अटल बिहारी वाजपेयी की हाजिरजवाबी: जब हुई दल-दल की बात और वाजपेयी ने खिला दिया कमल
नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी शानदार कवि और प्रखर वक्ता होने के साथ ही कमाल के हाजिरजवाब भी थे। वाजपेयी राजनीति में आने से पहले पत्रकार थे और राजनीति में आने के बाद उनका एक से बढ़कर एक पत्रकारों से सामना हुआ। सांप्रदायिकता से लेकर नागपुर से रिमोट कंट्रोल तक कई चुभते हुए सवाल वाजपेयी पूछे गए, लेकिन वह कभी नाराज नहीं हुए। उल्टा वाजपेयी ने अपनी हाजिरजवाबी से चुभते सवाल पूछने वाले की ही बोलती बंद कर दी।

प्रश्न: अटलजी आपकी पार्टी के ही कुछ लोग कहते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी तो मुखौटा हैं, असली ताकत तो आडवाणीजी के हाथ में है।
जवाब: वाजपेयी ने हंसते हुए कहा, 'सुना तो मैंने भी है ऐसा, लेकिन जब मैंने पूछा कि भई वो असली चेहरा कहां है तो मुझे कहा गया कि आप ही असली चेहरा हैं।'
प्रश्न: बार-बार अखबारों में लिखा जाता है कि बीजेपी में दो दल हैं। एक नरम दल है, एक गरम दल है। एक वाजपेयी जी का दल है और एक आडवाणी जी का दल है।
जवाब: वाजपेयी जी मुस्कुराते हुए बोले, 'नहीं मैं किसी दलदल में नहीं हूं। मैं दूसरों के दलदल में अपना कमल खिलाता हूं।'
प्रश्न: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से पूछा कि आप अब तक कुंवारे क्यों हैं?
जवाब: मैं अविवाहित हूं, लेकिन कुंवारा नहीं हूं
प्रश्न: अटली जी खुशवंत सिंह ने अपने कॉलम में लिखा है कि काफी अच्छे नेता हैं। विदेश नीति के अच्छे जानकारी हैं। उनका एक ही माइनस पॉइंट है, आदमी अच्छे हैं, लेकिन गलत पार्टी में हैं।
जवाब: सवाल पूछने वाले पत्रकार रजत शर्मा, कार्यक्रम में बैठी ऑडियंस के साथ वाजपेयी भी जोर से हंस पड़े और मुस्कुराते हुए बोले- सरदार खुशवंत सिंह जी मैं बड़ी इज्जत करता हूं, लेकिन मैं उनसे सहमत नहीं हूं। अगर मैं सचमुच में अच्छा आदमी हूं तो गलत पार्टी में कैसे हो सकता हूं और अगर गलत पार्टी में हूं तो मैं अच्छा आदमी नहीं हो सकता। अगर फल अच्छा है तो पेड़ खराब नहीं हो सकता।
रामविलास पासवान: बीजेपी बहुत राम की बातें करती है, पर उनमें कोई राम नहीं है। मेरे तो नाम में ही राम है।
वाजपेयी का जवाब: पासवान जी हराम में भी राम होता है।
प्रश्न: एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि बेनजीर भुट्टो को आज रात आप क्या मैसेज करेंगे
वाजपेयी का जवाब: यदि मैं सुबह उन्हें संदेश भेजूं तो इसमें कोई बुराई है?
पाकिस्तान: कश्मीर के बिना पाकिस्तान अधूरा है
वाजपेयी का जवाब: पाकिस्तान के बिना हिंदुस्तान अधूरा है












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