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जब अभिनेता मनोज कुमार के सवाल से शर्मिंदा हो गयीं थीं अमृता प्रीतम

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नई दिल्ली, 09 अप्रैल। राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह के भाषण ने इमरजेंसी के दमनकारी इतिहास के पन्नों को फिर पलट दिया है। उन्होंने मशहूर गायक किशोर कुमार के साथ हुई ज्यादती का जिक्र किया था। दरअसल इमरजेंसी में जुल्म-जबर्दस्ती की अनगिनत घटनाएं हुईं थीं। कई किस्सा सुर्खियों में रहे। कई वक्त की धूल में दबे रहे।

when amrita pritam was embarrassed by actor manoj kumar question

इमरजेंसी के दौरान किशोर कुमार की तरह ही कुछ और फिल्म कलाकारों को डराया, धमकाया और सताया गया था। इनमें मनोज कुमार भी एक थे। हैरत की बात है ये कि मनोज कुमार को साधने के लिए प्रतिष्ठित साहित्यकार अमृता प्रीतम को हथियार बनाया गया था।

अमृता प्रीतम और अभिनेता मनोज कुमार के बीच क्या हुआ था ?

अमृता प्रीतम और अभिनेता मनोज कुमार के बीच क्या हुआ था ?

मनोज कुमार बहुमुखी प्रतिभा वाले फिल्मकार हैं। वे जितने अच्छे अभिनेता रहे हैं उतने ही अच्छे निर्माता-निर्देशक भी। उनकी कई फिल्मों ने गोल्डन जुबली और डायमंड जुबली मनायी हैं। 1975 में जब इमरजेंसी लगी उसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने इसका सार्वजनिक विरोध कर दिया था। एक दिन सुबह में मनोज कुमार को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी का फोन आया। अधिकारी ने मनोज कुमार से एक ऐसी डॉक्यूमेंट्री को निर्देशित करने का अनुरोध किया जो इमरजेंसी के समर्थन में था। इसकी पटकथा अमृता प्रीतम ने लिखी थी। मनोज कुमार को स्क्रिप्ट भी भेजी गयी थी। मनोज कुमार ने फोन पर ही इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। फिर उन्होंने अमृता प्रीतम को फोन किया। मनोज कुमार ने अमृता प्रीतम से पूछा, क्या एक लेखक के रूप में आपने खुद को बेच दिया है ? मनोज कुमार का सवाल सुन कर अमृता प्रीतम शर्मिंदा हो गयीं। फिर उन्होंने इस प्रस्ताव के लिए क्षमा मांगी और मनोज कुमार से कहा कि आप उस स्क्रिप्ट को फाड़ कर फेंक दीजिए। वरिष्ठ पत्रकार रंजन दास गुप्ता ने अपने लेख में इस वाकये का जिक्र किया है।

अमृता प्रीतम ने इमरजेंसी का समर्थन किया था

अमृता प्रीतम ने इमरजेंसी का समर्थन किया था

2019 में प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो ने कुछ पत्र सार्वजनिक किये थे। इनमें एक प्रेस बयान वह भी था जिसे 29 जून 1975 को प्रधानमंत्री कार्यालय ने जारी किया था। इस पत्र में पीएमओ ने बताया था कि डॉ. हरिवंश राय बच्चन, अमृता प्रीतम, राजिंदर सिंह बेदी समेत भारत के 40 प्रमुख साहित्यकारों ने इमरजेंसी का समर्थन किया था। इन लेखकों ने इमरजेंसी लगाने के फैसले को सही बताया था। पिंजर जैसा कालजयी उपन्यास लिखने वाली अमृता प्रीतम ने कैसे डिक्टेटरशिप का समर्थन किया था, यह सोच कर आज बहुत हैरानी होती है। अमृता प्रीतम की इंदिरा गांधी से भी निकटता थी। ऊर्दू के मशहूर लेखिका फहमीदा रियाज का जन्म मेरठ में हुआ था। लेकिन वे बाद में पाकिस्तान चली गयी थीं। 1977 में जनरल जियाउल हक ने पाकिस्तान की सत्ता संभाली थी। सैन्य तानाशाह जियाउल हक ने फहमीदा को पाकिस्तान से निकाल दिया था। अमृता प्रीतम, फहमीदा की सहेली थीं। उन्होंने इंदिरा गांधी से मिल कर फहमीदा को भरत में शरण दिलायी थी। अमृता प्रतीम इंदिरा गांधी के परिवार के नजदीक थीं। जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तब 1986 में अमृता प्रीतम को राज्यसभा में मनोनीत किया गया था।

इमरजेंसी में मनोज कुमार पर जुल्म

इमरजेंसी में मनोज कुमार पर जुल्म

'शोर' हिंदी सिनेमा की एक सुपरहिट फिल्म है। 1972 में रिलीज हुई थी। इसका लेखन, निर्देशन और निर्माण मनोज कुमार ने किया था। वे ही इस फिल्म के हीरो भी थे। इसके कर्णप्रिय गानों ने धूम मचा दी थी। इसकी लोकप्रियता को देखते हुए मनोज कुमार ने इमरजेंसी के दौरान दोबारा रिलीज करने की योजना बनायी थी। उन्होंने 'शोर' के दोबारा रिलीज की तारीख भी घोषित कर दी थी। लेकिन इसके पहले मनोज कुमार ने इमरजेंसी का विरोध कर संजय गांधी और विद्याचरण शुक्ल को नाराज कर दिया था। विद्याचरण शुक्ल सूचना और प्रसारण मंत्री थे। मनोज कुमार की विद्याचरण शुक्ल से बहुत अच्छी जान -पहचान थी। लेकिन संजय-शुक्ल की जोड़ी अब उनसे खपा थी। कहा जाता है कि मनोज कुमार को सबक सिखाने के लिए फिल्म 'शोर' को उसके दोबारा रिलीज डेट के पहले ही दूरदर्शन पर दिखा दिया गया था। इसका नतीजा ये हुआ कि जब 'शोर' दोबारा पर्दे पर आयी तो वह टिकट खिड़की पर असफल हो गयी। इमरजेंसी के दौरान मनोज कुमार की एक और फिल्म 'दस नम्बरी' 1976 में रिलीज हुई थी। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस फिल्म को प्रतिबंधित कर दिया। मनोज कुमार ने इस फैसले के खिलाफ मुकदमा कर दिया। मुकदमे में लाखों रुपये खर्च हुए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कोर्ट में केस की सुनायी चल रही थी। 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी। लालकृष्ण आडवाणी सूचना और प्रसारण मंत्री बने। इसके बाद मनोज कुमार ने फिल्म दस नम्बरी से जुड़ा मुकदमा जीत लिया था।

यह भी पढ़ें: अलग-अलग राज्यों के लोग अंग्रेजी नहीं हिंदी में बात करें: गृह मंत्री अमित शाह

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when amrita pritam was embarrassed by actor manoj kumar question
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