कौन है ISI का 'स्लीपर जोकर' Ansarul Mian? जो पाकिस्तान भागते वक्त दिल्ली में गिरफ्तार, पढ़ें क्राइम कुंडली
Who is ISI Sleeper Cell Ansarul Mian Ansari: भारत-पाकिस्तान के बीच भले ही सीजफायर चल रहा हो, लेकिन दुश्मन देश पाक के जासूसों की धरपकड़ भारत में तेजी से जारी है। अब तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और ISI से संपर्क के मामले में 14 से ज्यादा संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसी कड़ी में, दिल्ली पुलिस ने इस्लामिक स्टेट के दो एजेंटों की गिरफ्तारी के बाद एक गुप्त अभियान में आईएसआई स्लीपर सेल के एक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
अधिकारियों के मुताबिक, जनवरी से मार्च 2025 तक चला एक गुप्त अभियान, और मई में उसका सबसे बड़ा चेहरा सामने आया - अंसारुल मियां अंसारी, एक नेपाली मूल का शख्स जो अब आईएसआई का स्लीपर एजेंट बन चुका था। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की विशेष सेल ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर एक बड़े ऑपरेशन में अंसारुल समेत दो एजेंटों को दबोच लिया। आइए जानते हैं कौन है अंसारुल मियां? कैसे पहुंचा भारत? सभी सवालों के जवाब...

कैब ड्राइवर से कट्टर जासूस तक का सफर
अंसारुल मियां, पहले कतर में एक कैब ड्राइवर था। वहीं, उसकी मुलाकात ISI के एक हैंडलर से हुई। एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि एक बार संपर्क बना, तो उसे पाकिस्तान बुलाया गया-जहां टॉप ISI अधिकारियों ने उसे कई हफ्तों की ट्रेनिंग दी। ट्रेनिंग पूरी होते ही उसे नेपाल के रास्ते भारत भेजा गया, जहां उसका काम था-भारतीय सैन्य ठिकानों, दस्तावेजों और रणनीतियों की जासूसी करना और गोपनीय सीडी बनाकर पाकिस्तान भेजना।
गिरफ्तारी के वक्त अंसारुल के पास क्या मिला?
- सेना से जुड़े गोपनीय दस्तावेज
- हाई-सिक्योरिटी बेस के नक्शे
- एक USB ड्राइव जिसमें कई एन्क्रिप्टेड फोल्डर्स
- फर्जी पासपोर्ट और नेपाल का नागरिकता पत्र
अंसारुल को दिल्ली के एक होटल से तब पकड़ा गया, जब वह कथित तौर पर पाकिस्तान भागने की तैयारी कर रहा था।
रांची से भी जुड़ा तार, दूसरा एजेंट भी धराया
अंसारुल से पूछताछ के बाद झारखंड के रांची से एक और एजेंट को गिरफ्तार किया गया। दोनों फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं, और मई में दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र में स्लीपर सेल की विस्तार योजना का खुलासा किया गया है।
ISI से IS तक: भारत में सक्रिय दोहरी साजिश
दिल्ली में अंसारुल की गिरफ्तारी से ठीक पहले, NIA ने मुंबई एयरपोर्ट से दो भगोड़ों को गिरफ्तार किया-
- अब्दुल्ला फैयाज शेख उर्फ डायपरवाला
- तल्हा खान
दोनों आईएसआईएस के स्लीपर सेल नेटवर्क से जुड़े थे और 2023 के पुणे IED केस में वांछित थे। ये दो साल से जकार्ता में छिपे हुए थे और भारत में आतंक फैलाने की साजिश रच रहे थे। एनआईए ने इन पर ₹3 लाख का इनाम रखा था। अब ये दोनों न्यायिक हिरासत में हैं।
'ऑपरेशन सिंदूर': भारत ने कैसे ISI की कमर तोड़ी
ISI के इन एजेंटों की गिरफ्तारी उस समय हुई जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। 7 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में 9 आतंकवादी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी, जो 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का जवाब था।
What is Pahalgam Attack: क्या है पहलगाम हमला?
आपको बता दें कि 22 अप्रैल 2025, को पूरा देश गमगीन और गुस्से से भर गया, जब 4 आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में 26 से ज्यादा टूरिस्ट को गोली मार दी। गौर करने वाली बात यह है कि मरने वालों में सिर्फ पुरुष वो भी ज्यादातर हिंदू थे। घटना के चश्मदीदों ने बताया कि गोली मारने से पहले आतंकियों ने धर्म पूछा, कपड़े उतरवाए, कुरान पढ़ने को कहा। मरने वालों में सिर्फ एक ही मुस्लिम युवक था। इस घटना में कई घायल भी हुए। सुहागनियों का आतंकियों ने सिंदूर मिटा दिया और कहा कि जाओ मोदी (भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) से कहो।
हमले में इस्तेमाल हुए हथियार पाकिस्तान से आए थे
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने सीमा पार से ड्रोन, रॉकेट और UAVs भेजने की कोशिश की, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने हर प्रयास को नाकाम किया। 10 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ।
स्लीपर सेल: भारत में कितने और?
अंसारुल मियां की गिरफ्तारी एक बड़े सवाल को जन्म देती है- क्या भारत में अब भी ISI और ISIS के स्लीपर एजेंट सक्रिय हैं? अगर एक कैब ड्राइवर पाकिस्तान जाकर ट्रेनिंग पाकर भारत की राजधानी तक पहुंच सकता है, तो और कितने 'अंसारुल' देश के भीतर छिपे हो सकते हैं?
क्या अंसारुल अकेला नहीं था?
एक्सर्ट्स का मानना है कि अंसारुल मियां सिर्फ एक 'छोटा मोहरा' था। असली मास्टरमाइंड अब भी पर्दे के पीछे हो सकता है। सवाल है-क्या सुरक्षा एजेंसियां समय रहते उन तक पहुंच पाएंगी? ऐसा लगाता है कि स्लीपर सेल की कहानी खत्म नहीं हुई, ये तो बस शुरुआत है।












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