India Pakistan Ceasefire: कौन हैं DGMO ले. जनरल राजीव घई, जिनकी बातचीत से भारत-पाक के बीच थमी जंग
DGMO Rajiv Ghai: भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे सैन्य तनाव के बीच 10 मई 2025 को महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब दोनों देशों के डीजीएमओ (Director General of Military Operations) के बीच बातचीत हुई और युद्ध की संभावनाओं पर विराम लग गया।
डीजीएमओ बातचीत के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा पर दस मई 2025 को शाम पांच बजे सीजफायर लागू हो गया। इससे दोनों देशों जंग के जंग टल गई है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि डीजीएमओ कौन होते हैं और उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।

कौन होते हैं डीजीएमओ (DGMO)?
डीजीएमओ यानी महानिदेशक मिलिट्री ऑपरेशन, भारतीय सेना में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक पद होता है। वर्तमान में इस पद पर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई नियुक्त हैं। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने अक्टूबर 2024 को DGMO के पद पर ज्वाइन किया था। इस महत्वपूर्ण पदभार को संभालने से पहले, वह चिनार कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग GOC के पद पर कार्यरत थे।
डीजीएमओ का काम सेना के सभी सैन्य अभियानों की निगरानी और संचालन करना होता है। युद्ध हो, सीमा विवाद हो या आतंकवाद के खिलाफ कोई कार्रवाई, हर अभियान की योजना, दिशा और क्रियान्वयन का जिम्मा डीजीएमओ के पास होता है।
सैन्य अभियानों की कमान संभालने वाला अधिकारी
डीजीएमओ को युद्ध और शांति दोनों ही स्थितियों में सैन्य रणनीति बनानी होती है। आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन से लेकर सीमाओं की निगरानी तक, सभी अभियान उनकी देखरेख में चलते हैं। वे सेना की तीनों शाखाओं थल सेना, वायु सेना और नौसेना के साथ समन्वय बनाकर काम करते हैं और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के साथ भी सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
सीमा पर संघर्ष से लेकर शांति तक में डीजीएमओ की भूमिका
डीजीएमओ ही वह अधिकारी होते हैं जो सीमा से जुड़े किसी भी सैन्य तनाव, ऑपरेशन या वार्ता के लिए भारत की ओर से संवाद करते हैं। यही वजह है कि जब भी युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो सबसे पहले संपर्क भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच ही स्थापित किया जाता है। युद्ध की शुरुआत हो या संघर्षविराम की घोषणा हर निर्णायक कदम में डीजीएमओ की भूमिका केंद्रीय होती है।
भारत-पाक डीजीएमओ वार्ता: तनाव से समाधान तक
हाल ही में, भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद ही सीमा पर सीजफायर का फैसला लिया गया। यह दर्शाता है कि कैसे डीजीएमओ न सिर्फ सैन्य अभियानों के रणनीतिक योजनाकार होते हैं, बल्कि संकट प्रबंधन में भी इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
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