अगर कमजोर रह गई नेवी तो फिर कैसे सुरक्षित होंगे कोस्टल बॉर्डर
विजाग। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के विजाग में गुरुवार को इंडियन नेवी जिस हादसे का शिकार हुई है, उसके बाद कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। केंद्र में अब गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर को नया रक्षा मंत्री नियुक्त करने की कवायद चल रही है।
साफ है उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अब कई चुनौतियां हैं जो इंडियन नेवी के स्वरूप को बदलने और इसे जल्द से जल्द पूरी तरह से मॉर्डनाइज करना सबसे अहम है।
हर पांच साल में नेवी को झटका
अभी तक इस हादसे में लापता चार नौसैनिकों का कोई पता नहीं चल पा रहा है। 14 अगस्त 2013 में आईएनएस सिंधुरक्षक और फरवरी 2014 में हुए आईएनएस सिंधुरत्न जैसे दो बड़े हादसों से इंडियन नेवी अभी तक उबर नहीं पाई है। एक नजर डालिए कि नेवी के साथ जुड़े कुछ ऐसे ही आंकड़ों पर जो वाकई चिंता का विषय बन गए हैं।
- एक वर्ष से कुछ ज्यादा समय के अंदर इंडियन नेवी को करीब 12 हादसों का सामना करना पड़ा।
- विजाग से पहले मई में नेवी बांबे डॉकयॉर्ड में आईएनएस गंगा में ब्लास्ट का सामना करना पड़ा था।
- विशेषज्ञों की मानें तो इन हादसों की वजह से इंडियन नेवी को करीब 1,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है।
- हादसों में नेवी ने अब तक 23 बहादुर नौसैनिकों को खो दिया है।
- इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुतािबक वर्ष 1990 से लेकर अब तक इंडियन नेवी ने हर पांच वर्ष में एक वॉरशिप को खो दिया।
- वर्ष 2004 से इंडियन नेवी हर दो वर्ष में एक कांबेंटेंट को खो रही है।
- वॉरशिप को शांति के समय खोना कोई नई बात नहीं है लेकिन इंडियन नेवी के लिए काफी गंभीर मसला है।
- नेवी को ज्यादा से ज्यादा मेनटेंस और पुराने उपकरणों को हटाने की जरूरत है।













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