कौन हैं IMF के नए एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर उर्जित पटेल, पूर्व RBI गवर्नर का नोटबंदी से क्या है कनेक्शन?
Urjit Patel: भारतीय अर्थव्यवस्था और मौद्रिक नीतियों(Monetary Policy) के गहरे जानकार उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व RBI गवर्नर पटेल को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। तीन साल के इस कार्यकाल में वे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और वैश्विक आर्थिक नीतियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।
पूर्व RBI गवर्नर को केंद्र सरकार ने शुक्रवार, 29 अगस्त 2025 IMF में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त करने की जानकारी दी है। उन्हें तीन साल के कार्यकाल के लिए यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी ने 28 अगस्त को जारी आदेश में पटेल की नियुक्ति को मंजूरी दी। आदेश के मुताबिक, पटेल अगले तीन वर्षों तक IMF में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

कौन हैं उर्जित पटेल? (Who is Urjit Patel?)
उर्जित पटेल जाने-माने अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और येल यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की है। अर्थशास्त्र और नीतियों की गहरी समझ के कारण उन्हें देश-विदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम करने का मौका मिला। उनकी पहचान एक ऐसे विशेषज्ञ के रूप में है, जिन्होंने भारतीय बैंकिंग सेक्टर और मोनेटरी पॉलिसी में कई अहम बदलावों में योगदान दिया है।
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सितंबर 2016 में संभाला था RBI में गवर्नर का पद
उर्जित पटेल ने सितंबर 2016 में रघुराम राजन के बाद RBI गवर्नर का पद संभाला था। हालांकि, दिसंबर 2018 में उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा उस समय काफी चर्चा में रहा क्योंकि यह पहली बार था जब 1990 के बाद किसी RBI गवर्नर ने कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा था।
गवर्नर रहते लागू हुई नोटबंदी
उर्जित पटेल सितंबर 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर बने थे, और उनके कार्यकाल के सिर्फ दो महीने बाद 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने का ऐलान किया। इस ऐतिहासिक फैसले को लागू कराने में RBI की बड़ी भूमिका थी, और गवर्नर के तौर पर पटेल उस टीम का नेतृत्व कर रहे थे, जो नोटबंदी की पूरी प्रक्रिया संभाल रही थी।
निर्णय की तैयारी में भी अहम भूमिका
नोटबंदी का फैसला सरकार का था, लेकिन इस प्रक्रिया में तकनीकी और नीतिगत सुझाव देने में RBI की अहम भागीदारी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उर्जित पटेल ने नोटबंदी की तैयारियों और लागू करने की रणनीति में सरकार के साथ अहम भूमिका निभाई थी।
नोटबंदी के बाद की चुनौतियां
नोटबंदी के बाद नकदी की भारी किल्लत, ATM में पैसे की कमी और आर्थिक गतिविधियों पर पड़े असर जैसी चुनौतियों से निपटना भी उर्जित पटेल के लिए बड़ी परीक्षा थी। उस समय उन्हें विपक्ष और आम जनता दोनों की आलोचना का सामना करना पड़ा।
IMF और वित्त मंत्रालय से पुराना रिश्ता
उर्जित पटेल का IMF से पुराना नाता रहा है। 1996-1997 के दौरान वह IMF से डिप्युटेशन पर RBI में कार्यरत थे और उस दौरान उन्होंने कर्ज बाजार के विकास, बैंकिंग सुधार, पेंशन फंड सुधार और विदेशी मुद्रा बाजार को मजबूत बनाने में अहम सलाह दी थी। 1998 से 2001 के बीच उन्होंने वित्त मंत्रालय में कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। इसके अलावा, वह कई अन्य सार्वजनिक और निजी संस्थानों में भी अहम पदों पर रह चुके हैं।
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