उन भारतीयों का क्या हुआ, जिनका पनामा लीक में आया था नाम
एक तरफ जहां नवाश शरीफ को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुना दी है, वहीं भारत में अभी भी मामले की जांच चल रही है
नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को वहां की सुप्रीम कोर्ट ने पीएम पद के लिए अयोग्य करार दिया है। दरअसल पिछले साल के अप्रैल माह में लीक हुए पनामा पेपर्स की लिस्ट में विश्वभर के तमाम लोगों के साथ नवाज शरीफ का भी नाम सामने आया था। पनामा पेपर्स में नाम होने के कारण पिछले साल आइसलैंड के प्रधानमंत्री को भी अपनी कुर्सी गवानी पड़ी थी। इस लिस्ट में भारत की भी 500 से ज्यादा नामी गिरामी हस्तियां मौजूद हैं।
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क्या है पनामा लीक?
पनामा उत्तरी अमेरिका में स्थित एक छोटा-सा देश है जहां पर कंपनी स्थापित करने की प्रक्रिया बहुत आसान मानी जाती है। पनामा में व्यापार पर कर भी नहीं के बराबर वसूला जाता है और कंपनी के मालिकों की पहचान को भी गुप्त रखा जाता है। यही वजह है कि दुनिया भर के लोग वहां से हवाला ऑपरेटरों के जरिए अपने काले धन को सफेद करने का काम करते हैं। पिछले साल के अप्रैल माह में उन सारे लोगों का नाम सामने आया जिन्होंने पनामा में अपने नाम की कंपनी स्थापित कर रखी थी। बता दें की वहां पर निवेश करने वाले सारे लोगों को भ्रष्ट नहीं कहा जा सकता क्योंकि कुछ लोगों ने कानून के दायरे में रहकर भी वहां पर निवेश किया है। लेकिन फिर भी शक की सुई तो उन सबके ऊपर मंडरा ही रही है जिनका नाम पनामा लीक में बाहर आया है।

इन लोगों के नाम हैं लीक में
पनामा लीक में भारत से लगभग हर क्षेत्र की बड़ी हस्तियों के नाम उजागर हुए हैं। एक तरफ जहाँ फिल्म जगत के महानायक अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम सामने आया है तो दूसरी तरफ बड़े कॉर्पोरेट घरानों में डीएलएफ के मालिक के.पी सिंह तथा उनके परिवार के 9 सदस्य, अपोलो टायर्स और इंडिया बुल्स के प्रमोटर और गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी का नाम भी इस सूचि में शामिल है। बंगाल के एक नेता शिशिर बजोरिया के अलावा लोकसत्ता पार्टी के नेता अनुराग केजरीवाल का भी नाम सामने आया है।

क्या कहा था वित्त मंत्री ने
पिछले हफ्ते संसद में वित्त मंत्री अरुण जेटली से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया की पनामा लीक में सामने आए भारतीयों की जांच करने के लिए पिछले साल ही एक मल्टी-एजेंसी ग्रुप (मैग) का गठन किया गया था और वह अपना काम भली भांति कर रही है। जब उनसे पूछा गया की क्या सरकार ने विदेश में जमा काले धन का अनुमान लगाने के लिए कोई कार्य किया है तो इसपर जेटली ने बताया की इस कार्य के लिए उन्होंने एक समिति का गठन किया है जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

अभी भी जांच चल रही है
जाहिर है कि यह सरकार का ढीला रवैया दर्शाता है। एक तरफ जहाँ पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के भ्रष्टाचार के खिलाफ वहां की सुप्रीम कोर्ट ने फैसला तक सुना दिया दिया वहीं भारत सरकार अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम लेने में नाकाम रही है।












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