छेड़कर नवगठित महाराष्ट्र की साझा सरकार ने परियोजना को संकट में डाल दिया है। हालांकि इसके कयास उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही लगाए जा रहे थे, क्योंकि पहले भी उद्धव ठाकरे प्रस्तावित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के विरोधी रहे हैं और मुखपत्र सामना में बुलेट ट्रेन के खिलाफ काफी कुछ लिख चुके हैं।

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वैसे, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुलेट ट्रेन परियोजना को रोकने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन अगर यह परियोजना बंद हो जाती है, तो परियोजना पर अब तक खर्च हुए सरकारी धन का नुकसान होगा, यह उन सपनों के लिए बड़ा झटका देगा, जो आम आदमी ने बुलेट ट्रेन में यात्रा करने के लिए कभी देखा है। दिलचस्प बात यह है कि सीएम उद्धव ठाकरे भी आम लोगों की वकालत कर बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर पानी फेरने में लगे हैं।

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बुलेट ट्रेन आम आदमी की पहुंच है या नहीं है यहां इसकी चर्चा करना निरर्थक है, क्योंकि देश का आदमी वर्तमान समय में 2500-3000 रुपए टिकट पर खर्च करके फ्लाइट यात्रा करने से गुरेज नहीं कर रहा है। इसकी तस्दीक घरेलू विमानन सेवा में आम आदमी की भीड़ देखकर की जा सकती है।

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उल्लेखनीय है प्रस्तावित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए मुंबई टू अहमदाबाद के लिए प्रति यात्री किराया 3000 प्रस्तावित है, जो मौजूदा घरेलू फ्लाइट टिकट की दरों के लगभग समान है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के एमडी अचल खरे के मुताबिक अहमदाबद से मुंबई के बीच 508 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन गलियारे में कुल 12 स्टेशन होंगे, जिसके लिए1380 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।

बुलेट ट्रेन गलियारे में आने वाले जमीन में निजी, सरकारी, वन और रेलवे की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, लेकिन महाराष्ट्र के किसानों और आदिवासियों द्वारा विरोध के चलते महाराष्ट्र में पहले ही जमीन अधिग्रहण का काम अटका हुआ है जबकि गुजरात वाले हिस्से में अब तक 622 हेक्टेयर जमीन केअधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है।

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पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे द्वारा रखी गई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की नींव को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह कहकर समीक्षा का आदेश दे दिया कि उनकी सरकार आम आदमी की है जबकि दिल्ली में गठित 2015 में आम आदमी सरकार से पूरी दिल्ली हलकान है।

महाराष्ट्र के किसानों के कर्ज को बिना शर्त माफ करने का ऐलान कर चुके महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की योजना है कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन के लिए महाराष्ट्र की हिस्सेदारी वाले 5000 करोड़ रुपए किसानों के कर्ज माफी पर खर्च हों। उद्धव ठाकरे का उक्त योजना न केवल महाराष्ट्र के विकास में बाधक बनेगी बल्कि उनकी यह कोशिश महाराष्ट्र में भी मुफ्त की राजनीति को बढ़ावा देगी।

सभी जानते हैं कि राजधानी दिल्ली में सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी मुफ्त की राजनीति की करती है। दिल्ली में एक बार फिर सत्ता में वापसी की राह देख रही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार दिल्ली में मुफ्त राजनीति की केंद्र बन चुकी है।

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दिल्ली में बिजली मुफ्त, पानी मुफ्त, परिवहन मुफ्त और मुफ्त वाई-फाई के जरिए आम आदमी पार्टी वोटरों को रिझा रही है, जिसके सब्जबाग दिखाकर आम आदमी पार्टी ने वर्ष 2015 में दिल्ली की सत्ता पर धुंआधार एंट्री मारी थी। केजरीवाल ने दुनिया की सबसे सफल दिल्ली मेट्रो की राइड मुफ्त करने की योजना बना रखी है, जिससे दिल्ली मेट्रो की सफलता पर ग्रहण लगना तय हो चुका है।

अब जब महाराष्ट्र की नवोदित सरकार ने बुलेट ट्रेन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी के 5000 करोड़ रुपए किसानों का कर्जा माफ करने के लिए उपयोग करने का ऐलान किया है तो लगता है दिल्ली की आम आदमी पार्टी वाया कांग्रेस होते हुए महाराष्ट्र पहुंच गई है।

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वाया कांग्रेस इसलिए, क्योंकि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी को भी वर्ष 2013 विधानसभा के बाद समर्थन देकर कांग्रेस ने ही सत्ता में बिठाया था। कमोबेस यही हालत महाराष्ट्र में भी है, जब कांग्रेस के समर्थन से महाराष्ट्र में उद्धव के नेतृत्व में साझा सरकार वजूद में आई है।

महात्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 10,000 करोड़ रुपए है और केंद्र की मोदी सरकार की योजना के मुताबिक मार्च 2020 तक बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का कामकाज शुरू कर दिया जाएगा और दिसंबर 2023 तक प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया जाएगा।

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फिलहाल अभी प्रोजेक्ट के लिए अभी भी जमीन का सर्वे ही चल रहा है। अहमदाबाद के साबरमती से सूरजपुर जंक्शन के रेलवे स्टेशन के ऊपर से गुजरने वाली बुलेट ट्रेन कुछ जगहों से अंडरग्राउंड मेट्रो निकलेगी। वहीं, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट लिए एक मल्टीलेवल पार्किंग का भी निर्माण किया जाना है।

उद्धव ठाकरे नेतृत्व वाली एनसीपी-कांग्रेस की साझा सरकार ने कहा है कि वह जल्द ही महाराष्ट्र की आर्थिक हालत पर व्हाइट पेपर लाएगी। इससे पहले उद्धव ने आरे में मेट्रो कार शेड निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा विरोध प्रदर्शनों के दौरान जिन पर्यावरणविदों पर केस दर्ज किए गए थे, वे सभी वापस लेने का आदेश दे दिया है।

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बावजूद इसके सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि राज्य में पूर्ववर्ती बीजेपी नीत सरकार की जो प्राथमिकताएं थीं, उन्हें 'हटाया' नहीं गया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रतिशोध की राजनीति नहीं है। यह घोषणाएं तब की गई हैं जब एक दिन पहले शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस की ठाकरे के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र विकास आघाड़ी (एमवीए) ने 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 169 विधायकों के समर्थन से विश्वास मत जीत चुकी थी।

मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन के लिए ग्रहण साबित हो सकती हैं महाराष्‍ट्र उद्धव सरकार!

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English summary
By the way, Chief Minister Uddhav Thackeray has not issued any order to stop the bullet train project, but if this project stops then the government's money spent so far on the project will be lost, it will give a big shock to those dreams, which the common man has seen ever for traveling in the bullet train. Interestingly, CM Uddhav Thackeray is also engaged in turning water on the bullet train project by advocating common man.
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