Fog क्या है? ठंडियों में ही यह क्यों बनता है, आसान शब्दों में जानिए
इस वक्त पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। जिसके चलते कोहरा भी खूब पड़ रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर ये ठंडियों में ही क्यों पड़ता है।

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पूरे उत्तर भारत में इस वक्त कड़ाके की ठंड पड़ रही है। जिसकी वजह से लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। साथ ही लोग सुबह और ठंड की सर्द से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। बढ़ती ठंड की वजह से कोहरे का भी कहर देखने को मिल रहा है। कोहरे की वजह से लोगों को दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर कोहरा क्यों पड़ता है? कोहरा कैसे पड़ता है और ठंडियों में ही क्यों पड़ता है?
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जानिए कैसे पड़ता है कोहरा?
साइंस के मुताबिक जब जलस्रोतों के ऊपर सर्द हवा हल्के गर्म नमी वाली हवा से मिलती है तो नमी वाली हवा ठंडी होने लगती है। ऐसे में ह्यूमेडिटी 100 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। इसी वक्त कोहरा यानि कि फॉग बनता है। वहीं, जब इसमें धुआं और प्रदूषण वाली जहरीली हवा मिल जाती है तो वह स्मॉग बन जाता है। यही वजह है कि लोगों को स्मॉग से सांस और फेफड़ों संबंधी समस्याएं होने लगती हैं।

इस वजह से सर्दियों में बनता है कोहरा?
साइंस के मुताबिक सर्दियों में दक्षिण की तरफ से गर्म और नमी वाली हवा आती है। वहीं, मेडिटेरिनियन की तरफ से ठंड हवाएं आती हैं। जो ये दोनों हवाएं जमीन के जलस्त्रोतों से मिलती है तो घना कोहरा बन जाता है। यही वजह है कि सर्दियों में कोहरा बनता है। जबकि गर्मियों में ठंड हवाएं नहीं चलती हैं ।

एक नहीं, तीन तरह का होता है कोहरा
कोहरा तीन तरह का होता है। पहले कोहरे को एडवेक्शन फॉग (Advection Fog) के नाम से जाना जाता है। यह कोहरा अक्सर तालाब, झील और घास के मैदानों में सुबह-सुबह दिखता है। वहीं, दूसरा रेडिएशन फॉग (Radiation Fog) से बनता है। यह कोहरा अक्सर जमीन या घाटियों में देखने को मिलता है। जबकि तीसरा कोहरा अपस्लोप फॉग (Upslope Fog) से बनता है। जानकारी के मुताबिक जब किसी ढलान वाली जगह से हवा ऊपर उठती है तब इस तरह का कोहरा बनता है। यह आर्कटिक झीलों, तालाबों पर ज्यादा दिखती है।

कोहरे से इंसानों को होता है ये नुकसान
कोहरे से इंसानों को नुकसान भी होता है। अगर आप कोहरे में ज्यादा देर सांस लेते हैं, तो आपके फेफड़ों में सर्दी लग सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि फेफड़े के अंदर नमी वाली हवा चली जाती है। साथ ही कोहरे की वजह से खांसी, छींक, जुकाम भी हो सकता है। हालांकि, इसका उन्हीं पर पड़ता है, जिनकी इम्यूनिटी कम है। वहीं, स्मॉग में सल्फर डाईऑक्साइड बढ़ जाता है। जिसकी वजह से सांस लेने के चलते यह व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है और सांस लेने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।












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