हिंदू सेना क्यों कर रही पीएम मोदी का विरोध, क्या धर्मस्थल से जुड़ा है मामला?
Ajmer Sharif Dargah Row: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर बार अजमेर शरीफ पर सलाना उर्स के मौके पर चादर चढ़ाते हैं। हर बार की तरह इस बार भी पीएम मोदी की ओर से अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाई जाएगी। इस बार ये चादर केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा चढ़ाई जाएगी लेकिन पीएम मोदी के इस फैसले का हिंंदू सेना नाराज हो गई है।
दरअसल, पीएम मोदी से हिंदू सेना ने अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर ना चढ़ाने की अपील की थी क्योंकि उसका दावा है कि दरगाह में असल में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। लेकिन पीएम मोदी ने परंपरा को कायम रखते हुए अब 11वीं बार अजमेर शरीफ की दरगाह में चादर चढ़ाने का निर्णय ले लिया है, जिसके कारण हिंदू सेना नाराज हो गई है और उसने विरोध शुरू कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यालय को ये पत्र हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने लिखा था। जिसमें उन्होंने अनुरोध किया था कि पीएम मोदी की ओर से दरगाह में चादर चढ़ाने का कार्यक्रम तब तक स्थगित कर दिया जाए जब तक कि दरगाह और मंदिर का मामला कोर्ट में लंबित है। हिंदू सेना की अपील के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दरगाह में चादर चढ़ाने का फैसला किया है।
हिंदू सेना ने अजमेर शरीफ के लेकर क्या किया है दावा?
बता दें हिंदू सेना के संस्थापक और अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के अंदर एक प्राचीन शिव मंदिर होने का दावा किया है और वो कोर्ट में इससे संबंधित केस लड़ रहे हैं। उन्होंने कोर्ट में पर्याप्त सबूत पेश किए है और दावा किया है कि अजमेर शरीफ में महादेव का प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण चौहान वंश में करवाया गया था।
उन्होंने अपने केस में पूरी दरगाह का वैज्ञानिक सर्वे कराने की अपील की है। वहीं अब पीएम मोदी से अपील की है कि जब तक इस पर कोर्ट का फैसला ना आ जाए तब तक चादर चढ़ाने का फैसला वो स्थगित कर देंं। याद रहे इस मामले में 24 जनवरी को कोर्ट सुनवाई करेगा।
कौन हैं विष्णु गुप्ता?
विष्णु गुप्ता हिंदू सेना के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। यूपी के एटा जिले के निवासी विष्णु गुप्ता दिल्ली में आकर वर्षों पहले बस गए और यहां पर उन्होंने हिंदू सेना की स्थापना की। हिंदू सेना का उद्देश्य भारत में लव जिहाद, इस्लामी उग्रवाद, शरिया कानून और इस्लामीकरण का विरोध करना है। इस्लामीकरण का विरोध करना और शरिया कानून, लव जिहाद, और इस्लामीकरण के खिलाफ आवाज उठाना और उसे रोकना है। वहीं अब इस मुद्दें के कारण वो लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।
दरगाह में किए गए हैं सुरक्षा के कड़े इंतजाम
चूंकि ये केस अभी कोर्ट में लंबित हैं इसलिए दरगाह में होने वाले सलाना उर्स में हर बार की तुलना में अधिक फोर्स तैनात की गई है। दरगाह में चल रहे उर्स में कड़ी सुरक्षा के इंतजाम के तहत 600 जवानों की रैपिडट एक्सन फोर्स, सीआरपीएफ और बॉडी वार्न कैमरे लगाए गए हैं।












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