कौन हैं निवेदिता झा? जिनके इर्द-गिर्द घूमती है फिल्म भक्षक की कहानी, एक नजर में जानें
नेटफ्लिक्स के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पिछले 4 दिनों में कई वेब सीरीज और फिल्में रिलीज हुई हैं। जिनमें से एक है फिल्म 'भक्षक'। यह फिल्म एक भयानक सच्ची घटना पर आधारित है। इस फिल्म में लीड रोल निभाने वाली एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर का चरित्र निवेदता झा पर आधारित है।
यह फिल्म इस बात पर प्रकाश डालती है कि मानवता किस हद तक क्रूरता करने में सक्षम है। फिल्म की कहानी पूरी तरह से बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस के इर्द-गिर्द घूमती है। आइए जानते हैं कौन हैं निवेदिता झा?

कौन हैं निवेदिता झा?
मुजफ्फरपुर में 'सेवा संकल्प एवं विकास समिति' के प्रमुख ब्रजेश का असली चेहरा दुनिया के सामने नहीं लाया होता, अगर मीडिया ने दखअल न दिया होता है, तो इन मासूम लड़कियों के खिलाफ राक्षसी कृत्य जारी रहते। 'भक्षक' फिल्म में लीड रोल निभाने वाली एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर रील में वैशाली सिंह नाम से नजर आएंगी। इनका रोल वास्तविक जीवन में एक स्वतंत्र पत्रकार, कार्यकर्ता और कवि, निवेदिता झा से प्रेरित है। हालांकि, झा इस तथ्य से अनभिज्ञ हैं कि यह चरित्र उनके वास्तविक जीवन के संघर्षों पर आधारित है।
क्या है फिल्म की कहानी?
दरअसल, मुजफ्फरपुर में 'सेवा संकल्प एवं विकास समिति' नाम से एक राज्य-वित्त पोषित एनजीओ था। जहां एक आश्रय गृह या बालिका गृह के प्रमुख ब्रजेश ठाकुर ने आश्रम की कम उम्र की लड़कियों के साथ यौन उत्पीडन को अंजाम दिया था। एनजीओ की आड़ में वह कल्याण के नाम पर न केवल बिहार सरकार से भारी मात्रा में धन ले रहा था, बल्कि आश्रम में रहने वाली नाबालिग बालिकाओं का शोषण भी कर रहा था। साथी इन किशोर लड़कियों को रात में इलाके के शक्तिशाली लोगों के पास भेजते थे, जिससे उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेल दिया जाता था, यह शब्द इनमें से कई लड़कियों को ठीक से समझ में भी नहीं आता था।
निवेदिता झा अब कहां हैं?
वास्तविक जीवन की पत्रकार प्रतिष्ठित दक्षिण एशियाई महिला मीडिया (SAWM) संगठन की एक गौरवान्वित सदस्य हैं। उसी के बिहार विंग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करती हैं। निवेदिता ने विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और मीडिया आउटलेट्स के लिए स्वतंत्र रूप से लिखना शुरू कर दिया। हिंदी पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए उन्हें लाडली मीडिया अवार्ड भी मिला। अपने लेखन करियर में, निवेदिता ने बिहार और झारखंड में लड़कियों के खिलाफ सामाजिक भेदभाव पर एक मूल्यांकन और एक किताब लिखी है और दो राज्यों में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को उजागर करने वाली लघु कहानियों से संकलित एक पुस्तक के साथ तीन कविता पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं।












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