क्या पाकिस्तान के जासूसों को रोक पायेगी लेज़र वॉल?
पठानकोट हमले के मद्देनजर भारत पाक सीमा पर सुरक्षा के लिहाज से नए इंतजामात करने की सुर्खियां उड़ने लगी हैं। दरअसल भारत पाक सीमा सहित 40 ऐसी जगहें जहां आतंकियों की घुसपैठ की ज्यादा संभावनाएं रहती हैं उन्हें लेजर की दीवारों से लैस करने की तैयारी की जा रही है। इनका मुख्य उद्देश्य सभी मानवीय चूक को जड़ से समाप्त करना है।
पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद गृह मंत्रालय की प्रमुख सुरक्षा फेहरिस्त में से यह एक है। लेकिन मुद्दा सुरक्षा का है तो इसके हर एक पहलू पर निगहबानी भी जरूरी है। जिसके बाद सवालों का जहन में उठना लाजमी है।
PICS- जब भारतीय सेना के अर्जुन टैंक ने दागे गोले
सवाल इस बात का कि लेजर वॉल का आदेश तो स्वागत योग्य है लेकिन जिनमें गद्दारी का वायरस आ गया है उसे दूर करने के लिए क्या कदम होंगे। आखिर देश की सुरक्षा संबंधी अंदरूनी या कहें बेहद खूफिया बातों का साझा कर दिया जाता है लेकिन अनुशासन के बीच ये संभव कैसे।
देश की गरिमा, करोड़ों भारतवासियों की जान को महज चंद पैसों के बदले नीलाम कर दिया जाना वो भी एक भारतीय होकर क्या यह आतंक की श्रेणी में नहीं आता। बहरहाल आईये जानते हैं उनके बारे में जिनका ईमान बिक गया, जमीर का सौदा हो गया, जो सेना का मतलब दलाली समझ बैठे...
अहले वतन कैसे कहें
भारत की अहम जानकारियां जो महज चंद पैसों के लिये सरहद पार दे दी जाती हैं, उन्हें सिर्फ जानकारी मत समझिये। यह करोड़ों भारतवासियों की जान की जानकारी है, सुरक्षा की तमाम गिरहों के छोर की जानकारी है। आतंकियों को एक छोटी सी जानकारी किसी का बेटा तो किसी का भाई, किसी का पति तो किसी का पिता छीन लेती है। सच पूछिए तो लेज़र वॉल लगाने से पहले कहीं ज्यादा जरूरी है घर के अंदर छिपे देशद्रोहियों को पकड़ने की।
एक नज़र उन पर जिन पर ठहरी शक की सुई और मिले सबूत-

सेना का जवान फरीद
सिलीगुड़ी में तैनात सेना के जवान फरीद को क्राइम ब्रांच की सूचना के आधार पर हिरासत में लिया गया। फरीद पर आरोप था कि वह पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था। पुलिस के मुताबिक पूरा मामला 2014 में शुरू हुआ था। जब फरीद जम्मू कश्मीर के राजौरी में आर्मी की लाइट इंफेट्री रेजीमेंट में तैनात था। उस दौरान फरीद आईएसआई के चंगुल में फंस गया और अपने ही देश से गद्दारी कर बैठा।

एयरफोर्स कर्मी रणजीत सिंह
दिल्ली क्राइमब्रांच ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में एक एयरफोर्स के पूर्व कर्मी रणजीत सिंह को गिरफ्तार किया। जानकारी के मुताबिक आईएसआई ने इस एयरफोर्स कर्मी से जरूरी जानकारी हासिल करने के लिए एक महिला का इस्तेमाल किया।

मुनव्वर अहमद मीर
1999 में कारगिल युद्ध में शामिल रहे मुनव्वर अहमद मीर के साथ गद्दारी का तमगा चस्पा हो गया। दिल्ली पुलिस ने आईएसआई के दो संदिग्ध एजेंटों को जासूसी करने के आरोप में जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले से गिरफ्त में लिया। जिसमें मुनव्वर अहमद मीर जो कि इंडियन आर्मी का रिटायर्ड हेड कांस्टेबल है उसके भी भारत के जासूसी मामले में शामिल होने की बात खुलकर सामने आईं।

अब्दुल राशिद
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी को भारत की सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज पहुंचाने के आरोप में राजौरी निवासी अब्दुल राशिद जो कि सीमा सुरक्षा बल का एक जवान है को गिरफ्तार किया। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से इसके पास बेहद अहम दस्तावेज थे।

गुरदासपुर के एसपी सलविंदर सिंह
सलविंदर सिंह के बयानों में मतभेद उन सात शहीदों के परिवार वालों के दर्द को फिर से जहन में जिंदा कर देते हैं। सलविंदर सिंह के लाइव डिटेक्टर टेस्ट को मंजूरी मिल गई है। जिसकी हकीकत जल्द ही सामने आ जाएगी। लेकिन इसके साथ-साथ इसकी भी जांच की जरूरत है कि हमले के दिन फ्लड लाइट्स कैसे खराब हुईं।
लेखक परिचय- हिमांशु तिवारी आर्यावर्त न्यूज के यूपी हेड हैं।












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