Twisha Sharma Death: CBI की कस्टडी में पति Samarth, रिटायर्ड जज सास की बेल याचिका पर कोर्ट में क्या-क्या हुआ?
Twisha Sharma Death Case Madhya Pradesh High Court News: भोपाल के कटारा हिल्स में 12 मई 2026 को 33 वर्षीय मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब देशव्यापी चर्चा का विषय बन गया है। शादी को महज 5 महीने हुए थे। मृतका के परिवार ने दहेज प्रताड़ना, मानसिक क्रूरता और घरेलू हिंसा के चलते हत्या का आरोप लगाया है। वहीं, रिटायर्ड जज सास गिरिबाला और पति समर्थ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए आत्महत्या की बात कही। मामले की जांच अब CBI केंद्र में है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में बुधवार (27 मई 2026) को सेवानिवृत्त जज और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने की याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति देव नारायण मिश्रा की कोर्ट में दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इससे पहले, पति समर्थ सिंह (वकील) को CBI हिरासत में भेज दिया गया है। मामला अब CBI के हाथ में है। दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट (AIIMS दिल्ली टीम द्वारा) के निष्कर्ष पर पूरी जांच टिकी हुई है। आखिर क्या क्या हुआ कोर्ट रूम में....

Twisha Sharma Death Case Update: ट्विशा केस क्या है? समझें...
ट्विशा शर्मा (नोएडा निवासी) की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी। 12 मई की रात को उन्हें ससुराल में फांसी पर लटका हुआ पाया गया। परिवार ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
ट्विशा के माता-पिता (नवनीधि शर्मा पक्ष) ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही दहेज की मांग, मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक तंगी का सिलसिला चल रहा था। खासकर सास गिरिबाला सिंह (रिटायर्ड जज और वर्तमान में डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम की चेयरपर्सन) और पति समर्थ पर गंभीर आरोप लगे।
पुलिस ने दहेज हत्या (धारा 80 BNS), क्रूरता (धारा 85), सामान्य इरादे और दहेज निषेध अधिनियम के तहत FIR दर्ज की। शुरुआत में स्थानीय पुलिस जांच कर रही थी, लेकिन परिवार की शिकायतों, प्रक्रियागत खामियों और प्रभावशाली परिवार होने के कारण Supreme Court के हस्तक्षेप के बाद CBI ने जांच अपने हाथ में ले ली।
Giribala Singh Anticipatory Bail Cancellation Update: हाई कोर्ट में क्या-क्या हुई बहस? (27 मई सुनवाई)
पीड़ित परिवार और राज्य सरकार की दलीलें वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा (पीड़ित परिवार की ओर से) ने पेश कीं। जोर दिया कि निचली अदालत ने जांच के शुरुआती चरण में ही असाधारण अग्रिम जमानत दे दी, जबकि सबूतों की अनदेखी की गई। उन्होंने WhatsApp चैट्स का हवाला दिया, जिनमें ट्विशा की भावनात्मक पीड़ा, आर्थिक दबाव, अजन्मे बच्चे के पितृत्व पर सवाल और सास द्वारा पति-पत्नी के बीच दरार डालने के संकेत मिलते हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (राज्य की ओर से) ने सत्र अदालत के आदेश की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा...
- FIR दर्ज होने के कुछ घंटों में ही जमानत दे दी गई, जो दहेज हत्या जैसे गंभीर मामले में अनुचित है।
- जमानत के चरण में ही लघु-परीक्षण (mini trial) कर दिया गया।
- गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एकतरफा कथा गढ़ी, जिससे गवाह प्रभावित हो सकते हैं।
- 'प्रेस कॉन्फ्रेंस गोपनीय तरीके से आयोजित की जाती हैं, लेकिन यहां एक कहानी गढ़ी गई।'
एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने घटनाक्रम का कालानुक्रम पेश किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर, गर्दन, कलाई और उंगलियों पर पूर्व-मृत्यु चोटों का जिक्र किया गया। चिकित्सा राय संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं करती।
सास पक्ष की दलीलें वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने कोर्ट के सामने रखीं। इसमें गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वकील ने कहा कि आरोप अनुमानों पर आधारित हैं, ठोस सबूत नहीं। घटना के तुरंत बाद ट्विशा को EMS भोपाल ले जाया गया, परिवार की प्राथमिकता इलाज थी। पुलिस ने तलाशी ली, जब्ती ज्ञापन पर गिरिबाला ने हस्ताक्षर किए और सहयोग किया। वित्तीय रिकॉर्ड्स दिखाते हैं कि सास और बेटे ने ट्विशा को बड़ी रकम ट्रांसफर की, दहेज वसूली का आरोप गलत। वैवाहिक कलह थी, लेकिन दहेज या क्रूरता से जुड़ी नहीं। ट्विशा की भावनात्मक समस्या गर्भपात और रिश्ते की समस्याओं से जुड़ी थी। पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए असाधारण परिस्थितियां जरूरी हैं।
CBI की भूमिका और पति समर्थ सिंह की स्थिति को समझें...

CBI ने गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ की मांग की। समर्थ सिंह को 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया गया (लगभग 10 दिन फरार रहने के बाद)। भोपाल कोर्ट ने उन्हें CBI हिरासत में भेज दिया। CBI ने नई FIR दर्ज की और क्राइम सीन का रीक्रिएशन भी किया।
दूसरी पोस्टमार्टम: AIIMS दिल्ली की टीम
ट्विशा के परिवार ने पहली पोस्टमार्टम में खामियों का आरोप लगाया। MP हाई कोर्ट के निर्देश पर AIIMS दिल्ली की फोरेंसिक टीम ने भोपाल में दूसरी पोस्टमार्टम की। रिपोर्ट में हिस्टोपैथोलॉजी और विसरा टेस्ट के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे। शुरुआती रिपोर्ट में पूर्व-मृत्यु चोटें दर्ज हुई हैं, जो संघर्ष की ओर इशारा कर सकती हैं।
कानूनी पहलू क्या है?
दहेज हत्या के मामलों में धारा 80 BNS (पूर्व 304B IPC) के तहत presumption of dowry death लागू होता है अगर शादी के 7 साल के अंदर मौत हुई हो और प्रताड़ना साबित हो। अग्रिम जमानत ऐसे मामलों में सावधानी से दी जाती है। उच्च न्यायालय अब यह तय करेगा कि निचली अदालत का आदेश सही था या नहीं।
ट्विशा शर्मा का मामला अब केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता, CBI जांच की निष्पक्षता और दहेज जैसी सामाजिक बुराई पर बड़े सवाल खड़ा कर रहा है। हाई कोर्ट का फैसला और AIIMS की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। पूरी जांच बिना किसी दबाव के हो, यही अपेक्षा है।













Click it and Unblock the Notifications