तब राजीव को नहीं किया अब र्राहुल गांधी को क्यों किया जाता है टार्गेट?
नई दिल्ली। राहुल गांधी अचानक कहां चले गये, किसी को नहीं पता। मीडिया में खलबली मची हुई है, कि वो इस वक्त कहां हैं, क्या कर रहे हैं और कुछ विरोधी दलों में भी। इसमें कोई शक नहीं कि मीडिया जितना ज्यादा राहुल के पीछे पड़ा रहता है, उतना कभी राजीव गांधी के पीछे नहीं पड़ा। [राहुल गांधी के जूते में छिपे राज़]
मीडिया की नजर में राहुल बनाम राजीव! इन दोनों से जुड़ा एक सवाल कोरा डॉट कॉम पर आया। सवाल था कि राजीव गांधी की तुलना में राहुल गांधी के पीछे मीडिया इतना ज्यादा क्यों पड़ा रहता है? इस सवाल पर हर्षा हेगड़े ने अपनी बात रखी। उन्होंने बालाजी विश्वनाथन से बातचीत के आधार पर तीन जवाब दिये।
- तब टीवी चैनल सिर्फ एक था- दूरदर्शन और उस पर भी सुबह और शाम सिर्फ दो बुलेटिन आते थे, वो भी आधे-आधे घंटे के। आज 24X7 चैनल हैं मीडिया के पास बहत सारे स्लॉट हैं।
- तब सोशल मीडिया नाम की चीज नहीं हुआ करती थी, आज फेसबुक, ट्विटर, कोरा, गूगल प्लस, समेत कई प्लेटफॉर्म हैं, जहां लोग अपनी बात रख सकते हैं।
- उस जमाने में भी विरोधी दलों के जनसंपर्क विभाग सामने वाले की कमजोर नब्ज को टटोलते थे और आज भी वही काम कर रहे हैं। अफसोसवश कांग्रेस की कमजोर नब्जों में से एक राहुल गांधी भी हैं।
- राहुल गांधी वो सॉफ्ट टार्गेट हैं, जहां पर कोई भी दल आसानी से वार कर सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि राहुल गांधी ने कभी भी मजबूत पलटवार नहीं किया।
अब सवाल आपसे-













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