'आपकी मनोकामनाएं पूरी हों, आपके जीवन में...', जब CM ममता ने आरजी कर के EX-प्रिसिंपल को लिखा था लेटर

RG Kar Hospital Ex-Principal Dr Sandip Ghos: कोलकाता में 31 साल की महिला रेजिडेंट डॉक्टर से रेप और हत्या का मामला देशभर में सुर्खियों में है। मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है। इस बीच एक ऐसा लेटर सामने आया है, जो हैरान करने वाला है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवालों से घिरे आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष को उनकी जन्मदिन की बधाई देने के लिए एक लेटर लिखा था। इंडिया टुडे के मुताबिक ये लेटर संदीप घोष को सीएम ममता ने साल 2022 में लिखा था। लेटर 30 जून 2022 का है।

RG Kar Hospital Ex-Principal Dr Sandip Ghos

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CM ममता बनर्जी ने लिखा, 'डियर प्रोफेसर घोष...'

सीएम ममता बनर्जी ने लेटर में लिखा है,

''डियर प्रोफेसर घोष आपके जन्मदिन पर मेरी तरफ से शुभकामना संदेश स्वीकार करें। आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हों। आपके जीवन में खुशहाली रहे। आप स्वस्थ, प्रसन्न रहें और जीवन में सफलता हासिल करें। मेरी तरफ से आपके परिवार को भी शुभकामनाएं।''

सूत्रों के मुताबिक डॉ. संदीप घोष उन हस्तियों के एक छोटे समूह का हिस्सा थे, जिन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनके जन्मदिन पर सद्भावना के तौर पर व्यक्तिगत पत्र भेजा करती थीं। इस सूची में डॉ. घोष का नाम होना यह दिखाता है कि प्रशासन और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से उनके अच्छे संबंध हैं।

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BJP बोली- आरजी कर के EX-प्रिसिंपल के साथ ममता के घनिष्ठ संबंध!

इस लेटर के सामने आने के बाद भाजपा ने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि आरजी कर अस्पताल में प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ क्रूर बलात्कार और हत्या के मामले में जांच के घेरे में आए डॉ. घोष का मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ घनिष्ठ संबंध था।

भाजपा नेता और प्रवक्ता प्रियंका टिबरेवाल ने कहा कि यह कोई रहस्य नहीं है कि डॉ. संदीप घोष, जिन्होंने मामले में सीबीआई द्वारा मैराथन पूछताछ का सामना किया है, ममता बनर्जी की अच्छी किताबों में होने का विशेषाधिकार प्राप्त है।

प्रियंका टिबरेवाल ने कहा, "यही कारण है कि जब सतर्कता रिपोर्ट के बाद आरजी कर अस्पताल में अनियमितताओं का पता लगाने के लिए एक विशेष समिति बनाई गई, तो डॉ. संदीप घोष को नहीं हटाया गया। वे अभी भी कॉलेज में बने हुए हैं।"

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संदीप घोष को लेकर जब हाई कोर्ट ने ममता सरकार को घेरा

डॉक्टर के साथ क्रूर बलात्कार और हत्या पर देशव्यापी आक्रोश के बीच संदीप घोष ने आरजी कर अस्पताल के प्रिंसिपल के पद से 10 अगस्त इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उन्हें तुरंत कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रमुख के रूप में एक शानदार पोस्टिंग दी गई, जिससे प्रदर्शनकारियों को बहुत निराशा हुई।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने तबादले पर कड़ा रुख अपनाया और डॉ. घोष को अनिश्चितकालीन अवकाश पर भेज दिया। इसके बाद बंगाल सरकार ने डॉ. संदीप घोष के तबादले के आदेश को रद्द कर दिया। डॉ. घोष के लिए और भी मुसीबत खड़ी हो सकती है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आरजी कर अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच राज्य द्वारा गठित एसआईटी से सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला आरजी कर के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली की याचिका के बाद लिया गया। अख्तर अली ने दावा किया था कि डॉ. संदीप घोष कई अवैध गतिविधियों में शामिल थे, जिसमें लावारिस शवों की बिक्री भी शामिल थी।

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