ममता बनर्जी के सुपरहिट शो से चूर-चूर हो गया मायावती का ये सपना!
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 'एंटी बीजेपी यूनाइटेड इंडिया रैली' में शनिवार को बड़े-बड़े नेताओं का जमावड़ा लगा। कोलकाता में हुई ममता बनर्जी की इस रैली से सिर्फ दो हस्तियां दूर रहीं- बसपा सुप्रीमो मायावती और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, लेकिन दोनों ने पार्टी की ओर से प्रतिनिधि भेजकर एकजुट विपक्ष का पैगाम जरूर भिजवाया। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने ममता की महारैली में हिस्सा लिया और कहा- '22 पार्टियों का इन्द्रधनुष दिखाई दे रहा है। आप इसे महागठबंधन या कुछ और नाम दे दीजिए।' महारैली में बिहार से तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर से फारुख अब्दुल्ला, यूपी से अखिलेश यादव, शरद यादव, अरविंद केजरीवाल, यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा, अरुण जेटली, अजित सिंह, हार्दिक पटेल जैसे चेहरे नजर आए। ममता बनर्जी ने महारैली कर साबित कर दिया कि अगर 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में नहीं रहे तो तीसरे मोर्चे की सरकार की मुखिया यानी पीएम पद की सबसे बड़ी दावेदार वही होंगी। ममता बनर्जी की इस महारैली का असर 2019 चुनाव में कितना होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय हो गया कि मायावती का पीएम पद की दावेदारी का ख्वाब अब ख्वाब ही रह जाएगा।

पीएम पद की दावेदारी के लिए ये दो फैक्टर्स सबसे अहम, दोनों में ममता निकलीं आगे
2019 लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा के बीच गठबंधन का ऐलान करते वक्त अखिलेश यादव ने बड़ी अहम बात कही थी। उनसे पूछा गया था कि क्या मौका मिलने पर वह मायावती की पीएम पद की दावेदारी का समर्थन करेंगे। इस पर अखिलेश दो बातें कही थीं। पहली- आप जानते हैं मैं किसे सपोर्ट करूंगा, (इशारा मुलायम की तरफ था)। दूसरी महत्वपूर्ण बात उन्होंने यह कही कि उत्तर प्रदेश ने हमेशा प्रधानमंत्री दिए हैं और वह चाहेंगे कि अगला पीएम भी उत्तर प्रदेश से ही हो। मतलब जरूरत पड़ने पर अखिलेश यादव अपनी बुआ मायावती का समर्थन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। बुआ मायावती बबुआ की इस बात पर मुस्कुरा गई थीं। बसपा कार्यकर्ता भी मायावती को पीएम के तौर पर देखने की बात करते रहे हैं। 2019 को मायावती भी बड़े मौके के तौर पर देख रही थी, लेकिन ममता बनर्जी की महारैली से साबित हो गया है कि मायावती अब पिछड़ गई हैं। इसके पीछे दो प्रमुख फैक्टर हैं- किसी भी पार्टी के नेता के पीएम पद की दावेदारी के लिए पहली जरूरत है सीटों की संख्या और गठबंधन वाली सरकार में दूसरा फैक्टर होता स्वीकार्यता।

42 सीटों पर लड़ रहीं ममता बनर्जी, मायावती 38 पर लड़ेंगी लोकसभा चुनाव
सबसे पहले सीटों की संख्या की बात करते हैं। उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाला राज्य है। यहां 80 लोकसभा क्षेत्र हैं। इस लिहाज से ममता बनर्जी की तुलना में मायावती के पास ज्यादा अच्छा मौका था, लेकिन सीटों के लिहाज से मायावती की बात बनती नहीं दिख रही है। 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के सामने ममता बनर्जी मजबूती से टिकी रहीं थी। उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से 34 जीत ली थीं। दूसरी ओर मायावती अपनी जमीन पूरी तरह खो बैठीं। बसपा यूपी में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। अब 2019 की बात करते हैं। ममता बनर्जी 42 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि मायावती 38 सीटों पर। अब कौन कितनी सीटें जीतता है यह परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन अभी तक ममता बनर्जी ज्यादा सीटों पर लड़ रही हैं और इस समय भी उनके पास मायावती से ज्यादा ताकत है।

ममता की तैयारी से मायावती को लगा झटका
मायावती 2019 लोकसभा चुनाव में पीएम पद की दावेदारी का ख्वाब जरूर देख रही हैं, लेकिन ममता बनर्जी की तरह वह गैर कांग्रेस, गैर बीजेपी खेमे को एकत्रित नहीं कर पाई हैं, जबकि ममता बनर्जी से अभी से यह साबित कर दिया है कि उनकी स्वीकार्यता पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं है। 2019 में क्या होगा यह तो अभी वक्त के गर्भ में छिपा है, लेकिन इतना जरूर है कि ममता बनर्जी ने पीएम पद की दावेदारी के मामले में इस समय तो मायावती के सपने को चूर-चूर करके रख दिया है। ममता की महारैली में जिस प्रकार से इक्का-दुक्का को छोड़ कर पूरा विपक्ष एकजुट हुआ, उससे स्पष्ट है कि ममता बनर्जी की तैयारी मायावती के लिए बड़ा झटका है। वैसे, मायावती के बारे में कहा जाता है कि वह अंतिम समय तक पत्ते नहीं खेलती हैं। ममता बनर्जी की रैली में उनका न जाना इस ओर भी इशारा करता है कि उनके पास प्लान-बी रेडी है, जिसका वक्त आने पर वह इस्तेमाल कर सकती हैं।












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