• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

नज़रिया: बीजेपी को क्यों लगता है कि जीत जाएगी 2019?

By रामकृपाल सिंह - वरिष्ठ पत्रकार

नरेंद्र मोदी और अमित शाह
Reuters
नरेंद्र मोदी और अमित शाह

ख़बर है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी के लिए 360 से ज़्यादा सीटें हासिल करने का लक्ष्य रखा है. क्या है इतना बड़ा लक्ष्य रखने की वजह और क्या बीजेपी के लिए इसे हासिल करना आसान होगा?

राजनीतिक पार्टियां हमेशा बड़ा लक्ष्य लेकर चलती हैं. उनकी कोशिश होती है कि पिछली बार उन्हें जितनी सीटें मिली थीं, अगली बार उससे ज़्यादा मिलें. चुनाव की तैयारी हमेशा बड़ा लक्ष्य रखकर ही की जाती है. अगर यह लक्ष्य कम रखा जाता है तो इसका संदेश ग़लत जाता है.

मगर आज के हालात को देखें तो बीजेपी का यह लक्ष्य रखना स्वाभाविक है. 2019 में क्या होगा, यह कोई नहीं जानता. लेकिन मौजूदा हालात में बीजेपी आत्मविश्वास से भरी हुई है. उत्तर प्रदेश के चुनाव में उसे ज़ोरदार जीत मिली, कई एजेंसियों के सर्वे भी उसके पक्ष में आते दिख रहे हैं. साथ ही जिस तरह से विपक्ष बिखरा हुआ है, उससे बीजेपी को लगता है कि उसके लिए यह बड़ा लक्ष्य नहीं है.

नज़रिया: अहमद पटेल की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी

बीजेपी रैली
Getty Images
बीजेपी रैली

मोदी और शाह: ज़बानें दो, मक़सद एक

'बीजेपी के पक्ष में नज़र आ रहे हैं हालात'

रणनीतिक रूप से भी ऐसा किया जाता है. राजनीति में तो अगर किसी की ज़मानत ज़ब्त होने वाली होती है, तब भी वह कहता है सरकार उसी की बनने वाली है. नेता को भले सच पता हो, वह नतीजे आने तक घबराहट या परेशानी जनता को नहीं दिखाना चाहता. सभी पार्टियां ऐसा करती हैं और फिर बीजेपी के पास तो ऐसा करने की वजह भी है.

कश्मीर से कन्याकुमारी और कामरूप से कच्छ तक देखेंगे तो हालात बीजेपी के पक्ष में नज़र आते हैं. तमिलनाडु को भी देखें तो वहां हो रही प्रगति बीजेपी के पक्ष में आती दिख रही है. ऐसा कभी कांग्रेस के साथ होता था. सीटें भले कम हों, मगर फैलाव ज़्यादा था. आज ऐसा ही बीजेपी के साथ है.

अमित शाह
Getty Images
अमित शाह

दूर-दूर तक ऐसा नजर नहीं आ रहा कि कोई राष्ट्रीय पार्टी बीजेपी को चुनौती दे रही हो. जो राष्ट्रीय पार्टी उसे चुनौती देने वाली थी, वह तो क्षेत्रीय दलों के पीछे खड़ी हो गई है. आगे खड़ी होती तो बात अलग थी. पश्चिम बंगाल हो, बिहार हो या फिर उत्तर प्रदेश हो, वह तीसरे-चौथे नंबर की पार्टी हो गई है. ऐसे में बीजेपी की रणनीति है कि जब हम एक मज़बूत राष्ट्रीय पार्टी हैं तो लक्ष्य बड़ा करके चलो.

मोदी और अमित शाह से बड़े इवेंट मैनेजर नहीं हैं पीके

वो वाघेला जिन्होंने मोदी को गुजरात से बाहर निकलवाया

'मोदी की लोकप्रियता से बीजेपी फ़ायदे में'

अब बात आती है कि इस लक्ष्य को हासिल कर पाना बीजेपी के लिए कितना आसान होगा. आजकल पार्टी के मुखिया पर बहुत सी चीज़ें निर्भर करने लगी हैं. 2014 के बाद की बीजेपी उससे पहले की बीजेपी से अलग है. नेशनल लीडरशिप बनकर उभरी है. आज सभी मानते हैं कि वोट मोदी जी के नाम पर पड़ता है. ठीक उसी तरह, जैसे कभी इंदिरा गांधी के नाम पर वोट मिलता था. आज जितने भी सर्वे आ रहे हैं उनमें मोदी की लोकप्रियता की टक्कर में कोई नहीं दिखता.

1969 में जब कांग्रेस का विभाजन हुआ था तो इंदिरा अकेली निकली थीं. उन्होंने विरोधियों को गाली देने या उनकी आलोचना करने के बजाय नया नारा दिया- ग़रीबी हटाओ. उन्होंने प्रिवी पर्स को ख़त्म किया और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया. उस वक्त कांग्रेस के बड़े नेता एकजुट थे और इंदिरा अकेली थीं.

अमित शाह और मोदी
Getty Images
अमित शाह और मोदी

वैसे तो चुनाव में कई फैक्टर होते हैं, मगर आज बीजेपी ने एक नैरेटिव देने के लिए यह नारा दे दिया. बीजेपी की सफलता राज़ यह है कि वह ज़रूरत पड़ने पर अटैक तो करती ही है, नई बातें भी सामने रखती है. जबकि पूरा विपक्ष इसी बात पर फ़ोकस कर रहा है कि मोदी को कैसे हटाएं. ऐसे में बीजेपी फ़ायदे में है.

(बीबीसी संवाददाता आदर्श राठौर से बातचीत पर आधारित)

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Why does BJP feel that in 2019 Lok Sabha elections will win?
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X