351 करोड़ बरामद होने के बाद भी क्यों गिरफ्तार नहीं हुए कांग्रेस सांसद धीरज साहू, कहां हैं अभी?
Dhiraj Prasad Sahu News: झारखंड के लोहरदगा से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू के परिसरों पर पिछले 06 दिसंबर से छापेमारी जारी है। छापेमारी में अब तक 351 करोड़ रुपये और काफी गहने बरामद हो चुके हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 355 करोड़ बरामद हुए हैं। ये छापेमारी धीरज साहू के ओडिशा और झारखंड से जुड़ी संपत्तियों से बरामद किए गए हैं। अब तक किसी भी जांच एजेंसी द्वारा जब्त किया गया ये सबसे ज्यादा नकदी है।
इन सबके के बीच ये सवाल उठता है कि धीरज प्रसाद साहू के ठिकानों से अब तक साढ़े तीन सौ करोड़ से ज्यादा का कैश बरामद किया जा चुका है, लेकिन अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर अब तक उनको गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है।

धीरज साहू के इस केस को सोशल मीडिया यूजर्स कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन से तुलना कर रहे हैं। असल में दिसंबर 2021 में GST इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने पीयूष जैन के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी और 197 करोड़ रुपये, 23 किलो सोना बरामद की थीं। कैश बरामद होने के बाद पीयूष जैन को गिरफ्तार कर लिया गया था। फिलहाल वो जमानत पर बाहर हैं। अब ऐसे में ये सवाल उठता है कि आखिर धीरज साहू की गिरफ्तारी क्यों हुई है?
धीरज साहू के मामले में आधिकारियों का कहना है कि धीरज साहू के ऊपर जो छापेमारी हुई है, वह इनकम टैक्स विभाग ने की है। इनकम टैक्स एक्ट-1961 के मुताबिक आयकर विभाग के पास गिरफ्तारी का कोई अधिकार नहीं है।
इनकम टैक्स एक्ट-1961 में छापेमारी और अन्य कार्रवाई के तहतक गिरफ्तारी का कोई प्रावधान नहीं है। इस मामले में छापेमारी खत्म होने के बाद असेसमेंट और प्रॉसिक्यूशन किया जा सकता है। ये मामला कोर्ट में जा सकता है और कोर्ट द्वारा उनको सजा सुनाई जा सकती है।
असल में पीयूष जैन के ऊपर कार्रवाई केंद्रीय जीएसटी विभाग की इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा की गई थी। सीजीएसटी सेक्शन-69 के तहत गिरफ्तारी की जा सकती है। ये सेक्शन जीएसटी विभाग को तत्काल गिरफ्तार करने का अधिकार देता है। इसी वजह से पीयूष जैन की गिरफ्तारी फौरन हो गई थी। फिलहाल धीरज साहू कहां हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
कब हो सकती है धीरज साहू की गिरफ्तारी
धीरज साहू की गिरफ्तारी तभी संभव है, जब उनके खिलाफ एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) या फिर सीबीआई जैसी एजेंसी केस दर्ज कर जांच शुरू करे। अगर केंद्रीय जांच एजेंसी को लगता है कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग हुई है या फिर किसी क्रिमिनल एक्टिविटी है तो उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।












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