जब शत्रुघ्न सिन्हा को मिली थी धमकी, कांग्रेस का प्रचार करो नहीं तो फंसा देंगे बड़ौदा डायनामाइट केस में
नई दिल्ली, 07 अप्रैल। गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में इमरजेंसी के दौरान किशोर कुमार के गानों पर प्रतिबंध की चर्चा की थी। दरअसर इमरजेंसी में केवल किशोर कुमार पर ही नहीं बल्कि फिल्मी दुनिया के कई लोगों पर जुल्म ढाया गया था। देवानंद, मनोज कुमार और शत्रुघ्न सिन्हा इनमें प्रमुख थे। इमरजेंसी के समय विद्याचरण शुक्ल सूचना और प्रसारण मंत्री थे। संजय गांधी और विद्या चरण शुक्ल चाहते थे कि फिल्म के कलाकार इमरजेंसी के पक्ष में प्रचार-प्रचार करें ताकि जनता के मन में कोई गलत बात न आये।

बाद में ये कांग्रेस के पक्ष में चुनाव प्रचार कराने के लिए भी दबाव बनाने लगे। लेकिन फिल्म उद्योग से जुड़े कुछ साहसी लोग नागरिक स्वतंत्रता के दमन से बहुत नाराज थे। वे इंदिरा सरकार की दमनकारी नीतियों का विरोध करने लगे। इस विरोध को दबाने के लिए संजय गांधी और विद्याचरण शुक्ल ने फिल्मकारों पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया। चर्चित अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को धमकी दी गयी थी कि यदि उन्होंने बिहार में कांग्रेस का प्रचार नहीं किया तो उन्हें बड़ौदा डायनामाइट केस में फंसा दिया जाएगा।

18 जनवरी 1977 को चुनाव की अचानक घोषणा
1975 में इमरजेंसी लगने के बाद लोकसभा का कार्यकाल नवम्बर 1977 तक बढ़ गया था। व्यक्तिगत आजादी और प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गयी थी। इंदिरा गांधी का निरंकुश शासन अत्याचारी हो चुका था। जेपी के नेतृत्व में इंदिरा गांधी को सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए आंदोलन शुरू हो चुका था। विपक्ष के सारे नेता जेल में थे। किसी को मालूम न कि चुनाव कब होगा। इंदिरा गांधी ने 18 जनवरी 1977 को अचानक चुनाव कराये जाने की घोषणा कर सबको हैरत में डाल दिया। कांग्रेस को खुफिया विभाग और अन्य स्रोतों से यह फीडबैक मिला था कि यदि मार्च में चुनाव काराये जाएं तो जीत मिल सकती है। चुनाव की घोषणा के पांच दिन बाद ही जनता पार्टी का गठन हुआ था। चंद्रेशेखर अध्यक्ष, रामकृष्ण हेगड़े महासचिव और लालकृष्ण आडवाणी को प्रवक्ता बनाया गया था। 16 से 20 मार्च तक चुनाव होना था। चुनाव की घोषणा तो हो गयी थी लेकिन इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी नहीं हटायी थी। उस समय भी संजय गांधी की मनमानी जारी थी। कहने के लिए इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं लेकिन सत्ता के असल केन्द्र संजय गांधी थे।

शत्रुघ्न सिन्हा ने किया था इमरजेंसी की नीतियों का विरोध
जनता पार्टी के लगभग बड़े नेता जेल से ही चुनाव लड़ रहे थे। कई दलों के मिलने से यह पार्टी बनी थी। संगठन उतना मजबूत न था। चुनाव लड़ने के लिए पैसा भी नहीं था। दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र बूट पॉलिश कर जनता पार्टी के लिए पैसा इकट्ठा कर रहे थे। पार्टी के अध्यक्ष चंद्रेशेखर सभा के दौरान आम लोगों के सामने चादर फैला कर चंदा देने की अपील करते। जैसे- तैसे फंड जुटाया जा रहा था। सारा भरोसा टिका था जेपी के लोकतांत्रिक आंदोलन पर। दूसरी तरफ संजय गांधी को कांग्रेस की जीत का भरोसा था। वे कांग्रेस के प्रचार के लिए फिल्मी कलाकारों पर जोर जबर्दस्ती करने लगे। दूरदर्शन, आकाशवाणी और सेंसर बोर्ड का भय दिखा कर फिल्मी दुनिया के लोगों को डराया जाने लगा। दिग्गज अभिनेता प्राण वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इमरजेंसी और सरकार की गलत नीतियों का विरोध किया। उसके बाद देवानंद ने तो विरोध का बिगुल ही फूंक दिया। चुनाव से पहले मुम्बई के शांताक्रूज के पास फिल्मी दुनिया के लोगों ने जनता पार्टी के समर्थन में एक सभा की थी। इस सभा में देवानंद, प्राण, शत्रुघ्न सिन्हा, विजय आनंद, डैनी डैंगजोंगपा जैसे लोग जुटे। उस समय की एक तस्वीर बहुच चर्चा में रही थी जिसमें विजय आनंद, शत्रुघ्न सिन्हा और डैनी हवा में मुट्ठी लहरा कर इमरजेंसी की नीतियों की विरोध कर रहे थे। शत्रुघ्न सिन्हा जयप्रकाश नारायण के बहुत बड़े समर्थक थे। पटना के कदमकुआं में इन दोनों का घर बिल्कुल आसपास है।

जब कांग्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा को केस में फंसाने की दी धमकी
मशहूर लेखक और शोध पत्रकार रिनचेन नोरबु वांगचुक ने अपने लेख में शत्रुघ्न सिन्हा से जुड़ा वाकया लिखा है। "सूचना और प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी की तरफ से शत्रुघ्न सिन्हा को धमकी दी गयी थी कि अगर उन्होंने बिहार में कांग्रेस का प्रचार नहीं किया तो उन्हें बड़ौदा डायनामाइट केस में फंसा दिया जाएगा।" इस घटना का जिक्र डीआर मानेकर और कमला मानेकर ने भी अपनी किताब (डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ इंदिरा गांधी) में किया है। शत्रुघ्न सिन्हा चूंकि सरकार की मनमानी और इमरजेंसी का विरोध कर रहे थे इसलिए उन्हें धमकी देकर डराया गया। शत्रुघ्न सिन्हा उस समय हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय खलनायक थे। खलनायक के रूप में उनकी लोकप्रियता कई हीरे पर भारी पड़ती थी। संजय गांधी के इशारे पर शत्रुघ्न सिन्हा की फिल्मों का भी प्रसारण दूरदर्शन पर प्रतिबंधित किया गया था। जब चुनाव में इंदिरा गांधी की हार हो गयी तो मशहूर फिल्म निर्माता जीपी सिप्पी (शोले) ने कहा था, "मुम्बई का फिल्म उद्योग पिछले 20 महीने से दहशत के साये में जी रहा था। इस जुड़े लोगों को धमकाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाये गये।" समय समय की बात है। जिस कांग्रेस ने कभी शत्रुघ्न सिन्हा को धमकाया था, बाद में वे उसी के साथ जुड़ गये थे। भाजपा, कांग्रेस से होते हुए अब वे तृणमूल कांग्रेस में हैं।
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