कौन हैं बाहुबली शाह? ईडी का शिकंजा कसते ही जिनके पक्ष में उतरा विपक्ष
Who is Bahubali Shah? 'गुजरात समाचार' के सह-संस्थापक बाहुबली शाह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिकंजे में आ गए हैं। 73 वर्षीय शाह और उनके अखबार से जुड़े कई ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की और शुक्रवार (16 मई) को सुबह उन्हें हिरासत में लिया गया था।
बाहुबली को ईडी द्वारा हिरासत में लिए जाते ही विपक्षी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी उनके पक्ष में उतर आए हैं और इस कार्यवाही को पूरे लोकतंत्र की आवाज को दबाने की साजिश करार दिया है। हालांकि हिरासत में लिए जाने के बाद बाहुबली शाह की तबीयत खराब हो गई, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। आइए जानते हैं कौन हैं गुजरात समाचार के सह-संस्थापक बाहुबली शाह?

ईडी ने किन आरोपों के तहत बाहुबली शाह को हिरासत में लिया था इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन एचटी की रिपोर्ट के अनुसार बाहुबली शाह के परिवार ने शुक्रवार को जानकारी स्वयं दी है। परिवार ने बताया प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुजरात समाचार से जुड़े परिसरों और उसके अखबार के मालिकों के घरों में छापेमारी की जिसके बाद बाहुलबली शाह को ईडी ने अपनी हिरासत में ले लिया है।
कौन हैं बाहुबली शाह?
73 वर्षीय बाहुबली शाह 15 से अधिक व्यावसायिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं और लोक प्रकाशन लिमिटेड के बोर्ड के निदेशकों में एक हैं। यह संस्था गुजरात समाचार अख़बार के प्रकाशन और जीएसटीवी चैनल के प्रसारण करती है। बाहुबली के भाई, 85 वर्षीय श्रेयांश शाह अख़बार के प्रबंध संपादक के तौर पर इसकी देखरेख करते हैं।
बाहुबली शाह की गिरफ़्तारी पर मचा हड़कंप
गुजरात के सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले क्षेत्रीय अख़बारों में से एक समाचार पत्र के सह-संथापक बाहुबली शाह को हिरासत में लिए जाने की खबर ने निश्चित रूप से मीडिया और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनका अख़बार, जो कई गुजराती और महाराष्ट्रीयन घरों में एक स्थायी जगह है, भारत में प्रेस की आज़ादी पर एक विवादास्पद बहस के केंद्र में है।
बाहुबली शाह के पक्ष में उतरे राहुल गांधी और केजरीवाल
मीडिया संस्थान के सह-संस्थापक की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक दल खुलकर विरोध करते हुए सामने आ चुके हैं। कांग्रेस और आप ने केंद्र सरकार के इस कदम की जमकर आलोचना की है और इसे मीडिया की आजादी को दबाने का प्रयास बताया है। कांग्रेस के राहुल गांधी और आप के अरविंद केजरीवाल ने इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक अखबार पर हमला नहीं है, बल्कि पूरे लोकतंत्र पर हमला है।
अखबार मालिकों को निशाना बनाए जाने की निंदा
गुजरात के विधायक और कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने भी गुजरात समाचार और उसके मालिकों को निशाना बनाए जाने की निंदा की। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले 25 साल से केंद्र सरकार की आलोचना करने वाले लेख प्रकाशित करने की अपनी परंपरा के कारण अखबार आलोचनाओं का शिकार हो रहा है। इस प्रकार, इस गिरफ्तारी ने प्रेस की स्वतंत्रता और मीडिया संचालन में सरकारी हस्तक्षेप की सीमा के बारे में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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