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CBI के घर से क्यों हटा पर्दा और ये चार किरदार कौन

By Bbc Hindi

सीबीआई यानी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जांच करने वाली भारत सरकार की सबसे प्रमुख एजेंसी है. अब तक सीबीआई की कथित लोकछवि यही रही है कि केंद्र में जिसकी सरकार होती है, सीबीआई उसीका राजनीतिक हथियार हो जाती है.

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस एजेंसी को 'येस मैन' की छवि पर मुहर लगाते हुए 'तोता' कहा था. दुर्भाग्य से अभी सीबीआई सियासी हथियार नहीं बल्कि अपने घर का पर्दा हटने से विवादों में है.

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच मामला इस क़दर संदिग्ध हो गया है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भी असमंजस की स्थिति में है.

सीबीआई के अपने ही घर में तलाशी अभियान चल रहा है और सोमवार को डीएसपी देवेंद्र कुमार को दस्तावेज़ों के हेरफेर के आरोप में गिरफ़्तार किया गया. यह हेरफेर सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के रिश्वत लेने के आरोप से जुड़ा है.

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है रविवार शाम पीएम मोदी की मुलाक़ात आलोक वर्मा से हुई और उन्होंने पूरे मामले पर बातचीत की. इसके साथ ही पीएम ने उसी शाम रॉ यानी भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के प्रमुख अनिल धसमाना से भी कथित तौर पर अलग से मुलाक़ात की.

अस्थाना रिश्वत केस में रॉ के विशेष सचिव सामंत कुमार गोयल के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर दर्ज की गई है. हालांकि वो इस केस में अभियुक्त नहीं हैं.

सीबीआई
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मामला

राकेश अस्थाना के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित हुई थी, जो मोइन क़ुरैशी केस की जांच कर रही थी.

देवेंद्र कुमार इसी एसआईटी में जांच अधिकारी के तौर पर काम कर रहे थे. देवेंद्र कुमार को सोमवार दोपहर बाद दो बजे गिरफ़्तार किया गया. इससे पहले शुक्रवार को सीबीआई भवन में देवेंद्र कुमार के ऑफिस की तलाशी ली गई थी.

सीबीआई ने मंगलवार को जो एफ़आईआर दर्ज कराई है उसमें देवेंद्र कुमार अभियुक्त नंबर दो हैं और अस्थाना अभियुक्त नंबर एक हैं. सीबीआई के सूत्रों के हवाले से भारतीय मीडिया में जो ख़बर छपी है उसके मुताबिक़ देवेंद्र कुमार को जांच से जुड़े रिकॉर्ड में जालसाज़ी के मामले में गिरफ़्तार किया गया है.

कुमार पर आरोप है कि उन्होंने सना सतीश बाबू का एक काल्पनिक बयान पेश किया और इसका उद्देश्य सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पर राकेश अस्थाना के आरोप को बल देना था.

एफ़आईआर के अनुसार सना मोइन क़ुरैशी केस में एक गवाह हैं और इन्होंने आरोप लगाया है कि अस्थाना ने सीबीआई की एसआईटी जांच से मुक्त करने के लिए रिश्वत ली.

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से यह भी बताया है कि सना का काल्पनिक बयान सीआरपीसी के सेक्शन 161 के तहत बनाया गया और बताया गया कि यह बयान दिल्ली में 26 सितंबर को रिकॉर्ड किया गया है.

सवाल

हालांकि सीबीआई के जांच अधिकारियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सना 26 सितंबर को दिल्ली में थे ही नहीं. वो हैदराबाद में थे. सूत्रों का कहना है कि वो इस जांच में एक अक्टूबर को शामिल हुए हैं.

सीबीआई सना के जिस बयान को काल्पनिक बता रही है उसमें एसआईटी से कहा गया है कि तेलगू देशम पार्टी के सांसद सीएम रमेश और सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से बातचीत के बाद केस ख़त्म कर दिया गया है.

सीबीआई के प्रवक्ता अखिलेश दयाल ने अपने बयान में कहा है, ''सेक्शन 161 के तहत मोइन क़ुरैशी केस के एक गवाह सतीश सना बाबू का जो बयान गढ़ा गया है, उसके बारे में कहा जा रहा है कि दिल्ली में 26 सितंबर को रिकॉर्ड किया गया. जांच में पता चला है कि उस दिन सना सतीश बाबू दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे. उस दिन वो हैदराबाद में थे. सना जांच में एक अक्टूबर को शामिल हुए हैं.''

इस 'काल्पनिक' बयान पर जांच अधिकारी के तौर पर देवेंद्र कुमार का हस्ताक्षर है. दर्ज बयान सवाल-जवाब के फॉर्मेट में है. सना सतीश बाबू से एक सवाल पूछा गया है कि 'जब आपने यह कहा कि आपके ख़िलाफ़ जांच पूरी हो चुकी है फिर भी सीबीआई ने सवाल-जवाब के लिए तलब क्यों किया?'

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इस सवाल के जवाब में सना ने कहा है, ''जून 2018 में, मैंने अपने दोस्त टीडीपी के राज्यसभा सांसद सीएम रमेश से इस बारे में बात की थी. उन्होंने मुझे आश्वस्त किया था कि वो संबंधित निदेशक से बात करेंगे. मैं सीएम रमेश से लगातार मिलता रहा. एक दिन रमेश ने कहा कि उन्होंने इस केस को लेकर सीबीआई के निदेशक से मुलाक़ात की है. रमेश ने यह भी कहा कि अब उनको सीबीआई दोबारा नहीं बुलाएगी. जून के बाद से मुझे सीबीआई ने नहीं बुलाया. ऐसे में मैं इस बात को लेकर आश्वस्त था कि मेरे ख़िलाफ़ जांच पूरी हो गई है.''

इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस से सीएम रमेश ने कहा है, ''अब तक के जीवन में सीबीआई के एक सिपाही से भी मेरी मुलाक़ात नहीं हुई है. सारी बातें मनगढ़ंत हैं और मेरी छवि ख़राब करने की साज़िश है. ऐसा सब कुछ तब हो रहा है जब हमारी पार्टी एनडीए का हिस्सा नहीं है. अब तो सीबीआई का भी कहना है कि सना सतीश बाबू का बयान गढ़ा हुआ है.''

19 अक्टूबर को अस्थाना ने सीवीसी को एक पत्र लिखा. इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है, ''सना ने रमेश से संपर्क साधा था और रमेश ने आलोक वर्मा से एक निजी मुलाक़ात की थी. सना को सीबीआई की तरफ़ से आश्वस्त किया गया कि उन्हें दोबारा नहीं बुलाया जाएगा.''

नरेंद्र मोदी
Reuters
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'रिश्वत'

अस्थाना का यह पत्र तब सामने आया जब एफ़आईआर में दुबई स्थित कारोबारी मनोज प्रसाद का नाम आया. मनोज पर आरोप है कि वो सना से अस्थाना के लिए रिश्वत जुटा रहे थे. मनोज को मंगलवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किया गया. मनोज 25 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में हैं.

अस्थाना और कुमार के अलावा सीबीआई की एफ़आईआर संख्या 13A/2018 में मनोज प्रसाद और सोमेश्वर प्रसाद का नाम भी अभियुक्त के तौर पर दर्ज किया गया है. एफ़आईआर में दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच रिश्वत लेने की बात कही गई है.

सना के बयान के अनुसार रिश्वत पाँच बार से ज़्यादा दी गई. आरोप है कि एक करोड़ रिश्वत संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा दिरहम में दुबई में 10 दिसंबर, 2017 को दी गई. इसके तीन दिन बाद दिल्ली में 1.95 करोड़ की रक़म रिश्वत के तौर पर दी गई. 10 अक्टूबर को 25 लाख रिश्वत दी गई.

सीबीआई
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सीबीआई की जांच से पता चलता है कि सना के ख़िलाफ़ अक्टूबर और नवंबर 2017 में चार बार समन भेजे गए. आरोप है कि पांच करोड़ की रिश्वत में 2.95 करोड़ देने के बाद सना के ख़िलाफ़ समन जाना बंद हो गया.

सना फ़रवरी में मनोज प्रसाद से मिलने दुबई पहुंचे तो समन एक बार फिर से रोक दिया गया. कहा जा रहा है कि ऐसा तब हुआ जब समन एक दिन पहले जारी किया जा चुका था. बाद में सना के ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस जारी किया गया और विदेश जाने पर रोक लगा दी गई.

सीबीआई के भीतर लड़ाई में ये दो अफ़सर कौन हैं?

आलोक वर्मा सीबीआई प्रमुख हैं और राकेश अस्थाना दूसरे नंबर के अधिकारी हैं. इस अप्रत्याशित वाक़ये को छोड़ दिया जाए तो दोनों के करियर में ऐसा कोई विवाद नहीं रहा है. वर्मा 22 साल की उम्र में आईपीएस बने.

वर्मा अपने बैच में सबसे कम उम्र के आईपीएस थे. सीबीआई निदेशक से पहले वर्मा दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, दिल्ली में जेलों के डीजीपी, मिज़ोरम के डीजीपी, पुडुचेरी के डीजीपी और अंडमान-निकोबार के आईजी थे. आलोक वर्मा सीबीआई के पहले निदेशक हैं जिनके पास इस जांच एजेंसी का कोई अनुभव नहीं रहा है.

राकेश अस्थाना गुजरात काडर के 1984 बैच के आईपीएस हैं. इन्होंने कई अहम मुक़दमों की जांच की है, जिनमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का चारा घोटाला भी शामिल है. इसके साथ ही गोधरा में ट्रेन जलाने की जांच भी अस्थाना ने की थी.

मतलब पीएम मोदी के लिए अस्थाना कोई नया चेहरा नहीं हैं बल्कि गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए अस्थाना को उन्होंने कई ज़िम्मेदारी दी.

राकेश अस्थाना
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राकेश अस्थाना

सना सतीश बाबू कौन हैं?

सना सतीश बाबू का पैतृक निवास आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में है. वो छोटे समय के लिए राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारी रहे थे. नौकरी छोड़ने के बाद वो हैदराबाद चले गए और यहां टीडीपी, कांग्रेस और वाईएसआर के नेताओं से अच्छे संबंध बनाए.

सना सतीश बाबू का नाम शुरू में 2015 में ईडी की एक जांच में सामने आया. यह मामला मांस निर्यातक मोइन क़ुरैशी से जुड़ा था. 2017 में सना ने इस मामले में मोइन क़ुरैशी की तरफ़ से चीज़ों को सुलझाने की कोशिश की.

तब मामला ईडी और सीबीआई में आ चुका था. सना सतीश बाबू रसमा एस्टेट एलएलपी, गोल्डकोस्ट प्रॉपर्टीज़ प्राइवेट लिमिटेड, मैट्रिक्स नेचुरल रिसोर्सेज़ प्राइवेल लिमिटेड, ईस्ट गोदावरी ब्रेवरीज़ प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक रहे हैं.

सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा
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सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा

मोइन क़ुरैशी कौन हैं?

सीबीआई में दोनों निदेशकों के बीच टकराव के केंद्र में मांस निर्यातक मोइन क़ुरैशी हैं. मोइन क़ुरैशी का पूरा नाम मोइन अख़्तर क़ुरैशी है. क़ुरैशी देहरादून के दून स्कूल से और दिल्ली के सेंट स्टीफ़ेन्स कॉलेज से पढ़े हैं.

मोइन ने 1993 में अपना बिज़नेस शुरू किया था. तब उन्होंने उत्तर प्रदेश के रामपुर में मांस व्यापार की शुरुआत एक छोटे स्लॉटर हाउस से की थी.

आने वाले सालों में क़ुरैशी भारत के सबसे बड़े मांस कारोबारी बन गए. आगे चलकर क़ुरैशी ने अपने कारोबार का विस्तार किया. क़ुरैशी ने 25 अलग-अलग कंपनियां खोलीं जिसमें एक कंस्ट्रक्शन कंपनी और फ़ैशन कंपनी भी शामिल है.

2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी ने तब की कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी पर आरोप लगाया था कि उनसे क़रीबी की वजह से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट क़ुरैशी के ख़िलाफ़ जांच नहीं कर पा रहा है.

क़ुरैशी पर सीबीआई के पूर्व निदेशक एपी सिंह और रंजीत सिन्हा से क़रीबी होने के भी आरोप लगे थे. क़ुरैशी पर इनकम टैक्स नहीं भरने का आरोप हैं. ईडी क़ुरैशी के ख़िलाफ़ इस बात की भी जांच कर रही है कि उन्होंने विदेशों में कथित तौर पर 200 करोड़ छिपाकर रखे हैं.

BBC Hindi
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English summary
Why the curtain removed from the house of CBI and these four characters
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