सोनिया या ममता..किसकी अंग्रेजी से मुलायम जी को परेशानी?
ऐसे लोग दोहरे चरित्र और दोहरे व्यक्तित्व वाले होते हैं, मुलायम ने कहा कि संसद में अंग्रेजी भाषणों पर रोक लगनी चाहिए, जिन देशों ने अपनी मातृभाषा को सरकारी कामकाज की भाषा बनाया, उन्होंने ज्यादा तरक्की की है, दूसरे देशों में हिन्दी के प्रति रुझान बढ़ रहा है, जबकि हिन्दुस्तानी लोग इससे दूर हो रहे हैं जो कि गलत है।
मुलायम सिंह तो यह बात कहकर चलते बने लेकिन उनके इस बयान पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर काफी टिप्पणी की जा रही हैं। कुछ लोगों ने फेसबुक पर लिखा है कि मुलायम सिंह यादव पीएम बनने का ख्वाब पाले हुए हैं औऱ अंग्रेजी से दूर भाग रहे हैं जो कि बेहद गलत है।
मुलायम साफ करे कि संसद के किन नेताओं की अंग्रेजी उन्हें परेशान करती हैं क्या वह यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं जिनकी अंग्रेजी मुलायम सिंह के पल्ले नहीं पड़ती है या फिर वह पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बैनर्जी हैं जिन्हें तीसरे मोर्चे में शामिल करने के लिए मुलायम सिंह दिन-रात एक कर रहे हैं लेकिन उनकी फर्राटेदार अंग्रेजी, मुलायम के सिर से ऊपर निकल जाती है।
या फिर 2जी घोटाले की आंच में तपने वाले देश के वित्तमंत्री पी चिदंबरम की अंग्रेजी, जिनकी तल्ख टिप्पणियां मुलायम को समझ में नहीं आ रही हैं।
तो वहीं कुछ लोग मुलायम सिंह की बात का समर्थन भी कर रहे हैं और कह रहे हैं कि मुलायम सिंह ने सही कहा है कि अंग्रेजी के चक्कर में हमारे देश की राष्ट्रभाषा हिंदी की लोग उपेक्षा कर रहे हैं जो कि सही नहीं है।













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