समर्पित कांग्रेस नेता होते हुए RSS के कार्यक्रम में क्यों शामिल हुए थे प्रणब मुखर्जी? जानिए क्या है पूरी बात
देश के पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के नेता रह चुके प्रणब मुखर्जी देश के राजनीति धुरंधर के साथ-साथ एक बड़े अर्थशास्त्री भी थे। सक्रिय राजनीति में रहते हुए इंदिरा युग देख चुके प्रणब को एक कट्टर कांग्रेसी के रूप में देखा जाता था। देश के 13वें राष्ट्रपति बनने के साथ उनके सक्रीय राजनीति पर विराम लगा था।
वो विचारों में जिसने स्पष्ट थे, विचारधारा से उतने ही स्वच्छंद थे। इसका एक उदाहरण तब देखने को मिला जब राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद इन्हें संघ की ओर से एक कार्यक्रम का आमंत्रण मिला।

प्रणब मुखर्जी उस कार्यकर्म में शामिल भी हुए। कई दशकों तक कांग्रेस पार्टी के समर्पित नेता रहे प्रणब मुखर्जी जब संघ के कार्यक्रम में दिखे तो लोगों को काफी आश्चर्य हुआ।
उस कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी ने अपने जीवन का यादगार भाषण भी दिया था। उन्होंने भारत की खोज और राष्ट्रीयता को परिभाषित करते हुए अपनी बात रखी थी। इसके साथ ही उन्होंने बाल गंगाधर तिलक के स्वराज, जवाहरलाल नेहरू की भारत की खोज और स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल के क्षेत्रीय बंटवारों के
प्रयासों के लिए किए गए आह्वान का जिक्र किया था।
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देश के संविधान का बखान करते हुए उन्होंने कहा था, कि हमारा संविधान हमारे अंदर राष्ट्रवाद लेकर आता है। जिसमें हमारी साझा विविधता की सराहना होती है।
संघ के संस्थापकों में से एक रहे गोलवलकर की किताब से उन्होंने राष्ट्रवाद के पांच लेखों का भी जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था, "भारत का राष्ट्रवाद एक भाषा, एक धर्म, एक दुश्मन नहीं है। यहां करीब 1 अरब 30 करोड़ लोग 122 से ज्यादा भाषाएं और 1,600 बोलियां बोलते हैं। यहां सात अलग-अलग धर्म हैं, तीन प्रमुख जातीय समूह- आर्य, मंगोलोइड्स और द्रविड़ियन मिलकर एक प्रणाली के तहत रहते हैं। जो भारतीय होने की एक पहचान बताता है।"
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प्रणब मुखर्जी के भाषण से यह पता चला कि वो संघ के विचारकों को भी देखते, समझते और पढ़ते रहे हैं। अपने भाषण के अंत में उन्होंने सभी को समझाया कि वे संघ के नागपुर मुख्यालय में क्यों आए थे।
उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में, राष्ट्रीय महत्व के सभी मुद्दों पर लोगों का जुड़ना काफी जरुरी है, संवाद जरुरी है और सिर्फ बातचीत के जरिए ही हम जटिलता को हल करने की समझ विकसित कर सकते हैं।"
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