RSS On Muslim: 'मुसलमान हिंदू की तरह करें पूजा', कौन हैं संघ नेता दत्तात्रेय होसबले? जिनके बयान पर मचा बवाल
RSS Dattatreya Hosabale On Muslim: ''हिंदू धर्म सर्वोच्च है और अगर भारत में रहने वाले मुसलमान सूर्य नमस्कार करें, नदियों की पूजा करें, तो इससे उनका कुछ भी नहीं बिगड़ने वाला नहीं है। मुसलमानों को भी हिंदुओं की तरह पूजा करनी चाहिए'' ये बयान RSS के वरिष्ठ नेता-महासचिव दत्तात्रेय होसबले नेउत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में दिया है। जिसपर चौतरफा विवाद हो रहा है।
दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि सूर्य नमस्कार एक वैज्ञानिक और स्वास्थ्य से जुड़ा अभ्यास है। इसमें कोई धार्मिक बाध्यता नहीं है। उनके मुताबिक, अगर मुसलमान भी सूर्य नमस्कार या प्राणायाम करते हैं तो इससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें मस्जिद जाने या नमाज छोड़ने से रोका जाएगा। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म सबके लिए बोलता है और प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति अहिंसा की शिक्षा देता है। ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं दत्तात्रेय होसबले?

▶️ who is Dattatreya Hosabale: कौन हैं दत्तात्रेय होसबले?
- दत्तात्रेय होसबले RSS के मौजूदा सरकार्यवाह यानी महासचिव हैं। उनका जन्म 1 दिसंबर 1954 को कर्नाटक के शिमोगा में हुआ। उनका परिवार शुरू से RSS से जुड़ा रहा है।
- उन्होंने 1968 में RSS जॉइन किया और 1972 में ABVP से जुड़े। आपातकाल के दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी सरकार का विरोध किया, जिसके चलते उन्हें एक साल से ज्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा।
- शिक्षा की बात करें तो उन्होंने बेंगलुरु के नेशनल कॉलेज से ग्रेजुएशन और मैसूर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
- 1992 में होसबले ABVP के संगठन मंत्री बने। 2009 में उन्हें RSS का सह-सरकार्यवाह बनाया गया।
- 20 मार्च 2021 को वे RSS के सरकार्यवाह बने। 2024 में वे इस पद पर दोबारा चुने गए।
- माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनके करीबी संबंध भी उनकी भूमिका को मजबूत बनाते हैं।

▶️ 'हिंदू धर्म सर्वोच्च है' वाली लाइन पर आपत्ति (Dattatreya Hosabale Controversy)
दत्तात्रेय होसबले के बयान का सबसे विवादित हिस्सा रहा "हिंदू धर्म सर्वोच्च है"। कई लोगों ने इसे एक धर्म को दूसरे से ऊपर बताने की कोशिश माना। वहीं, "मस्जिद जाने से नहीं रोका जाएगा" जैसी टिप्पणी को भी आलोचकों ने 'समावेशन के नाम पर आत्मसात करने' का संकेत बताया।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान धर्म को संस्कृति, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जोड़कर सामान्य सार्वजनिक व्यवहार के रूप में पेश करते हैं, जिससे अल्पसंख्यकों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनता है।
इस कार्यक्रम में होसबले ने 'मानव धर्म' को सबसे ऊपर रखने की बात कही। साथ ही देश के विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में हिंदुओं के साथ क्या हुआ, यह सभी जानते हैं। इस टिप्पणी ने भी सियासी माहौल को और गरमा दिया।
▶️ संविधान पर पुराने बयान भी चर्चा में
यह पहली बार नहीं है जब दत्तात्रेय होसबले विवादों में आए हों। जून महीने में उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में शामिल 'सेक्युलर' और 'सोशलिस्ट' शब्दों पर बहस की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि ये शब्द आपातकाल के दौरान जोड़े गए थे और मूल प्रस्तावना का हिस्सा नहीं थे। इस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे संविधान और बराबरी के मूल्यों पर हमला बताया था।
▶️ दत्तात्रेय होसबले के बयान पर क्यों हो रहा है विवाद?
दत्तात्रेय होसबले का बयान ऐसे वक्त में आया है, जब देश में धर्म, संस्कृति और संविधान को लेकर बहस पहले से ही तेज है। उनके शब्दों को कोई पर्यावरण और स्वास्थ्य से जोड़कर देख रहा है, तो कोई इसे धार्मिक वर्चस्व की सोच बता रहा है। यही वजह है कि 'सूर्य नमस्कार' वाली बात सिर्फ योग तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर बड़ी बहस का कारण बन गई है।












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