राज्यसभा में भी आपराधिक प्रक्रिया पहचान विधेयक पास, शाह बोले- अन्य देशों की तुलना में हमारा कानून 'बच्चा'
नई दिल्ली, 6 अप्रैल: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है, जिसमें मोदी सरकार धड़ाधड़ लंबित पड़े विधेयकों को पारित करवा रही है। इस कड़ी में बुधवार को आपराधिक प्रक्रिया पहचान विधेयक 2022 को भी राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित करवाया गया। इससे पहले ये विधेयक 4 अप्रैल को लोकसभा में पारित हुआ था। सरकार का दावा है कि इस विधेयक की मदद से अपराध की जांच तेज करने में मदद मिलेगी।

इस विधेयक पर राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य अपराध दर में कमी, अपराधियों की सजा की दर में वृद्धि और देश की सुरक्षा को बढ़ावा देना है। ये बिल किसी भी व्यक्ति की निजता से समझौता नहीं करेगा और उचित जांच के बाद अधिनियम के नियमों को अधिसूचित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अन्य देशों की तुलना में सख्ती के मामले में हमारा कानून 'बच्चा' यानी कुछ नहीं है। दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में इससे ज्यादा कड़े कानून हैं, जिस वजह से वहां सजा की दर भी ज्यादा है।
गृहमंत्री के मुताबिक ये विधेयक अपराध से पीड़ितों के मानवाधिकार की रक्षा के लिए है। बिल के प्रावधानों का दुरुपयोग करने का हमारा इरादा नहीं है। ये हमारी पुलिस को अपराधियों से आगे रखने के लिए है। अगली पीढ़ी के अपराधों को पुरानी तकनीकों से नहीं निपटा जा सकता है, हमें आपराधिक न्याय प्रणाली को अगले स्तर तक ले जाने का प्रयास करना होगा।
शाह ने सदन को भरासो दिलाया कि डेटा सुरक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही मैनपॉवर को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं विधेयक पर बहस में कुल 17 सदस्यों ने भाग लिया। कुछ विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को असंवैधानिक करार दिया और कहा कि इसे प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए।












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