क्या दिल्ली में हुआ 650 करोड़ का 'महाघोटाला'? AAP के गंभीर आरोपों पर BJP का पलटवार, जानिए पूरा मामला
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर 650 करोड़ रुपये के कथित स्वास्थ्य घोटाले का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष बिना सबूत के भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में बड़ा खरीद घोटाला है या फिर जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।

AAP ने किन बातों पर सवाल उठाए?
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि अस्पतालों की खरीद व्यवस्था में पहले नियम बदले गए और फिर खरीदारी की ताकत अस्पतालों से लेकर सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) को दे दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नियमों को दरकिनार कर डॉ. वत्सला को डीजीएचएस के पद पर नियुक्त किया गया, ताकि पूरी खरीद प्रक्रिया को नियंत्रित किया जा सके।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि जरूरत से कई गुना ज्यादा सामान खरीदा गया और उसकी कीमत भी बाजार से काफी अधिक चुकाई गई। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ₹150 की चादर ₹450 में खरीदी गई और 200 बेड वाले अस्पताल को करीब 20 हजार चादरें भेज दी गईं। उनके मुताबिक यह पिछले 16 महीनों में भाजपा सरकार का सबसे बड़ा कथित घोटाला है।
इसी मुद्दे पर आप सांसद संजय सिंह ने भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस मामले पर मीडिया की भूमिका सवालों के घेरे में है और बड़े राजनीतिक मामलों की तरह इस मुद्दे पर बहस नहीं हो रही।
भाजपा ने क्या जवाब दिया?
भाजपा की ओर से मुख्य जवाब मुख्य सचेतक और विधायक अभय वर्मा ने दिया। उन्होंने कहा कि 650 करोड़ रुपये के घोटाले का आंकड़ा पूरी तरह मनगढ़ंत है और आम आदमी पार्टी को बताना चाहिए कि यह रकम किस आधार पर बताई जा रही है।
अभय वर्मा का कहना है कि जैसे ही खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं की जानकारी मिली, रेखा गुप्ता सरकार ने किसी शिकायत का इंतजार नहीं किया बल्कि खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने तुरंत विजिलेंस जांच के आदेश दिए, करीब 40 अधिकारियों का तबादला किया गया और कुछ अधिकारियों को निलंबित करने के साथ गिरफ्तार भी किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
अभय वर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। उनके मुताबिक दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ जीएसटी विभाग में भी 100 से ज्यादा अधिकारियों के तबादले किए गए हैं और नई पोस्टिंग पारदर्शी लॉटरी सिस्टम के जरिए की जा रही है।
अब नजर किस पर है?
फिलहाल इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा विजिलेंस जांच है। एक तरफ आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को बड़ा वित्तीय घोटाला बता रही है, जबकि भाजपा इसे निराधार आरोप कह रही है। अभी तक जांच की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
ऐसे में यह तय होना बाकी है कि खरीद प्रक्रिया में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई या नहीं। फिलहाल दोनों दल अपने-अपने दावों पर कायम हैं और अब अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।














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