ब्रह्मोस के सामने कहां है चीन और पाकिस्तान?
भारत ने बुधवार को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का सुखोई लड़ाकू विमान से सफल परीक्षण किया.
भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से तैयार हुई इस मिसाइल का जल और थल से पहले ही सफल परीक्षण किया जा चुका था, अब इसे वायु में भी सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया गया.
इस तरह यह तय हो गया है कि ब्रह्मोस जल, थल और वायु से छोड़ी जा सकने वाली मिसाइल बन गई है. इस क्षमता को ट्रायड कहा जाता है.
ट्रायड की विश्वसनीय क्षमता इससे पहले सिर्फ़ अमरीका, रूस और सीमित रूप से फ्रांस के पास मौजूद है.
ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक मिसाइल माना जा रहा है, जिसकी रफ़्तार 2.8 मैक (ध्वनि की रफ़्तार के बराबर) है. इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है और ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जा सकती है.
ऐसा कहा जा रहा है कि ब्रह्मोस जैसी क्षमता वाली मिसाइल भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के पास नहीं है.
चीन की डॉगफ़ेंग मिसाइल
डॉगफ़ेंग (DF)-31AG अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 10,000 किलोमीटर तक मार कर सकता है. इसके अलावा मध्यम दूरी की मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल DF-21D भी है. इसे 'कैरियर किलर' भी कहते हैं.
इस सूची में DF-26 और DF-16G बैलिस्टिक मिसाइल भी हैं.
इसके साथ ही चीन की सेना में लंबी दूरी वाली एक ऐसी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल को अगले साल शामिल करने का दावा किया है जो कई परमाणु हथियारों को एक साथ ले जाने में सक्षम होगी.
यह नई मिसाइल डॉगफ़ेंग-41 की गति मैक 10 से भी ज़्यादा होने का दावा किया गया है. यह दुश्मनों की मिसाइल चेतावनी और रक्षा प्रणाली में भी सेंध मारने में सक्षम है.
जून 2017 में चीन के एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कोर्पोरेशन (सीएएससी) ने बताया था कि चीन ने हाइपरसोनिक रैमजेट इंजन युक्त मिसाइल का सफल परीक्षण किया है.
'हाइपरसोनिक' होने का मतलब है इंजन की गति 6,200 किमी प्रति घंटा से अधिक होनी चाहिए. इस मिसाइल में लगने वाले रैमजेट इंजन में सॉलिड फ़्यूल का इस्तेमाल किया जाता है. 'सॉलिड फ़्यूल' यानि कि कोयले से पैदा होने वाली ऊर्जा. इससे मिसाइल को ले जाने वाले जेट का ख़र्चा बहुत हद तक कम हो जाता है.
रैमजेट इंजन की मदद से मिसाइल की क्षमता तीन गुना तक बढ़ाई जा सकती है. अगर किसी मिसाइल की क्षमता 100 किमी दूरी तक है तो उसे रैमजेट इंजन की मदद से 320 किमी तक किया जा सकता है.
लेकिन चीन के पास अभी तक ऐसी मिसाइल नहीं है जिसे ज़मीन, समुद्र और आसमान तीनों जगहों से दागा जा सके.
पाकिस्तान की बाबर मिसाइल
पाकिस्तान ने जनवरी 2017 में बाबर-3 मिसाइल का परीक्षण किया था. पाकिस्तानी सेना ने दावा किया था कि उन्होंने पनडुब्बी से छोड़ी जा सकने वाली अपनी पहली क्रूज़ मिसाइल बाबर-3 का सफल परीक्षण किया है.
इससे पहले पाकिस्तान के पास समुद्र से मार कर सकने वाली परमाणु क्षमता वाली मिसाइल नहीं थी. हालांकि बाबर-3 मात्र 450 किलोमीटर तक ही मार कर सकती है.
पनडुबब्बी से छोड़ी जा सकने वाली मिसाइल ख़तरनाक़ होती है क्योंकि ये छिपी हुई होती हैं और इसके बारे में पता नहीं लगता.
पाकिस्तान ने किया बाबर-3 क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण












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