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कौन हैं एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्परा? जिन पर SC में जस्टिस यशवंत वर्मा केस की सुनवाई पर भड़के CJI गवई

Who is Advocate Mathews J. Nedumpara: हाईकोर्ट जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने संबंधी प्रस्‍ताव पर 145 सांसदों ने हस्‍ताक्षर कर लोकसभा स्‍पीकर ओम बिरला को सौंप दिया है। वहीं सोमवार को जस्टिस यशवंत से जुड़े मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) बी. आर. गवई ने की।

केस की सुनवाई के दौरान एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्परा, जस्टिस वर्मा के खिलाफ दलील रख रहे थे तभी उन्‍होंने जस्टिस यशवंत वर्मा को केवल 'वर्मा' कहकर संबोधित किया। जिस पर सीजेआई गवई भड़क गए और कोर्ट रूम में उनकी फटकार लगा दी।

Who is Advocate Mathews J Nedumpara

CJI ने पूछा- "क्या वे आपके दोस्‍त हैं?

एडवोकेट नेदुम्‍परा की भाषा पर आपत्ति जताते हुए CJI गवई ने पूछा, "क्या वे आपके दोस्‍त हैं? आप उन्हें कैसे संबोधित कर रहे हैं? थोड़ी शालीनता रखिए, वो अभी भी जस्टिस वर्मा ही हैं और उच्च न्यायालय के जज हैं।" CJI गवई ने कहा जस्टिस वर्मा अभी भी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, इसलिए उन्हें 'जस्टिस' कहकर संबोधित किया जाना चाहिए।

CJI की नाराजगी पर एडवोकेट ने दी ये प्रतिक्रिया

सीजेआई ने नाराजगी जताने पर नेदुम्परा ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह महानता उन पर लागू हो सकती है और इस मामले को सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस ने पलटवार करते हुए कहा कि वे कोर्ट को निर्देश न दें।

बता दें जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर नकदी मिलने के बाद उनके खिलाफ केस चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्परा ने सोमवार को जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली अपनी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध कराने का अनुरोध कर रहे थे। तभी उन्‍होंने जस्टिस यशवंत वर्मा को केवल 'वर्मा' कहकर संबोधित किया। ये पहला मामला नही है जब एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्परा सुर्खियों में हैं, इससे पहले एक बार तो पूर्व सीजीआई ने एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्परा के सुप्रीम कोर्ट से बाहर निकालने के लिए सिक्‍योरिटी बुला ली थी। आइए जानते हैं कौन हैं एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्परा?

एडवोकेट मैथ्यूज ने ही जस्टिस वर्मा के खिलाफ दर्ज की थी पहली‍ रिट याचिका

बता दें, एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्परा ने इस साल मार्च में जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पहली रिट याचिका दायर की थी, जिसे आंतरिक जांच की कार्यवाही चलने के कारण खारिज कर दिया गया था। तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को आंतरिक जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद उन्होंने एक और याचिका दायर की थी।

मई में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका का निपटारा कर दिया और नेदुम्परा को एफआईआर दर्ज कराने के लिए पहले केंद्र सरकार के अधिकारियों से संपर्क करने का निर्देश दिया था। वहीं अब नेदुम्परा ने जस्टिस वर्मा द्वारा आंतरिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका का हवाला देते हुए कहा कि इसे खारिज करना असंभव है और वर्मा के खिलाफ अब एफआईआर होनी चाहिए और जांच होनी चाहिए।

कौन हैं एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्परा?

मेक्‍यूज जे नेदुत्‍परा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्‍ठ वकील है। केरल के मूल निवासी नेदुत्‍परा 1984 में केरल बार काउसिंल में शामिल हुए। सिविल, आपराधिक , संवैधानिक और वित्‍तीय मामलों में इनकी गहरी पकड़ है। नेदुम्परा सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखने के लिए जाने जाते हैं, खासकर न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब नेदुम्परा को सीजेआई से इस तरह फटकार मिली है।

CJI ने सिक्योरिटी बुलाने की दी थी चेतावनी

जुलाई 2024 में नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET‑UG) पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान तम्‍कालीन चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के साथ पर उस समय नाराज हो गए जब उन्होंने हस्तक्षेप करने की कोशिश की। सीजेआई ने यहां तक चेतावनी दी थी कि सुरक्षाकर्मियों को बुलाकर उन्हें कोर्ट से बाहर निकाल दिया जाएगा

2019 की अवमानना याचिका

वर्ष 2010 में, मैथ्यूज नेदुम्परा ने न्यायिक पारदर्शिता और सुधार के लिए राष्ट्रीय वकीलों के अभियान की स्थापना की थी। उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी भी ठहराया जा चुका है। 2019 में, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अवमानना का दोषी पाया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने एक वरिष्ठ वकील का नाम लेकर यह आरोप लगाया था कि न्यायाधीशों के बेटों और बेटियों को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में प्राथमिकता दी जाती है। अभद्रता (contempt) का दोषी ठहराते हुए तीन महीने की सशर्त जेल तथा SC में वकालत पर एक वर्ष का प्रतिबंध लगाया था

CJI ने लगाई फटकार

वहीं 21 जुलाई को आज उन्होंने इलाहाबाद HC के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कराने की याचिका लगाते समय उन्हें केवल 'वर्मा' कहकर संबोधित किया, जिस पर चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने सख्त आपत्ति जताई और अधिकारियों को शालीनता बनाए रखने को कहा।

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