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मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन के लिए ग्रहण साबित हो सकती हैं महाराष्‍ट्र उद्धव सरकार!

बेंगलुरु। महाराष्‍ट्र में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की नई सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए ग्रहण साबित हो सकती है। उद्धव ठाकरे ने मुख्‍यमंत्री पद संभालते ही प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन समेत अन्‍य परियोजनओं की समीक्षा के आदेश दिए हैं। इससे पहले उन्होंने मुंबई मेट्रो के लिए आरे कार शेड का काम भी रोक दिया था। इसी के साथ केन्‍द्र और महाराष्‍ट्र सरकार के बीच गतिरोध की शुरुआत हो चुकी है।

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बता दें बुलेट बुलेट ट्रेन परियोजना को किसानों और आदिवासियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा जिनकी भूमि अधिग्रहित की जानी है। उद्वव ठाकरे अब इसी बात को आधार बना कर बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट बाधित कर सकते हैं। सीएम उद्वव ठाकरे ने कहा कि यह सरकार आम आदमी की है। जैसा कि आपने अभी पूछा, हां, हम बुलेट ट्रेन (परियोजना) की समीक्षा करेंगे। क्या मैंने आरे कार शेड की तरह बुलेट ट्रेन परियोजना को रोका है? नहीं। ठाकरे ने कहा कि भाजपा नीति सरकार की जो प्राथमिकताएं थीं, उन्हें हटाया नहीं गया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रतिशोध की राजनीति नहीं है।

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सीएम उद्धव से पहले शिवसेना प्रवक्‍ता मनीष कायदे ने भी बहुत ही नपे तुले शब्दों में कह चुके हैं कि बुलेट ट्रेन प्रोजे्क्‍ट को लेकर शिवसेना भाजपा के जैसे गंभीर नही है। शिवेसना इस मुद्दे को गरीबों से जोड़ रही, वहीं दूसरी ओर आरे गांव की तरह पर्यावरण को भी परियोजना रोकने का एक बड़ी वजह माना जा रहा है। फडणवीस सरकार में मंत्री दिवाकर राउत ने नवी मुंबई का जिक्र किया था और बताया था कि उस 13.36 हेक्टेयर जमीन पर तकरीबन 54 हजार आम के पेड़ लगे है। अब इसी बात को मुद्दा बनाते हुए शिवसेना पर्यावरण की दुहाई दी है।

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गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं हैं जब शिवसेना पीएम मोदी के बुलेट ट्रेन के ड्रीम प्रोजेक्‍ट पर अपना विरोध जताया है। इससे पहले भी शिवसेना प्रवक्ता कह चुके हैं कि बुलेट ट्रेन के लिए आमों के बाग की कटाई करना न ही किसानों के लिए सही है और न ही पर्यावरण के लिए।

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बता दें कि सितंबर 2017 में अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम शिंजो अबो ने भारत की पहली बुलेट ट्रेन प्रॉजेक्ट का शिलान्यास किया था। पीएम मोदी के इस ड्रीम प्रॉजेक्ट के 2023 तक पूरा होने की संभावना थी। इस प्रॉजेक्ट का ट्रैक लेंथ करीब 508 किलोमीटर था, जो मुंबई के बीकेसी से गुजरात के साबरमती तक रखा गया था। इस बारे में जून में रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये है। इसमें से 81 प्रतिशत लागत का वित्त पोषण जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जीका) के माध्यम से किया जाएगा।

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पीएम मोदी इसको लेकर बहुत ही गंभीर है। उन्‍होंने 2016 में ही देश में हाई स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन का गठन किया गया था। मुंबई और अहमदाबाद के बीच बनने वाले हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए 1380 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की जरूरत है। अब तक 548 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया भी जा चुका है।

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शिवसेना गरीबों के अधिकारों और पर्यावरण को की आड़ में राजनीति करने की फिराक में है। पहले ही शिवसेना यह कहती आयी है कि इस प्रोजेक्ट से मराठियों का फायदा नहीं होगा। शिवसेना की सोच हैं कि इसका फायदा मराठियों को नहीं बल्कि गुजरात को ज्यादा होगा।

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शिवसेना जो यह पीएम मोदी के प्रोजेक्ट मेंं अंडगा बन रही है उसके तार शिवसेना संस्‍थापक बाल ठाकरे से जुड़े हुए हैं। जैसा आपको पता है कि बाल ठाकरे की राजनीति का आधार मराठा पहचान था। वह हमेशा से मराठियों को खोया हुआ सम्मान वापस दिलाना चाहते थे। महाराष्‍ट्र में विशेषकर मुबंई में गुजराती व्‍यापारियों के प्रभाव के कारण वह खुद को कम समझते थे।

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बाल ठाकरे के बाद अब शिवसेना आम मराठियों के बीच यह मुद्दा बनाकर अपनी मजबूत पैठ जमाना चाहती है। भाजपा से उसने सालों पुराना रिश्‍ता तोड़ लिया हैं और विरोधी विचारधारा वाली पार्टी एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन की सरकार बनाने में तो सफल हो गए हैं। लेकिन शिवसेना को अच्‍छे से पता हैं बिना आम मराठियों को साधे शिवसेना का आगे का राजनीतिक सफर आसान नही हो सकता। इसलिए अगर इस सरकार में रहते हुए मराठा समुदाय का दिल जीत लिया तो शिवसेना विपरीत परिस्थितियों में भी मराठा उनके पक्ष में रहेंगे।

इसे भी पढ़े- इन कंधों पर टिका है, महाराष्‍ट्र उद्वव ठाकरे की गठबंधन सरकार का दामोमदार

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