US Sanctions: कौन हैं भारतीय CEO आलोक चौधरी, अमेरिका ने क्यों लगाया बैन? अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी
US Sanctions Indian CEO Alok Choudhari: अमेरिका ने सूडान में जारी गृहयुद्ध को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक भारतीय CEO समेत आठ लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि इन लोगों और कंपनियों ने सूडान में हथियार, विस्फोटक और दूसरी सैन्य सामग्री पहुंचाने में मदद की।
इस सूची में भारतीय कंपनी SBL एनर्जी लिमिटेड के CEO आलोक चौधरी का नाम भी शामिल है। अमेरिका का कहना है कि इस सप्लाई ने सूडान के संघर्ष को और लंबा किया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर आलोक चौधरी कौन हैं और उन पर क्या आरोप लगाए गए हैं।

कौन हैं भारतीय CEO आलोक चौधरी?
आलोक चौधरी भारतीय कंपनी SBL एनर्जी लिमिटेड के CEO हैं। इस कंपनी को पहले अमीम एक्सप्लोसिव प्राइवेट लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता था। कंपनी का काम इंडस्ट्रियल विस्फोटक और उससे जुड़ी सामग्री बनाना और सप्लाई करना है। अमेरिका ने अब आलोक चौधरी और उनकी कंपनी को अपनी प्रतिबंध सूची में डाल दिया है। फिलहाल कंपनी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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अमेरिका ने क्या लगाए हैं आरोप?
अमेरिकी वित्त विभाग का आरोप है कि SBL एनर्जी लिमिटेड ने 200 से ज्यादा बार विस्फोटक और उससे जुड़ी सामग्री सूडान की टारगेट मल्टी एक्टिविटीज कंपनी (TMAC) को भेजी। अमेरिका का दावा है कि इन विस्फोटकों का इस्तेमाल सूडानी सशस्त्र बलों के बम बनाने में किया गया। इसी वजह से कंपनी और उसके CEO पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं।
सूडान की किस कंपनी से जुड़ा है मामला?
अमेरिका के मुताबिक, TMAC सूडान की एक ऐसी कंपनी है जो रक्षा क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं के साथ काम करती है। इसके जनरल मैनेजर तारिक हुसैन मुहम्मद मदानी को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है। मदानी का संबंध डिफेंस इंडस्ट्रीज सिस्टम (DIS) से भी बताया गया है। DIS सूडानी सेना के हथियार, गोला-बारूद और सैन्य वाहनों के रखरखाव का काम करती है।
सूडान के गृहयुद्ध से क्या है कनेक्शन?
अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि जिन नेटवर्क पर कार्रवाई हुई है, वे सूडानी सशस्त्र बलों और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) दोनों को हथियार, विस्फोटक और विदेशी लड़ाके उपलब्ध कराते थे। अमेरिका का दावा है कि इसी वजह से सूडान का गृहयुद्ध लंबा खिंचा और वहां मानवीय संकट और गंभीर हो गया। इन आरोपों के आधार पर कई कंपनियों और लोगों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
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प्रतिबंध का क्या होगा असर?
अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद इन लोगों और कंपनियों की अमेरिका में मौजूद संपत्तियां फ्रीज हो सकती हैं। अमेरिकी कंपनियां और नागरिक इनके साथ कारोबार नहीं कर सकेंगे। अगर किसी अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में अमेरिकी वित्तीय सिस्टम का इस्तेमाल होता है, तो उस पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित भारतीय कंपनी या आलोक चौधरी की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।












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