तो गिले-शिकवे भूलकर भाजपा-शिवसेना सरकार बनाएंगे
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरती हुई नजर आ रही है, पर यह सवाल बना हुआ कि क्या वह शिव सेना के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाएगी। इस बीच, शिवसेना के संजय राउत ने बीजेपी से मतगणना के बाद गठबंधन के बारे में अभी फैसला नहीं होने की बात कही है।

हालांकि कहते हैं कि राजनीति में संयम भाषा का इस्तेमाल विरोधियों के लिए भी होना चाहिए। पर शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादक प्रेम शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए कैंपेन के दौरान अपने लेखन में जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया है, उसे आप घटिया ही मान सकते हैं।
बेशक, लोकतंत्र में राजनीतिक पार्टियां प्रतिस्पर्धी हो सकतीं हैं, एक दूसरे की आलोचना कर सकतीं हैं, लेकिन शब्दों की मर्यादा वहां कायम रहनी चाहिए। वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार कहते हैं कि प्रेम शुक्ला ने वह मर्यादा अत्यंत ही असभ्य तरीके से तोड़ा है। यह कहना कि शिवसेना न होती तो मोदी के बाद दामोदर दास मोदी भी भाजपा को बहुमत नहीं दिलवा पाते। हालांकि उन्होंने ऐसा न लिखा होता तो चुनाव के एक दिन पूर्व इस तरह शिवसेना और वे चर्चा में नहीं आते।
गाली-गलौच की भाषा
प्रेम शुक्ला पार्टी के नेता के साथ पत्रकार भी हैं, एक पढ़े लिखे व्यक्ति हैं, भाषा उनकी अच्छी है, समझ भी है, अगर आलोचना करनी ही थी तो दूसरे शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है। यह तो मुहल्ले के दो लोगों के बीच गाली गलौज हो गया जिसके लिए राजनीति या सार्वजनिक जीवन में जगह होनी ही नहीं चाहिए। इससे अपमानजनक संबोधन किसी के लिए क्या हो सकता है। आखिर नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। ऐसी भाषा शर्मनाक है।
बहरहाल, यह देखना होगा कि भाजपा उक्त सभी बातों को भूलकर शिव सेना के साथ सरकार बनाएगी।












Click it and Unblock the Notifications