भारत में कब आएगी ओमिक्रॉन की लहर, रोजाना कितने तक पहुंच सकते हैं मामले ? IIT वैज्ञानिकों ने सबकुछ बताया

नई दिल्ली, 22 दिसंबर: भारत में कोविड के ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित मामलों की संख्या अभी तक कम से कम 213 पहुंच चुकी है। हर दिन मामले बढ़ रहे हैं और महाराष्ट्र और दिल्ली में सबसे ज्यादा मामले हैं। इस वेरिएंट ने साउथ अफ्रीका में कोहराम मचाने के बाद इस समय यूके और अमेरिका को डराना शुरू कर दिया है। वहां हर दिन भारी संख्या में लोग इस नए वेरिएंट से संक्रिमित होते जा रहे हैं। इसपर कई रिसर्च आ चुके हैं कि डेल्टा के मुकाबले यह कम से कम तीन गुना ज्यादा तेजी से फैल रहा है। इसलिए भारत में भी एकबार फिर से एहतियातों की ओर ध्यान दिया जा रहा है और केंद्र सरकार ने राज्यों को हर स्थिति के मुताबिक खुद को अलर्ट रखने को कह दिया है। इस बीच आईआईटी कानपुर और हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने भारत में ओमिक्रॉन से संक्रमण की लहर के चरम पर पहुंचने और फिर उसके कंट्रोल में आने को लेकर एक रिसर्च किया है, जिसके मुताबिक 2022 के फरवरी में भारत में ओमिक्रॉन का संक्रमण चरम पर पहुंच सकता है।

भारत को चिंतित नहीं, सावधान रहने की आवश्यकता-वैज्ञानिक

भारत को चिंतित नहीं, सावधान रहने की आवश्यकता-वैज्ञानिक

कोविड के ओमिक्रॉन वेरिएंट ने सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में दस्तक दी थी, जहां 15 दिसंबर को करीब 23,000 तक रोजाना के मामले पहुंच गए थे। लेकिन, अब यह कम होकर 20,000 की संख्या से नीचे आ चुके हैं। इस वायरस से हुई मौत अब भी वहां दहाई अंकों में ही हैं, लेकिन यह लगातार बढ़ती जा रही है। आईआईटी के दो प्रोफेसरों ने इसी आधार पर अपने अनुमान साझा किए हैं। जिसमें अहम बात ये है कि भारत को चिंतित होने की नहीं, बल्कि सावधान रहने की आवश्यकता है। वैसे इस वेरिएंट के बारे में अभी तक यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि यह नैचुरल इम्यूनिटी या वैक्सीन से प्राप्त इम्यूनिटी को किस हद तक भेद सकता है।

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    फरवरी के अंत में चरम पर पहुंच सकता है ओमिक्रॉन लहर-वैज्ञानिक

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    आईआईटी हैदराबाद प्रोफेसर एम विद्यासागर और आईआईटी कानपुर के मनिंद्र अग्रवाल और सुत्रा मॉडल ऑफ ट्रैकिंग द पैनडेमिक ट्रैजेक्ट्री के सह-संस्थापकों ने इंडिया टुडे को बताया है कि भारत में ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से कोविड संक्रमण के रोजाना के मामले फरवरी, 2022 के अंत तक 1.5 लाख से 1.8 लाख तक पहुंच सकते हैं। यह आकलन 'सबसे खराब स्थिति' के आधार पर की गई है। यह तब होगी जब नया वेरिएंट वैक्सीन या प्राकृतिक रूप दोनों तरह से प्राप्त इम्यूनिटी को भेदने में सफल हो जाए।

    'दूसरी लहर से कम खतरनाक होने की उम्मीद'

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    यही नहीं इनका यह भी अनुमान है कि अस्पताल में भर्ती की नौबत कम आएगी और चरम पर संक्रमण पहुंचने के बाद इसमें तेजी से गिरावट भी आने लगेगी। इन वैज्ञानिकों ने बड़ी बात ये कही है कि कोरोना की यह लहर दूसरी लहर की तुलना में कम खतरनाक होने की उम्मीद है। यानी ओमिक्रॉन की वजह से मामलों में जितनी तेजी से इजाफा होगा इसमें उतनी ही तेजी से गिरावट आने की भी संभावना है। उदाहरण के लिए साउथ अफ्रीका में यह तीन हफ्ते में चरम पर पहुंच गया और फिर उसमें गिरावट शुरू हो गई।

    भारत में करीब एक-तिहाई लोग स्वस्थ हो चुके हैं

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    मंगलवार रात 10 बजे तक केंद्र और राज्य सरकार के पास जो आंकड़े उपलब्ध थे, उसमें सर्वाधिक 65 महाराष्ट्र और उसके बाद 54 केस दिल्ली में थे। राहत की बात ये है कि भारत में अभी तक इस वेरिएंट की वजह से किसी की भी मौत नहीं हुई है और मंगलवार तक के 211 के आंकड़ों में से 77 लोग इससे स्वस्थ भी हो चुके थे। लेकिन, अमेरिका में जिस तरह से नए संक्रमण में ओमिक्रॉन का आंकड़ा पिछले हफ्ते 73% को छू लिया है, वह सावधान रहने का ही संकेत दे रहा है।

    भारत में फरवरी के अंत तक चरम पर पहुंच सकता है ओमिक्रॉन का केस, रोजाना आ सकते हैं 1.5 से 1.8 लाख केस

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