जानिए तलाक-ए-हसन क्या है ? 4 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम महिला की इस याचिका पर होगी सुनवाई
नई दिल्ली, 18 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन के खिलाफ दी गई एक मुस्लिम महिला पत्रकार की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। इस मामले पर सर्वोच्च अदालत चार दिन बाद सुनवाई करेगा। पीड़ित मुस्लिम महिला ने मुसलमानों में तलाक की इस प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। साथ ही साथ अदालत से गुहार लगाई है कि एकतरफा एक्स्ट्राजूडिशल तलाक की प्रथा को रोककर सबके लिए एक समान तलाक की प्रक्रिया तय करने के लिए केंद्र सरकार को गाइडलाइंस तैयार करने का भी निर्देश जारी करे। गौरतलब है कि देश में इंस्टेंट तलाक पहले ही प्रतिबंधित की जा चुकी है।

तलाक-ए-हसन को असंवैधानिक घोषित करने की मांग
मुस्लिम महिला याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश होते हुए वरिष्ठ वकील पिंकी आनंद ने अदालत से कहा है कि पीड़ित महिला को तलाक का तीसरा नोटिस मिला है और उसका एक नाबालिग बच्चा भी है। इसके बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमना की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले को चार दिन बाद सुनवाई के लिए लिस्ट करने को कहा है। अपनी याचिका में एक पीड़ित मुस्लिम महिला ने सुप्रीम कोर्ट से 'तलाक-ए-हसन और सभी तरह के एकतरफा एक्स्ट्राजूडिशल तलाक' के तरीकों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। याचिका में केंद्र सरकार को तलाक के लिए लैंगिक रूप से निष्पक्ष और धार्मिक तौर पर निष्पक्ष एक समान आधार तैयार करने और सभी के लिए तलाक की एक समान प्रक्रिया बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।

पीड़िता के मुताबिक- यह इस्लामी आस्था का अभिन्न अंग नहीं है
याचिकाकर्ता की ओर से याचिका के माध्यम से अदालत में कहा गया है,'तलाक-ए-हसन और एकतरफा एक्स्ट्राजूडिशल तलाक के अन्य रूपों की परंपरा न तो मानवाधिकारों और लैंगिक समानता के आधुनिक सिद्धांतों के मुताबिक है और न ही इस्लामी आस्था का अभिन्न अंग है। कई मुस्लिम राष्ट्रों ने इन प्रथाओं को प्रतिबंधित कर दिया है, जबकि यह भारतीय समाज में सामान्य रूप से और विशेष रूप से याचिकाकर्ता की तरह की मुस्लिम महिलाओं को परेशान करना जारी रखे हुए है।' याचिका में यह भी कहा गया है कि यह प्रथा कई महिलाओं और उनके बच्चों पर कहर ढाती है, खासकर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों पर। याचिका में मांग की गई है कि 'तलाक-ए-हसन और एकतरफा एक्स्ट्राजूडिशल तलाक के अन्य सभी रूप' को शून्य और असंवैधानिक घोषित किया जाए।

दहेज के लिए पीड़िता की होती थी प्रताड़ना
दावे के मुताबिक याचिका दायर करने वाली महिला पेशे से पत्रकार है, जिसने खुद को एकतरफा एक्स्ट्राजूडिशल तलाक-ए-हसन से पीड़ित बताया है। याचिकाकर्ता का निकाह 25 दिसंबर, 2020 को मुस्लिम परंपराओं के तहत एक शख्स से हुE थी और उसका एक बेटा भी है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसके माता-पिता को निकाह के दौरान दहेज देने के लिए मजबूर किया गया था और बाद में ज्यादा दहेज नहीं मिलने के नाम पर उसे प्रताड़ित किया गया। पीड़िता का आरोप है कि उसके शौहर और उसके ससुराल वालों ने सिर्फ शादी के बाद ही प्रताड़ित नहीं किया था, बल्कि जब वह गर्भवती थी, तब भी उसे यातनाएं दी गईं, जिससे वह गंभीर रूप से बीमार हो गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि जब पीड़िता के पिता ने दहेज देने से इनकार कर दिया तो उसके शौहर ने एक वकील के जरिए उसे एकतरफा एक्स्ट्राजूडिशल तलाक-ए-हसन दे दिया, जो कि संविधान के अनुच्छेद- 14, 15, 21, 25 और संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का भी उल्लंघन है।

'मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 भी असंवैधानिक घोषित हो'
याचिकाकर्ता ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) ऐप्लिकेशन ऐक्ट, 1937 की धारा 2 को भी शून्य और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद- 14, 15, 21, 25 का उल्लंघन करता है और तलाक-ए-हसन जैसे एकतरफा एक्स्ट्राजूडिशल तलाक की प्रथा की पुष्टि करता है। याचिका में मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 को भी शून्य और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद- 14, 15, 21, 25 के तहत मुस्लिम महिलाओं को तलाक-ए-हसन जैसे एकतरफा एक्स्ट्राजूडिशल तलाक से सुरक्षा देने में नाकाम रहा है।

तलाक-ए-हसन क्या है ?
इस्लाम में तलाक के तीन तरीके आमतौर पर प्रचलन में रहे हैं। जिनमें से ट्रिपल तलाक या इंस्टेंट तलाक इसका सबसे ज्यादा कुख्यात तरीका था, जिसपर पाबंदी लग चुकी है। तलाक-ए-हसन की जानकारी रखने वालों के मुताबिक यह तलाक की ऐसी प्रथा है, जिसमें शौहर अपनी बीवी को तीन अलग-अलग समय पर तलाक कहता है। यह तलाक तब कहा जाता है, जब बीवी का पीरियड नहीं चल रहा हो। इस प्रथा में शौहर को यह अधिकार है कि इद्दत (तकरीबन तीन महीने अलग रहने की व्यवस्था) की अवधि पूरी होने से पहले तलाक का नोटिस वापस ले सकता है। लेकिन, यदि शौहर ने तीसरी बार तलाक कह दिया तो इसे अंतिम माना जाता है और निकाह टूट जाता है और तलाक पर मुहर लग जाती है। इसके बाद यदि दोनों फिर से निकाह करना चाहें तो औरत को फिर से दूसरे मर्द के साथ निकाह करना जरूरी है, जो प्रथा 'हलाला' के नाम से चर्चित है। अगर बीवी फिर से अपने पुराने शौहर से शादी करना चाहती है तो फिर से नए पति के साथ तलाक की वही प्रक्रिया पूरी करनी होती है,तभी अपने पुराने शौहर से दोबारा शादी कर सकती है।(तस्वीरें-प्रतिकात्मक)
-
'मेरे साथ गलत किया', Monalisa की शादी मामले में नया मोड़, डायरेक्टर सनोज मिश्रा पर लगा सनसनीखेज आरोप -
Silver Rate Today: चांदी में हाहाकार! 13,606 रुपये की भारी गिरावट, 100 ग्राम से 1 किलो की कीमत जान लीजिए -
Gold Silver Rate Crash: सोना ₹13,000 और चांदी ₹30,000 सस्ती, क्या यही है खरीदारी का समय? आज के ताजा रेट -
ईरान का गायब सुप्रीम लीडर! जिंदा है या सच में मर गया? मोजतबा खामेनेई क्यों नहीं आ रहा सामने, IRGC चला रहे देश? -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच धराशायी हुआ सोना! 13,000 सस्ता, 18K और 22k गोल्ड की ये है कीमत -
Strait of Hormuz में आधी रात को भारतीय जहाज का किसने दिया साथ? हमले के डर से तैयार थे लाइफ राफ्ट -
Rupali Chakankar कौन हैं? दुष्कर्म के आरोपी ज्योतिषी के कहने पर काट ली थी उंगली! संभाल रहीं थीं महिला आयोग -
Love Story: बंगाल की इस खूबसूरत नेता का 7 साल तक चला चक्कर, पति है फेमस निर्माता, कहां हुई थी पहली मुलाकात? -
Ravindra Kaushik Wife: भारत का वो जासूस, जिसने PAK सेना के अफसर की बेटी से लड़ाया इश्क, Viral फोटो का सच क्या? -
Uttar Pradesh Gold Price: यूपी में आज 22K-18K सोने का भाव क्या? Lucknow समेत 9 शहरों में कितना गिरा रेट? -
Iran Vs America: ईरान की 'सीक्रेट मिसाइल' या सत्ता जाने का डर, अचानक ट्रंप ने क्यों किया सरेंडर -
US Iran War: 5 दिन के सीजफायर की बात, 10 मिनट में Trump का पोस्ट गायब! ईरान ने कहा- 'हमारे डर से लिया फैसला’












Click it and Unblock the Notifications