कौन हैं वी के पांडे? मैगी वाली नेस्ले कंपनी को धूल में मिलाया
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) नेस्ले जैसी नामवर मल्टीनेशनल कंपनी को धो-धोकर मारा है पांडे जी ने। पांडे जी यानी वी के पांडे ने। कौन है वी के पांडे? दरअसल वे उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए काम कर रही सरकारी लैब से जुड़े हैं। वहां पर रहते हुए उन्होंने सबसे पहले नेस्ले की मैगी पर एक्शन लिया था।
आइये जाने उनके बारे में कुछ खास बातें।
अगर मैगी हुई बंद तो इन 10 लोगों का क्या होगा?
- वी.के. पांडे बाराबंकी की सरकारी खाद्य गुणवत्ता प्रयोगशाला से जुड़े हैं।
- वे जिला फूड आफिसर हैं।
- उन्होंने करीब डेढ़ साल पहले नेस्ले की मैगी की गुणवत्ता की जांच की। तब उन्होंने पाया कि ये खाने लायक नहीं है।
- पांडे जी की पहल के बाद ही मैगी के बुरे के बुरे दिन आए। हालांकि वे कहते हैं कि उन्हें किसी कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है।
- वी.के. पांडे अब बाराबंकी तो छोडिए सारे देश के हीरो बन गए हैं। पर वे सुबह दफ्तर आते है और शाम को निकल जाते हां। पांडे जी अब नेस्ले को कोर्ट में खींच कर ले गए हैं।
- पांडे जी ने 10 मार्च, 2014 को बाराबंकी की एक दूकान से मैगी खरीदी। उसके बाद उसकी जांच की। उसके बाद सारा बवाल शुरू होने लगा।
- पांडे जी ने उसके बाद मैगी के सैंपल कोलकाता की सेंट्रल फूड लेब में भेजे पुष्टि के लिए।
- वी.के. पांडे बहुत धार्मिक प्रवृति के इंसान हैं।
- वे दफ्तर के अलावा सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ना पसंद करते हैं।













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