6 महीने हिरासत के बाद उमर अब्दुल्ला-महबूबा मुफ्ती पर क्यों लगाया गया PSA, सामने आया डोजियर

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को 6 महीने ऐहतियातन हिरासत में रखने के बाद कठोर पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट (पीएसए) के तहत क्यों हिरासत में लिया गया, उस डोजियर का खुलासा हो गया है। बता दें कि दोनों नेताओं को तब पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया है, जब उनकी एहतियाती हिरासत की सीमा खत्म ही होने वाली थी। ये भी बता दें कि उमर अब्दुल्ला के पिता फारूक अब्दुल्ला पिछले पांच महीने से इसी कानून के तहत नजरबंद हैं। यह कानून बहुत ही सख्त है और इसके तहत व्यक्ति को दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इस कानून के तहत 24 घंटे के भीतर अदालत में पेशी की भी जरूरत नहीं है और हिरासत में रखा गया व्यक्ति बिना इजाजत वकील भी नहीं रख सकता।

उमर-महबूबा पर इस वजह से लगा पीएसए

उमर-महबूबा पर इस वजह से लगा पीएसए

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के बारे में डोजियर में ये बात सामने आई है कि उनमें लोगों को प्रभावित करने की पर्याप्त क्षमता है। मसलन वह चुनाव बहिष्कार के बावजूद वोटरों को मतदान बूथ तक बुला सकते हैं और जनता की ऊर्जा को किसी भी मुद्दे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। पीएसए के तहत उनकी गिरफ्तारी के लिए ये दलीलें दी गई हैं। पुलिस ने अब्दुल्ला जूनियर के खिलाफ जो डॉजियर तैयार किया है, उसमें 49 साल के नेता बारे में इस बात का जिक्र है कि कैसे भयंकर आतंकवाद के समय मे भी वह आतंकियों और अलगाववादियों की ओर से चुनाव बहिष्कार के आह्वान को खारिज कर ज्यादा से ज्यादा संख्या में वोटरों को बूथ तक ला पाने में सक्षम थे। उमर को हिरासत में रखने की वजहों में यह भी शामिल है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35 ए हटाने से एक दिन पहले आम जनता को भड़काने की कोशिश की। इसके लिए सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणियों का हवाला दिया गया है, हालांकि, डोजियर में उनकी कथित टिप्पणियां शामिल नहीं की गई हैं।

महबूबा पर राष्ट्र-विरोधी बयान का आरोप है

महबूबा पर राष्ट्र-विरोधी बयान का आरोप है

उमर की सियासी विरोधी और पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती पर राष्ट्र-विरोधी बयान देने और प्रदेश में जमात-ए-इस्लामिया जैसे संगठनों के समर्थन का आरोप है, जिसपर अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रीवेंशन) ऐक्ट (UAPA) के तहत पाबंदी लगी हुई है। उनपर पीएसए लगाने के लिए ये दलील भी दी गई है कि उन्होंने आर्टिकल 370 हटाने की स्थिति में पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर को भारत में बनाए रखने की चुनौती दी थी। उनके खिलाफ डोजियर में सुरक्षा बलों के हाथों आतंकवादियों के मारे जाने पर दिए गए बयानों को भी शामिल किया गया है।

सितंबर से ही पीएसए के तहत हिरासत में हैं फारूक

सितंबर से ही पीएसए के तहत हिरासत में हैं फारूक

बता दें कि उमर अब्दुल्ला और 60 साल की उनकी सियासी विरोधी महबूबा को पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने से ठीक पहले ऐहतियातन हिरासत में ले लिया गया था। लेकिन, इन दोनों नेताओं के खिलाफ बीते 6 फरवरी को पीएसए लगाया गया है, जब उनकी एहतियाती हिरासत की मियाद कुछ ही घंटे बाद पूरी होने वाली थी। नियमों के मुताबिक एहतियाती हिरासत 6 महीने से भी ज्यादा बढ़ाई जा सकती है, सिर्फ तभी जब 180 दिन की समयसीमा खत्म होने से दो हफ्ते पहले गठित की गई एडवाइजरी बोर्ड इसकी सिफारिश करे। बता दें कि उमर अब्दुल्ला के पिता फारूक अब्दुल्ला पिछले साल सितंबर महीने से ही पीएसए के तहत हिरासत में रखे गए हैं।

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