कौन हैं एक्ट्रेस त्रिवेणी राव, जो बनीं 54 साल के BJP नेता-EX CM बिप्लब देब की दूसरी पत्नी? क्यों हुआ था तलाक

Tripura Ex CM Biplab Deb Marriage (wife Triveni Rao): त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर सांसद बिप्लब कुमार देब एक बार फिर देश भर की सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनकी कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि उनकी पर्सनल लाइफ है। 54 साल के बिप्लब देब ने कन्नड़ फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री त्रिवेणी राव के साथ गुपचुप तरीके से सात फेरे ले लिए हैं। 19 जून को दिल्ली में सिंपल तरीके से यह शादी हुई। शुरुआत में इस विवाह को पूरी तरह सीक्रेट रखा गया था, लेकिन जैसे ही सोशल मीडिया पर इस बिप्लब देब और उनकी पत्नी त्रिवेणी राव की तस्वीरें सामने आईं, इंटरनेट पर इसकी चर्चा होने लगी।

इस हाई-प्रोफाइल शादी का खुलासा तब हुआ जब कपल दिल्ली से अगरतला पहुंचा। वहां परिवार की पूरी रजामंदी और मां के आशीर्वाद के बाद रिसेप्शन आयोजित किया गया। अगरतला के नामचीन फाइव स्टार होटल पोलो टॉवर्स में हुई इस ग्रैंड पार्टी के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर त्रिवेणी राव कौन हैं और पहली बीवी से बिप्लब कुमार देब का तलाक क्यों हुआ।

Biplab Kumar Deb And wife Triveni Rao

कौन हैं त्रिवेणी राव? (Who is Triveni Rao)

बिप्लब देब से शादी के बाद देश भर में छा जाने वाली त्रिवेणी राव कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी एक्ट्रेस हैं। त्रिवेणी को असली पहचान साल 2018 में आई कन्नड़ सिनेमा की ब्लॉकबस्टर एक्शन-ड्रामा फिल्म 'टगारू' से मिली थी।

इस फिल्म में उन्होंने सुपरस्टार शिवराजकुमार के साथ 'कांस्टेबल सरोजा' का यादगार किरदार निभाया था, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था। इसके बाद उन्होंने पावर स्टार पुनीत राजकुमार की सुपरहिट फिल्म 'युवारत्ना' और 'राजमार्तंड' जैसी बड़ी फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा।

बेंगलुरु में जन्मी त्रिवेणी राव ने अपने करियर की शुरुआत बतौर मॉडल की थी। अपनी बेहतरीन फिटनेस और बोल्ड लुक्स के लिए सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहने वाली त्रिवेणी ने अपने करियर के पीक पर आकर शादी का यह बड़ा फैसला लिया है। बिप्लब देब और उनके बीच उम्र का एक बड़ा फासला है।

Biplab Kumar Deb And wife

जहां बिप्लब देब की उम्र 54 साल है, वहीं त्रिवेणी की सही उम्र का खुलासा तो नहीं हुआ है, लेकिन उनके करियर ग्राफ को देखें तो वह अपने अर्ली 30s (30 से 35 साल के बीच) में हो सकती हैं। खबरों की मानें तो शादी के बाद त्रिवेणी फिलहाल फिल्मी दुनिया से दूरी बनाकर अपने नए परिवार को संभालने पर फोकस करेंगी।

Biplab Kumar Deb And wife Triveni Rao
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कौन थीं पहली पत्नी नीति देब और शादी के 25 साल बाद क्यों हुआ तलाक?

त्रिवेणी राव से शादी बिप्लब देब की दूसरी शादी है। इससे पहले उनकी शादी नीति देब से हुई थी। नीति और बिप्लब का साथ तब का था जब बिप्लब राजनीति में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे। साल 2001 में दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में दोनों का विवाह हुआ था। नीति देब जालंधर के एक पंजाबी ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखती हैं और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में एक अधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। इस शादी से दोनों का एक बेटा और एक बेटी भी हैं।

एक लंबे और खुशनुमा सफर के बाद धीरे-धीरे दोनों के रिश्तों में खटास आने लगी। करीब 24 साल तक एक साथ रहने के बाद इस कपल के बीच दूरियां इतनी बढ़ गईं कि सितंबर 2022 में दोनों ने कानूनी तौर पर अलग रहने का फैसला कर लिया। इसके बाद जनवरी 2025 में आपसी सहमति से दोनों का आधिकारिक तौर पर तलाक हो गया।

बताया जाता है कि बिप्लब देब ने करीब 1 करोड़ रुपये के फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के साथ अपनी पहली पत्नी से राहें अलग कर ली थीं। इसके बाद अकेले रह रहे बिप्लब देब को उनकी मां ने अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने की सलाह दी, जिसके बाद उनकी लाइफ में त्रिवेणी राव की एंट्री हुई।

Biplab Kumar Deb And wife Triveni Rao
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अब जानिए बिप्लब कुमार देब के बारे में?

25 नवंबर 1971 को त्रिपुरा के उदयपुर में जन्मे बिप्लब कुमार देब की लाइफ जर्नी किसी फिल्मी कहानी जैसी है। उनका परिवार 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के चांदपुर जिले से एक शरणार्थी के रूप में भारत आया था और त्रिपुरा में बस गया था। उनके पिता हीराधन देब जनसंघ और आरएसएस के बेहद समर्पित कार्यकर्ता थे, जिसके चलते राष्ट्रवाद की भावना बिप्लब को विरासत में मिली।

साल 1993 में त्रिपुरा से अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद बिप्लब देब बड़े सपने लेकर दिल्ली आ गए। दिल्ली में रहने और अपना खर्च चलाने के लिए उन्होंने एक प्रोफेशनल जिम ट्रेनर के तौर पर भी काम किया। इसी दौरान वे के.एन. गोविंदाचार्य जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बड़े नेताओं के संपर्क में आए और अगले 15 सालों तक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में देश सेवा की। इसके बाद उन्होंने बीजेपी के बड़े नेता आचार्य विष्णुकांत शास्त्री और केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम के पीए (Personal Assistant) के तौर पर काम किया, जिससे उन्हें संसदीय कामकाज और चुनावी कूटनीति को बेहद करीब से समझने का मौका मिला।

Biplab Kumar Deb

साल 2014 में जब केंद्र में मोदी सरकार बनी, तो बीजेपी ने पूर्वोत्तर भारत को वामपंथ के प्रभाव से मुक्त करने का एक बड़ा मिशन तैयार किया। त्रिपुरा में पिछले 25 सालों से माणिक सरकार के नेतृत्व में कम्युनिस्टों (लेफ्ट) का एक ऐसा मजबूत गढ़ था, जिसे हिला पाना असंभव माना जाता था। उस वक्त त्रिपुरा में बीजेपी का वोट शेयर महज 1% के आसपास था। साल 2015 में अमित शाह ने त्रिपुरा के ही मूल निवासी बिप्लब देब की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपने गृह राज्य जाकर संगठन खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी।

जनवरी 2016 में मात्र 44 साल की उम्र में बिप्लब देब को त्रिपुरा बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। राज्य में आते ही उन्होंने दिल्ली की सुख-सुविधाएं छोड़ दीं और सुदूर आदिवासी इलाकों का तूफानी दौरा शुरू किया। युवाओं के बीच बेरोजगारी के गुस्से को भांपते हुए उन्होंने 'चलो पलटाई' (आओ बदलें) का एक बेहद आक्रामक नारा दिया। नतीजा यह हुआ कि 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और लेफ्ट के 25 साल पुराने किले को ढहा दिया। इस शानदार जीत के इनाम के तौर पर पार्टी ने बिप्लब देब को त्रिपुरा का पहला बीजेपी मुख्यमंत्री बनाया।

बिप्लब कुमार देब का विवादित बयान और अचानक CM की कुर्सी गंवाने की इनसाइड स्टोरी

मुख्यमंत्री बनने के बाद बिप्लब देब अपने काम से ज्यादा अपनी अजीबोगरीब थ्योरीज और बयानों को लेकर विवादों में रहने लगे। उनके कुछ बयानों की वजह से पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा।

  • महाभारत काल में इंटरनेट: उन्होंने दावा कर दिया कि इंटरनेट और सैटेलाइट की खोज महाभारत काल में ही हो गई थी और संजय ने उसी तकनीक से धृतराष्ट्र को युद्ध का लाइव हाल सुनाया था।
  • अजीब सलाहें: बेरोजगार युवाओं को नौकरी के पीछे भागने के बजाय गाय पालने और पान की दुकान खोलने की नसीहत दे डाली।
  • बत्तख और ऑक्सीजन: उन्होंने कहा कि पानी में बत्तखों के तैरने से जल का ऑक्सीजन लेवल अपने आप बढ़ जाता है।
  • नाखून नोचने की धमकी: सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों के नाखून नोच लेने जैसी आक्रामक बातें भी उन्होंने सरेआम कहीं।

इन बयानों और पार्टी के भीतर बढ़ते आपसी मनमुटाव के चलते साल 2022 में, यानी चुनाव से ठीक एक साल पहले, बीजेपी हाईकमान ने उनसे अचानक इस्तीफा ले लिया और माणिक साहा को राज्य की कमान सौंप दी। हालांकि, बीजेपी ने उनका राजनीतिक सम्मान बनाए रखा। उन्हें हरियाणा जैसे अहम राज्य का चुनाव प्रभारी बनाया गया, राज्यसभा भेजा गया और वर्तमान में वे त्रिपुरा पश्चिम सीट से लोकसभा सांसद के रूप में संसद में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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