क्यों लाल कृष्ण आडवाणी के मन में अटल जी को लेकर पैदा हो गई थी हीन भावना ? 94वां जन्मदिन पर उनकी कही बड़ी बातें

नई दिल्ली, 7 नवंबर: बीजेपी के बुजुर्ग नेता और पार्टी के संस्थापकों में से एक देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री और पूर्व गृहमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी का सोमवार को 94वां जन्मदिन है। 8 नवंबर, 1927 को मौजूदा पाकिस्तान के कराची में जन्मे आडवाणी के सामाजिक-राजनीतिक करियर की शुरुआत 1942 में तब हुई थी, जब वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े थे। इसके बाद इनका राजनीतिक करियर जनसंघ से बढ़ना शुरू हुआ और इन्होंने 2 संसदों वाली बीजेपी को मौजूदा सत्ता शिखर तक पहुंचाने में अनमोल योगदान दिया। जन संघ के संस्थापकों में से श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीन दयाल उपाध्याय जैसे दिग्गजों के बाद कई दशकों तक भाजपा की पहचान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी की अगुवाई वाली बीजेपी के रूप में हुई। बहुत कम लोगों को मालूम है कि वाजपेयी जी अगर एनडीए के मुखिया बनकर तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने तो उनके पीछे आडवाणी जी का पूर्ण समर्थन और समर्पण शामिल था।

सोमवार को आडवाणी का 94वां जन्म दिन है

सोमवार को आडवाणी का 94वां जन्म दिन है

भारतीय जनता पार्टी आज जिस तरह से देश की राजनीति में कांग्रेस के प्रभाव को सीमित करके विशाल राज सत्ता कायम करने में सफल हुई है तो उसके पीछे देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी का बहुत ही बड़ा योगदान है। आडवाणी सोमवार को 94वां जन्मदिन मनाएंगे। इस समय वह केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल हैं। इसी हैसियत से रविवार को उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी शामिल हुए। एलके आडवाणी कराची में पैदा हुए और वहां के सेंट पैट्रिक्स हाई स्कूल में पढ़ाई करने के बाद हैदराबाद (अब पाकिस्तानी) के डीजी नेशनल कॉलेज से पढ़ाई की। विभाजन के दौरान उन्हें अपने परिवार वालों के साथ भारत आना पड़ा और उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। भाजपा 1980 बनी और उसके बाद 1984 के लोकसभा चुनाव में उसके सिर्फ 2 सांसद जीते थे। 1986 में आडवाणी जी पार्टी के अध्यक्ष बने और 1989 के आम चुनाव में पार्टी के सांसदों की संख्या 85 पहुंच गई।(जन्मदिन की तस्वीर-8 नवंबर, 2020)

'विभाजन अंग्रेजों का अपराध था, आपातकाल हमारा'

'विभाजन अंग्रेजों का अपराध था, आपातकाल हमारा'

अपनी उम्र की वजह से एलके आडवाणी भले ही आज सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन पीएम मोदी के जमाने में बीजेपी जिस बुलंदियों को छू रही है, उसमें आडवाणी के योगदान को चाह कर भी नहीं मिटाया जा सकता। यहां हम दिग्गज भाजपा नेता की कही कुछ चुनिंदा बातों का जिक्र कर रहे हैं, जो न सिर्फ एक पार्टी होने के नाते बीजेपी की विरासत है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी उसका वजूद हमेशा महसूस किया जाने वाला है।

1- '(संघ के लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए) आरएसएस के बनाए हुए लोग.....जब हम आज बीजेपी की आज की इमारत को देखते हैं, यही लोग इसकी आधारशिला हैं।'

2- 'विभाजन अंग्रेजों का अपराध था। आपातकाल हमारा है'

3- '(पार्टी की) सीमाएं नहीं लांघनी चाहिए। हालांकि, पार्टी के भीतर की अशांति राज्य के विकास को प्रभावित नहीं करेगी।'

4- 'भारत को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में केंद्र में एक ईमानदार सरकार मिली है। सरकार अपने सभी वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसा करने के लिए वह सही दिशा में आगे बढ़ रही है।'

कब अटल जी को लेकर पैदा हो गई थी हीन भावना ?

कब अटल जी को लेकर पैदा हो गई थी हीन भावना ?

5- 2011 में अपने 85वें जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम में लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा था, 'मैंने 1970 के दशक की शुरुआत में अटल बिहारी वाजपेयी से कहा था कि उनके भाषणों के कारण मुझ में एक हीन भावना विकसित हो गई है।' यही नहीं उन्होंने यह भी कहा था, 'मैं यही बात सुषमा स्वराज (पूर्व विदेश मंत्री) के लिए भी कहता हूं। सही में मुझे ये लगता है।'

6- उन्होंने कहा था कि वह सार्वजनिक भाषणों से हमेशा बचते थे। यहां तक कि उन्होंने जन संघ का अध्यक्ष बनना भी ठुकरा दिया था, जो कि आज बीजेपी बनकर उभरी है। क्योंकि उनको लगता था कि वह सार्वजनिक सभाओं को नहीं संबोधित कर पाएंगे। उन्होंने कहा था, 'मैं अटल जी को लेकर अचंभे में था, और पहले महसूस करता था कि जब राजनेता इतना अच्छा बोलेंगे तो मैं नहीं बन पाऊंगा।'

7- 'अटलजी को केंद्र में पहली स्थिर गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकार के अग्रदूत के रूप में याद किया जाएगा और मुझे उनके डिप्टी के रूप में 6 साल तक काम करने का सौभाग्य मिला।'

'कार सेवकों को गोली, आतंकियों को बिरयानी'

'कार सेवकों को गोली, आतंकियों को बिरयानी'

8-'कार सेवकों के लिए गोली और कश्मीरी आतंकवादियों के लिए बिरयानी।'

9- 'भारत को अपने मूल रूप से हिंदूत्व की छवि के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए।'

10- 'सबसे पहले राष्ट्र, फिर पार्टी, अंत में स्वयं।'

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