दिल्ली ब्लास्ट पर 'मुस्लिमों का बचाव' करने वाले राशिद अल्वी कौन हैं? परिवार से राजनीतिक सफर तक की पूरी कहानी
Rashid alvi: दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम धमाके के बाद जांच की रफ्तार तेज हो गई है और कुछ डॉक्टरों के नाम सामने आने से मामला और पेचीदा हो गया है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने उन डॉक्टरों का बचाव करते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कड़े सवाल पूछे हैं। राशिद अल्वी ने कहा, ''एक पढ़ा लिखा नौजवान जिसने एमबीबीएस और एमडी किया है, वह आतंक के रास्ते क्यों जा रहा है? वह कोठी में आराम से रह सकता है, परिवार के साथ जिंदगी गुजार सकता है। फिर ऐसे हालात क्यों बने कि उसे बमों से खेलने तक की नौबत आ गई? इस सवाल का जवाब प्रधानमंत्री मोदी को देना चाहिए और सरकार को सोचना चाहिए कि युवाओं को आखिर कौन सी परिस्थितियां इस दिशा में धकेल रही हैं?''
राशिद अल्वी का यह बयान राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बड़ी बहस का कारण बना हुआ है। उनके बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर राशिद अल्वी कौन हैं, उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है और उनका निजी जीवन कैसा है। आइए विस्तार से समझते हैं।

🟡 कौन हैं राशिद अल्वी? (Who is Rashid alvi)
🔹 राशिद अल्वी भारतीय राजनीति का एक जाना माना चेहरा हैं। वे वकील भी हैं और कई दशकों से सक्रिय राजनीति का हिस्सा बने हुए हैं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल माने जाते हैं। उनकी सबसे खास पहचान यह है कि वे भारतीय संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में सांसद रह चुके हैं।
🔹 1956 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में उनका जन्म हुआ। उनके पिता मलिक इरफान अहमद अल्वी स्वतंत्रता सेनानी थे और मां इस्लामा खातून एक गृहिणी थीं। राजनीतिक माहौल बचपन से ही घर में रहा और यही माहौल आगे चलकर उनके राजनीतिक करियर की नींव बना।
🔹 राजनीति में लंबा समय बिताने वाले अल्वी की सबसे बड़ी पहचान उनका भाषण कौशल है। वे किसी भी मुद्दे पर मजबूती से बात रखने के लिए जाने जाते हैं। एक वकील होने के नाते उन्हें संविधान और कानूनों की गहरी समझ है और यही बात उन्हें संसद में और टीवी डिबेट्स में अलग बनाती है।
🟡 राशिद अल्वी का पारिवारिक जीवन (Rashid alvi Family)
राशिद अल्वी का परिवार बेहद सादगी पसंद माना जाता है। 11 नवंबर 1995 को उन्होंने नैयर अल्वी से शादी की। दंपत्ति के दो बेटे हैं और परिवार में बहू भी शामिल हैं। राजनीतिक व्यस्तताओं के बावजूद अल्वी अक्सर अपने परिवार के साथ समय बिताने की बात कहते हैं।

🟡 राजनीतिक करियर की शुरुआत (Rashid alvi Political Career)
🔹 राशिद अल्वी की राजनीतिक शुरुआत जनता दल से हुई जहां वे ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी बनाए गए। 1996 में उन्होंने पहला लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन सफलता नहीं मिली।
🔹 हालांकि 1999 के चुनाव में उन्होंने बड़ा उलटफेर किया और उत्तर प्रदेश की अमरोहा सीट से बीजेपी उम्मीदवार और पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान को 90 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर लोकसभा पहुंचे।
🔹 लोकसभा में उनकी पहचान एक तेज तर्रार नेता की बनी। बहुजन समाज पार्टी ने उन्हें 1999 से 2004 तक संसदीय दल का नेता बनाया।
🔹 हालांकि 2004 में वे विवादों में घिरे जब उन्होंने मायावती पर बीजेपी के दबाव में काम करने और टिकट बेचने के आरोप लगाए। इसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
🟡 कांग्रेस में शामिल होने के बाद मिला बड़ा मौका
बीएसपी से निकाले जाने के बाद राशिद अल्वी कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने उन्हें न सिर्फ अपनी ओर से राज्यसभा भेजा बल्कि पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता भी बनाया। 2004 से 2012 तक वे राज्यसभा सांसद रहे।
प्रवक्ता के तौर पर वे टीवी डिबेट्स में कांग्रेस का पक्ष मजबूती से रखते थे। उनकी भाषा शैली और स्पष्टवादिता उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती थी। 2013 में उन्हें दोबारा राज्यसभा टिकट नहीं मिला और प्रवक्ता पद से भी हटाया गया, लेकिन इसके बाद भी वे कांग्रेस के सक्रिय चेहरे बने रहे।
🟡 कई बार विवादों में भी घिरे (Rashid alvi controversy)
2009 में राशिद अल्वी ने एक बयान दिया कि कारगिल जीत को मनाने जैसी कोई बात नहीं क्योंकि युद्ध भारतीय सीमा के अंदर लड़ा गया था और हमें पता ही नहीं चला कि दुश्मन सेना कितनी अंदर आ गई। इस बयान पर बीजेपी और कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ा विरोध किया। बाद में भी वे कई घटनाओं पर अपने तीखे टिप्पणियों की वजह से सुर्खियों में रहे।
🟡 आज भी सक्रिय हैं और राजनीतिक विश्लेषण करते हैं
हाल के वर्षों में भले ही वे किसी बड़े पद पर न हों लेकिन वे कांग्रेस के विचारों और रणनीतियों पर खुलकर बोलते रहते हैं। मीडिया में उनकी मौजूदगी लगातार बनी रहती है और वे राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय बेबाकी से रखते हैं। दिल्ली ब्लास्ट पर राशिद अल्वी के हालिया बयान के बाद जो बहस छिड़ी है, उससे साफ है कि वे आज भी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं जिनकी बातों को गंभीरता से सुना जाता है।
🟡 दिल्ली ब्लास्ट पर राशिद अल्वी का पूरा बयान?
राशिद अल्वी ने कहा, ''जो लोग देश में "हिंदू-मुस्लिम" कर रहे हैं, उनसे बड़ा देशद्रोही कोई नहीं हो सकता। भारत में 14% से अधिक मुस्लिम समुदाय (लगभग 22-23 करोड़) रहता है, और ऐसे लोग केवल सत्ता में आने के लिए देश में सिविल वॉर (गृह युद्ध) चाहते हैं। इस सरकार का मकसद लोकतांत्रिक नहीं है, बल्कि ये लोग एक डिक्टेटर (तानाशाह) की तरह काम करना चाहते हैं। सरकार ने कई कानून संबंधित समुदायों की मर्जी के बिना बनाए हैं, जैसे, किसानों की मर्जी के बिना कृषि कानून, मुसलमानों की मर्जी के बिना तीन तलाक कानून, अल्पसंख्यकों के धार्मिक नेताओं की मर्जी के बिना यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बनाने की कोशिश।''
उन्होंने आगे कहा, ''संविधान से अनुच्छेद 370 हटाने पर कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन इसे कश्मीर के लोगों की मर्जी के बिना हटाया गया। गवर्नर सतपाल मलिक ने इसको लेकर सच्चाई बताई थी। प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) जी को 370 हटाने का क्या फायदा हुआ? जबकि पहलगाम और पुलवामा सहित कश्मीर के अंदर अब भी आतंकी घटनाएं हो रही हैं।''
राशिद अल्वी ने प्रधानमंत्री मोदी से "सबका साथ, सबका विश्वास" का नारा याद दिलाते हुए अपील की कि उन्हें विचार करने की जरूरत है। उन्होंने सबसे बड़ा सवाल उठाया कि पढ़ा-लिखा नौजवान जिसने एमबीबीएस और एमडी किया है, जो आराम से अपने घर और परिवार के साथ पूरी जिंदगी गुजार सकता है, वह आतंक का रास्ता क्यों अपना रहा है?
उन्होंने कहा कि किन हालात ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वे जानते हैं कि इसका नतीजा मौत है, फिर भी वह बमों से खेलने लगे और मौत को गले लगा रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि अब यह मसला सिर्फ हिंदू-मुस्लिम नहीं रह गया है, क्योंकि कल की खबर है कि कश्मीर की एक डॉक्टर प्रियंका भी इसमें शामिल है। उन्होंने कहा कि जो लोग पूरी कम्युनिटी को "नमक हराम" बताते हैं या कहते हैं कि उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाए, उनकी जुबानें बंद करनी चाहिए
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