जानिए कौन हैं नरेन्द्र टंडन, जिन्हें हमेशा से रहा छपास रोग
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। नरेन्द्र टंडन के बारे में कहा जाता है कि उनका कद भले ही छोटा हो, पर वे भाषण देने में माहिर हैं। अपने भाषणों से अपने विरोधियों को घायल कर देते हैं। किरण बेदी के चुनाव प्रचार प्रमुख नरेंद्र टंडन ने आज पहले अपने पद से इस्तीफा दिया और बाद में वापस भी ले लिया। टंडन ने बेदी पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

खबरों में रहने के शौकीन
दिल्ली में लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे मीडियाकर्मियों को मालूम है कि टंडन को छपास रोग है। यानी उन्हें खबरों में बने का शौक है। वे एक दौर में अखबारों के दफ्तरों में शाम के वक्त खुद प्रेस विज्ञप्ति लेकर पहुंच जाते थे। उसके बाद आग्रह करते थे कि उसकी चंद लाइनें छाप दी जाएं।
छात्र नेता रहे
टंडन 1998 में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टुडेंट यूनियन (डुसू) के अध्यक्ष भी रहे। वे पीजीडीएवी कालेज में पढते थे। वे लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी से जुड़ा रहने के बाद कुछ सालों के लिए राजनीति की दुनिया से दूर चले गए थे।
पोस्टर छापने का कारोबार
वे अपना कारोबार करने लगे थे। वे चुनावों में सभी दलों के पोस्टर छापने का काम करने लगे थे। उन्हें कांग्रेस के भी पोस्टर छापने से परहेज नहीं था। कहते थे,राजनीति को बिजनेस से जोड़ना गलत है। उनकी करोल बाग इलाके में प्रिंटिग प्रेस थी। वे राजनीति में भाजपा नेता ओ.पी.कोहली के साथ रह-रहकर आगे बढ़े।
भाजपा के एक नेता ने कहा कि दिल्ली चुनावों के बाद नरेन्द्र टंडन को कसा जाएगा। इस बार तो भाजपा नेताओं ने उन्हें समझा-बुझाकर अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए मना लिया।












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