कौन है जस्टिस एम. सुंदर? जो बने मणिपुर हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश, पढ़ें पूरी प्रोफाइल
Justice M Sundar: केंद्र सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस एम. सुंदर को मणिपुर हाई कोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केम्पैया सोमा शेखर की सेवानिवृत्ति के बाद प्रभावी होगी। रविवार को केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा की।
11 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन न्यायाधीशों के नाम मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति के लिए सुझाए थे। इनमें मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस एम. सुंदर का नाम मणिपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए शामिल था।

कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करते हुए उनकी नियुक्ति की पुष्टि की। कॉलेजियम ने इसके साथ ही कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस पवनकुमार बी. बाजंथरी को पटना हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश और कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौमेन सेन को मेघालय हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी।
कानून मंत्री ने दी जानकारी
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एम. सुंदर को मणिपुर हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उस दिन से प्रभावी होगी, जब वे पदभार ग्रहण करेंगे।"
बता दें कि मणिपुर हाई कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केम्पैया सोमा शेखर 14 सितंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो गए। भारत के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष तय है।
who is Justice M Sundar: जस्टिस एम. सुंदर कौन हैं?
जस्टिस सुंदर का जन्म 19 जुलाई, 1966 को चेन्नई में हुआ था। उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की। वे पांच वर्षीय एकीकृत लॉ कोर्स की पहली बैच के छात्र रहे। वर्ष 1989 में उन्होंने वकालत की शुरुआत की और मद्रास हाई कोर्ट में एडवोकेट के रूप में पंजीकृत हुए।
कानूनी करियर और महत्वपूर्ण भूमिकाएँ
जस्टिस सुंदर ने बतौर वकील मद्रास हाई कोर्ट में लंबे समय तक काम किया। उनका मुख्य फोकस सिविल मामलों पर रहा। 2003 से 2006 तक वे तमिलनाडु वॉटर सप्लाई एंड ड्रेनेज (TWAD) बोर्ड के स्टैंडिंग काउंसल भी रहे। 5 अक्टूबर, 2016 को उन्हें मद्रास हाई कोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। जस्टिस एम. सुंदर का नाम दक्षिण भारत की न्यायपालिका के जाने-माने और अनुभवी न्यायाधीशों में शुमार होता है। वे लंबे समय तक मद्रास हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे।
अपने करियर में उन्होंने संविधान, सिविल, टैक्सेशन, कंपनी लॉ और आपराधिक मामलों पर कई अहम फैसले दिए हैं। जस्टिस सुंदर को उनके कानूनी तर्कों की गहराई, संतुलित दृष्टिकोण और निष्पक्षता के लिए जाना जाता है। मद्रास हाई कोर्ट में रहते हुए वे कई महत्वपूर्ण बेंचों का हिस्सा रहे और जटिल संवैधानिक मुद्दों पर उन्होंने विस्तृत व स्पष्ट व्याख्या दी। उनकी छवि एक सख्त लेकिन न्यायप्रिय जज के रूप में देखी जाती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
मणिपुर पिछले कुछ समय से कानून-व्यवस्था और सामाजिक तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में जस्टिस सुंदर जैसे अनुभवी न्यायाधीश की नियुक्ति को न सिर्फ मणिपुर हाई कोर्ट बल्कि पूरे राज्य की न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में मणिपुर हाई कोर्ट में न्यायिक कार्य और अधिक तेज़ और पारदर्शी होगा।












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