Vice President Election: कौन हैं सरबजीत सिंह खालसा और अमृतपाल सिंह? उपराष्ट्रपति चुनाव का किया बहिष्कार
Vice President Election: देश में आज उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव चल रहा है। वोटिंग की प्रक्रिया सुबह 10 बजे शुरू हो चुकी है, इस बीच अकाली दल (विरासत पंजाब दे) ने अपना रुख साफ कर दिया है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
निर्दलीय सांसद सरबजीत सिंह खालसा और अमृतपाल सिंह ('वारिस पंजाब दे' के प्रमुख) उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 का बहिष्कार करेंगे। अकाली दल ने कहा कि जिस तरह उन्होंने 1984 में अकाल तख्त साहिब की रक्षा की थी, उसी तरह वे पंजाब से जुड़े मुद्दों पर हमेशा खड़े रहे हैं।'
पार्टी ने कहा कि, '1947 से लेकर अब तक पंजाब ने कई बलिदान दिए हैं और 1984 के दर्द से लेकर 2015 (बर्गाड़ी कांड) तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़ी घटनाओं में भी पंजाब ने गहरे जख्म झेले हैं।'

पंजाब के साथ अन्याय का आरोप
पार्टी ने कहा कि, 'आज पंजाब झूठे केसों और पंजाबियों के साथ हो रहे अन्याय का सामना कर रहा है। इसी अन्याय के विरोध में पार्टी ने उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया है।
कौन हैं सरबजीत सिंह खालसा?
निर्दलीय सांसद सरबजीत सिंह खालसा पंजाब के फरीदकोट लोकसभा क्षेत्र से 2024 के आम चुनाव में निर्वाचित हुए थे। उनका जन्म 1 नवंबर 1979 को हुआ था। वे बेअंत सिंह के पुत्र हैं, जो इंदिरा गांधी के हत्यारे में से एक थे। उनकी मां, बिमल कौर खालसा भी एक पूर्व सांसद थीं। उनके दादा, बाबा सुचा सिंह, बठिंडा से सांसद रहे थे।
सरबजीत सिंह खालसा ने 2004 में बठिंडा से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। इसके बाद, उन्होंने 2007 में भादौर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, जिसमें भी वे असफल रहे। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी और 2024 के आम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में फरीदकोट सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने 2,98,062 वोट प्राप्त किए और अभिनेता करमजीत अनमोल को हराकर जीत हासिल की।
कौन हैं निर्दलीय सांसद अमृतपाल सिंह?
निर्दलीय सांसद अमृतपाल सिंह पंजाब के खडूर साहिब लोकसभा क्षेत्र से 2024 के आम चुनाव में निर्वाचित हुए। उन्होंने कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को लगभग 1.97 लाख वोटों के अंतर से हराया, जो इस क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी जीत मानी जाती है।
'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख
अमृतपाल सिंह 'वारिस पंजाब दे' नामक संगठन के प्रमुख हैं, जो खालिस्तान समर्थक विचारधारा को बढ़ावा देता है। अप्रैल 2023 में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया और असम के डिब्रूगढ़ जेल में रखा गया, हालांकि उन्हें संसद सत्रों में भाग लेने के लिए 54 दिनों की छुट्टी दी गई थी।
अमृतपाल सिंह ने उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 में मतदान से बहिष्कार का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र के लिए केवल दिखावा है और इसमें जनता की वास्तविक भागीदारी नहीं है। यह कदम उनके समर्थकों और आलोचकों दोनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां समर्थक इसे लोकतंत्र की सच्ची आवाज मानते हैं, जबकि आलोचक इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन मानते हैं।












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