पीएम मोदी ने 'नरक के द्वार' पर खड़े होकर क्यों फूंका 2019 का चुनावी बिगुल
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर के मगहर में कबीर दास की 500वीं पुण्यतिथि पर सभा को संबोधित किया। मोदी ने कबीर की मजार पर चादर चढ़ाई और कबीर एकेडमी रिसर्च संस्थान की आधारशिला रखी। इसे 2019 के चुनाव प्रचार की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। यहां बोलते हुए भी पीएम मोदी ने कबीरदास के बारे में तो बातें की हीं, सपा, बसपा और कांग्रेस को भी जमकर निशान पर लिया और चुनावों में इन पार्टियों से सावधान रहने को भी कहा।

मगहर के बारे में कहा जाता है कि यहां मरने वाला नरक में जाता है। कबीर ने यहां आखिरी सांस लेकर यह भ्रम तोड़ने की कोशिश की थी कि मगहर में मरने वाला व्यक्ति नरक में जाता है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 लोकसभा चुनाव का बिगुल 'नरक के दरवाजे' (मगहर) से क्यों बजाया है।
कबीर के समय में ही ये फैलाया गया था कि वाराणसी में मरने वाला व्यक्ति मुक्ति पाएगा जबकि मगहर में मरने वाला नरक जाएगा। मोदी ने 2014 में वाराणसी से चुनाव लड़ा था और इस बार मगहर को उन्होंने प्रचार की शुरुआत के लिए मगहर को चुना है। मगहर को चुनने के पीछे मोदी की एक बड़ी योजना की तरह से देखा जा रहा है।
मगहर पूर्वी उत्तर प्रदेश का वो इलाका है, जहां बड़ी संख्या में अति-पिछड़ा और दलित समाज के लोग रहते हैं। जो लोग कबीरपंथी माने जाते हैं। इन वोटरों को बहुजन समाज पार्टी के करीब माना जाता है, नरेंद्र मोदी ने कबीर की मजार पर जाकर इस बड़े तबके को भी साधने की कोशिश की है।
दलितों के साथ-साथ मुसलमानों में भी कबीर को मानने और उनको पसंद करने वाले लोगों की बड़ी तादाद है। मोदी सरकार के चार सालों में दलितों और मुस्लिमों पर हमलों की कई घटनाएं हुई हैं। ऐसे में मोदी के कबीर की मजार पर जाने से ये भी संदेश जाएगी कि उनकी सरकार दलितों और मुस्लिमों के साथ है। इससे पहले मन की बात में भी मोदी ने कबीरदास का जिक्र करते हुए लोगों को धर्म और जाति से ऊपर उठने की उनकी शिक्षा को मानने की बात कही थी।












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