आंध्र प्रदेश: पानी की तलाश में अब गांवों में नहीं भटकते जंगली जानवर, पेयजल के लिए सरकार ने उठाए कई कदम

आंध्र प्रदेश में वन विभाग के अधिकारियों ने भीषण गर्मी के बीच जंगली जानवरों के लिए पेयजल की व्यवस्था करने के लिए कई कदम उठाए थे।

ओंगोले, 29 जून : आंध्र प्रदेश में वन विभाग के अधिकारियों ने भीषण गर्मी के बीच जंगली जानवरों के लिए पेयजल की व्यवस्था करने के लिए कई कदम उठाए थे। जंगली जानवरों को जंगल में ही पीने का पानी मिल जाए, इसके लिए फॉरेस्ट ऑफिसर ने कई कदम उठाए थे। जंगली जानवरों को जंगल में ही पीने का पानी मिल जाएगा तो वे पास के गांवों का रुख नहीं करेंगे। बाघ, भालू, जंगली कुत्ते और हिरण सहित जंगली जानवर जंगल के पास के गांवों में पानी की तलाश में आ जाते थे। जिससे ग्रामीणों में दहशत रहती थी।

प्रतीकात्मक फोटो

वहीं, इससे कुछ दिन पहले एक भालू कोमारोलू मंडल के तातीचेरला गांव और रचरला मंडल के गुडीमेट्टा गांव में पानी की तलाश में राम योगी मट्टम के पास पहुंच गया। जिससे गांव के लोगों को डर का सामना करना पड़ा। नल्लामाला वन के पेड्डा दोर्नाला रेंज के अधिकारियों ने सभी जंगली जानवरों को चेक-डैम, बांध, छोटे पानी के तालाबों का निर्माण और सौर ऊर्जा से चलने वाले टैंकरों और गहरे पानी के बोरवेल के साथ तश्तरी स्थापित करके पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक कार्य योजना तैयार की थी। जिससे जंगली जानवर पास के गांव में न भटके और न ही कोई अप्रिय घटना हो।

20 लाख रुपये किए खर्च

बता दें कि वन अधिकारियों ने गर्मियों से पहले चेक डैम, रॉक फिल डैम, बांध, तश्तरी के गड्ढे और पुराने तालाबों को गहरा करने के लिए लगभग 20 लाख रुपये खर्च किए। जंगली जानवरों के लिए अधिक पानी उपलब्ध कराने के लिए पुली चेरुवु, पेद्दारुतला, पोथुराजू कुंटा, पेद्दा टांडा चेरुवु, चिन्ना मंतनाला टांडा चेरुवु जैसे जल स्रोतों को गहरा किया गया।

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