कौन हैं मेजर सीता शेल्के, जो वायनाड में 70 जवानों की टीम को कर रही हैं लीड, 16 घंटे में बनवाया बैली ब्रिज
Major Sita Shelke: वायनाड में आई भीषण आपदा के बाद बचाव अभियान अभी जारी है। सेना के जवान दिनों-रात बचाव कार्यों में लगे हुए हैं और सभी जगह उनके काम की वाहवाही हो रही है। राहत और बचाव कार्य के बीच एक भारतीय सेना की महिला अधिकारी का नाम सुर्खियों में आया है और वो नाम है मेजर सीता शेल्के का।
जी हां...मेजर सीता शेल्के के निस्वार्थ सेवा और समर्पण के लिए प्रशंस और सराहा की जा रही है। दरअसल, मेजर सीता शेल्के ने बेली ब्रिज के निर्माण कार्य की देखरेख की। उनकी प्रयासों से चूरलमामला में उफनती नदी पर 190 फीट लंबा बेली ब्रिज मात्र 16 घंटे में पूरा हो गया।

ऐसा बताया जा रहा है कि मेजर सीता शेल्के और उनकी टीम ने बेली ब्रिज को बनाने के लिए 16 घंटे बिना रुके काम किया। ताकि, बचाव टीम मुंडकाई गांव तक पहुंच सकें। आइए जानते है बिना रुके..बिना थके 16 घंटे में इस काम को अंजाम देने वाली मेजर सीता शेल्के के बारे में...
कौन हैं मेजर सीता शेल्के?
सीता शेल्के साल 2012 में भारतीय सेना में शामिल हुईं और इस वक्त वो बेंगलुरु स्थित भारतीय सेना के मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप मेजर के पद पर तैनात है। मेजर सीता शेल्के महाराष्ट्र के अहमद नगर की रहने वाली हैं और उन्होंने चेन्नई ओटीए से अपनी ट्रेनिंग पूरी की। मेजर सीता शेल्के भारतीय सेना के मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप (एमईजी) की 70 सदस्यीय टीम में एकमात्र महिला अधिकारी हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी तस्वीर
पुल के ऊपर खड़े मेजर सीता शेल्के की तस्वीरें शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं थी। उनकी तस्वीर शेयर करते हुए एक यूजर ने लिखा, 'मेजर सीता शेल्के और इंजीनियर रेजिमेंट आप पर गर्व है। वायनाड में बेली ब्रिज का 16 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक निर्माण करना अविश्वसनीय है!' वहीं, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में इस बचाव अभियान को गति देने के लिए उनकी सराहना की गई।
जानें क्या काम करती है एमईजी यूनिट?
भारतीय सेना के मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप (एमईजी) 'मद्रास सैपर्स' के नाम से मशहूर है। यह इंजीनियरिंग यूनिट को सेना के लिए रास्ता साफ करने, पुल बनाने और युद्ध के दौरान बारूदी सुरंगों को खोजने और उन्हें निष्क्रिय करने का काम सौंपा गया है। इतना ही नहीं, यह टीम प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव कार्यों में भी सहायता करती है और 2018 की बाढ़ के दौरान केरल में विशेष रूप से सक्रिय रही थी।
कब शुरू हुआ था पुल का निर्माण
बेली पुल का निर्माण 31 जुलाई को रात 9:30 बजे शुरू हुआ और 1 अगस्त को शाम 5:30 बजे तक पूरा हो गया। पुल की मजबूती का परीक्षण करने के लिए सेना पहले अपने वाहनों को नदी के दूसरी ओर ले गई थी। ये बेली ब्रिज वायनाड जिले के मुंडक्कई और चूरलमाला के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों को जोड़ने में मदद करेगा। ये 24 बेली ब्रिज इरुवाझिंजिपुझा नदी पर बनाई गई है।
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