Dhaula Kuan: दिल्ली के 'धौला कुआं' की कहानी, जानिए क्या संबंध है इसका देश की आजादी से

दिल्ली, यूं तो यहां कई घूमने की जगह है लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश की राजधानी में स्थिति कई जगहों का अपना एक इतिहास रहा है। दिल्ली घूमते या इसकी एक जगह से दूसरी जगह आने जाने के दौरान हम कई ऐसी जगहों से होकर गुजरते हैं जिनका हमें इतिहास नहीं मालुम। ऐसी ही एक जगह है दिल्ली का धौला कुआं।

अक्सर ऐसा होता है कि किसी भी जगह के नाम के पीछे कोई कहानी छुपी होती है। धौला कुआं भी अपने अंदर एक कहानी समेटे हुए है। दिल्ली के रिंग रोड के पास स्थित चौराहे का नाम धौला कुआं है। जब आप धौला कुआं मेट्रो स्टेशन के पास जाएंगे तो वहां के पेट्रोल पंप के ठीक पास में डीडीए का के पार्क है। इस पार्क के अंदर एक कुआं है। इसी कुएं को धौला कुआं कहा जाता है। इसी कुएं के नाम पर इस चौराहे का नाम धौला कुआं रखा गया था। इस कुएं को सुरक्षित रखने के लिए अब इसे लोहे के जाल से ढक दिया गया है।

Dhaula Kuan

क्या थी धौला कुआं की खासियत?
धौला कुआं कोई आम कुआं ना होकर काफी खास था। इसमें हल्के सफेद रंग का पानी आया करता था। धौला का शाब्दिक अर्थ धवल यानी की बिल्कुल सफ़ेद होता है। इसी वजह से इसका नाम धौला कुआं रखा गया था। पहले इस कुएं से पानी निकाला भी जाता था। अब इस कुएं को ऐतहासिक धरोहर के रूप में सहेज कर रखा गया है। पुराने जामने में इसका पानी खेती के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

आज धौला कुआं के आसपास लंबी चौड़ी सड़कें नजर आती हैं लेकिन एक समय यह खुला क्षेत्र हुआ करता था। यहां रहने वाले किसान इस कुएं के पानी से अपने फसलों को सींचा करते थे। काफी सालों तक डीडीए पार्क के कर्मचारी पार्क में लगी घास को सींचने के लिए इसी कुएं के पानी का इस्तेमाल किया करते थे।

क्या है धौला कुआं का इतिहास?
धौला कुआं के आसपास रहने वाले बुजुर्गों का कहना है कि ये कुआं 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से भी संबंधित है। उन लोगों का कहना है कि कुछ वीर सेनानियों ने इसी कुएं पर आकर देश को आजाद कराने के लिए शपथ ली थी। उन्होंने यहां शपथ ली थी कि वो मर जाएंगे लेकिन अंग्रेजों के सामने सर नहीं झुकाएंगे। हालांकि इतिहास के पन्नों में इस बात जिक्र कहीं नहीं है लेकिन कुछ दंतकथाएं भी सही साबित होती हैं।

यहां है दिल्ली का सबसे ऊंचा मेट्रो स्टेशन
धौला कुआं के इतिहास से हट कर अगर वर्तमान की बात करें तो आज भी ये जगह अपनी एक खास पहचान रखता है। नोएड़ा- गुरुग्राम से ऑफिस आने जाने का रास्ता इसी इलाके से होकर गुजरने के कारण यहां काफी भीड़ होती है। इस जगह पर बना मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो का सबसे ऊंचा मेट्री स्टेशन है। ये ऑरेंज लाइन पर आती है और ये मेट्रो डायरेक्ट एयरपोर्ट से कनेक्ट होती है। इस मेट्रो स्टेशन की ऊंचाई 23.6 मीटर है।

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