भीम आर्मी के चंद्रशेखर उर्फ रावण से क्यों दहशत में है भाजपा? ये है असल वजह

नई दिल्ली। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण को 15 माहीने जेल में रखने के बाद आखिरकार शुक्रवार तड़के करीब पौने तीन बजे रिहा कर दिया गया। चंद्रशेखर पिछले साल जून महीने से रासुका के मामले में जेल में बंद थे। चंद्रशेखर की एनएसए की अवधि नौ महीने हो ही चुकी थी और इसे तीन महीने सरकार और बढ़ा सकती थी लेकिन सरकार ने वक्त से पहले ही चंद्रशेखर को रिहा करने का फैसला किया। इस रिहाई को सियासी गलियारों में अहम माना जा रहा है क्योंकि ये रिहाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों के साथ-साथ देश के दूसरे हिस्सों में भी दलित राजनीति पर असर डाल सकती है। मगर जेल से बाहर आते ही चंद्रशेखर ने बीजेपी के खिलाफ हल्ला बोल दिया और अपने लोगों से बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने की अपील की है।

Chandarshakhar
बढ़ेगी बीजेपी की परेशानी?
भीम आर्मी ने अभी तक खुद सीधे तौर पर चुनाव मैदान में उतरने की बात नहीं की है लेकिन चंद्रशेखर ने महागठबंधन के समर्थन का ऐलान करके बीजेपी में हलचल बड़ा दी है। अब सवाल यहां पर ये उठ रहा है कि चंद्रशेखर किस तरह से खासकर बीजेपी के समीकरणों को बिगाड़ सकते हैं। साल के आखिर में कुछ बड़े राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव से पहले चंद्रशेखर उर्फ रावण की ये रिहाई बड़े मायने रखती है।
बीजेपी का राजनीतिक दांव

बीजेपी का राजनीतिक दांव

2014 में बीजेपी को केंद्र की सत्ता तक पहुंचाने में उत्तर प्रदेश की खास भूमिका रही थी और उत्तर प्रदेश में दलितों ने मायावती को छोड़कर बीजेपी का साथ दिया था। लेकिन उसके बाद से देश में दलितों के साथ जिस तरह की घटनाएं हुईं उससे बीजेपी को काफी नुकसान हुआ। उत्तर प्रदेश और बिहार के उपचुनावों में विपक्षी महागठबंधन ने भी बीजेपी को बड़ा झटका दिया। बीजेपी को पता है कि अगर उसे 2019 में फिर केंद्र की सत्ता पर काबिज होना है तो इसका रास्ता उत्तर प्रदेश से ही होकर जाएगा इसलिए बीजेपी यूपी में अभी से पूरी ताकत झोंक रही है। चंद्रशेखर की रिहाई को भी राजनीतिक तौर पर बीजेपी सरकार का बड़ा दांव माना जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल ये कि क्या ये रिहाई दलितों को बीजेपी के पक्ष में फिर से मजबूती के साथ खड़ा करेगी?

चंद्रशेखर से क्यों खतरा?

चंद्रशेखर से क्यों खतरा?

चंद्रशेखर उर्फ रावण दलितों की ऐसी आवाज़ बनकर उभरे हैं जो अत्याचार करने वालों से न सिर्फ आंख में आंख डालकर मुकाबला करने को तैयार है बल्कि राजनीतिक तौर पर भी दलितों की चेतना को प्रभावित करने का माद्दा रखते हैं। यही कारण है की विपक्षी दलों और सरकार के खिलाफ खड़े संगठनों ने चंद्रशेखर की रिहाई का स्वागत किया है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में अनुसूचित जाति 16.63 फीसदी और अनुसूचित जनजाति 8.6 फीसदी है। इन दोनों को मिला दें तो आंकड़ा 25 फीसदी से ऊपर हो जाता है। लोकसभा की कुल 543 में से करीब 28 प्रतिशत यानी 150 से ज्यादा सीटें एससी-एसटी बहुल मानी जाती हैं। यही वो वोट बैंक है जिसे ना केवल बीजेपी बल्कि दूसरे राजनीतिक दल भी साधना चाहते हैं। गुजरात में दलित नेता जिग्नेश मेवाणी का उभरना और उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर का प्रभाव और इस पर देशभर में दलितों के खिलाफ हुईं हिंसा की घटनाएं बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। बीजेपी इसे समझ रही है और इसलिए वो ऐसे कदम उठा रही है ताकि वो खुद को दलितों का हितैशी बता सके। एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटना भी इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

भीम आर्मी का प्रभाव

भीम आर्मी का प्रभाव

गुजरात में दलित नेता जिग्नेश मेवाणी, महाराष्ट्र में प्रकाश अंबेडकर, यूपी में चंद्रशेखर और देश के कई और राज्यों में इसी तरह के संगठन अगर एक जुट होते हैं तो बीजेपी का 2019 का पूरा चुनावी समिकरण बिगड़ सकता है। खुद में भीम आर्मी की ही बात करें तो ये एक बड़ा संगठन बन गया है। कहा जा रहा है कि भीम आर्मी 24 राज्यों में सक्रिय है और दलित युवा और मातृशक्ति इसकी बड़ी ताकत हैं। भीम आर्मी का गठन करीब तीन साल पहले किया गया था और इसने काफी आक्रमक रूप से पिछड़ी जातियों से जुड़े युवा और अन्य लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया। यही वजह है कि आज भीम आर्मी के 300 के करीब स्कूल चल रहे हैं।

यूपी के क्या हैं समीकरण ?

यूपी के क्या हैं समीकरण ?

उत्तर प्रदेश में करीब 21 फीसदी आबादी दलितों की है और विधानसभा की 403 सीटों में से 85 सीटें आरक्षित हैं जबकि कुल प्रभाव वाली सीटों की संख्या 120 के करीब हैं। प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटों में अनुसूचित जाति के लिए 17 सीटें आरक्षित हैं। कैराना और नूरपुर के उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार के पीछे भी दलित वोट बैंक के खिसकने को एक बडा़ कारण माना जा रहा है। सहारनुपर हिंसा के बाद वेस्ट यूपी में भीम आर्मी मजबूत संगठन बनकर उभरी है और वो सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ जैसे जिलों में राजनीतिक समीकरण बदलने की स्थिति में हैं। इसके अलावा अगर दलितों के साथ प्रदेश की करीब 19 फीसदी मुस्लिम आबादी एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ खड़ी हो गई तो बीजेपी के लिए ना सिर्फ उत्तर प्रदेश मे राजनीतिक समीकरण बिगड़ेंगे बल्कि उसकी दिल्ली की राह भी खासी मुश्किल हो जाएगी। ऐसे में चंद्रशेखर की रिहाई का ये दांव बीजेपी के लिए उल्टा भी पड़ सकता है।


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