केसीआर और बीआरएस पर पीएम मोदी ने खुलकर हमला बोला है, आखिर क्या है भाजपा की रणनीति
तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान होना है। मतदान से तीन दिन पहले पीएम मोदी ने भारत राष्ट्र समिती पर निशाना साधते हुए कहा था यह पार्टी की जिम्मेदारी है कि तेलंगाना को बीआरएस के चंगुल से बाहर निकाला जाए। यही नहीं पीएम मोदी ने दावा किया कि भाजपा ने बीआरएस के साथ गठबंधन का प्रस्ताव ठुकरा दिया है ।
जिस तरह से पीएम मोदी लगातार मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पर हमलावर हैं उसे देखकर साफ लगता है कि पीएम मोदी कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं कि भाजपा और बीआरएस आपस में मिले हैं।

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि भाजपा और बीआरएस के बीच समझौता हुआ है, इसी के तहत केंद्रीय जांच एजेंसियां बीआरएस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई में देरी कर रही हैं।
दक्षिण भारत में भाजपा अभी तक खुद को मजबूती के साथ विकल्प के तौर पर पेश नहीं कर पाई है। तेलंगाना में पार्टी इस आरोप को खारिज करना चाहती है कि वह बीआरएस के साथ मिली है।
आरोप है कि भाजपा ने जानबूझकर ऐसा किया है ताकि कांग्रेस को सत्ता से दूर रखा जा सके। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से पीएम मोदी बीआरएस हमलावर हैं उससे कांग्रेस को बिना खास नुकसान हुए बीआरएस के वोट उससे छिटक रहे हैं। वहीं दूसरे भाजपा नेता का कहना है कि भाजपा का आक्रामक चुनाव प्रचार कांग्रेस को और सीटें जीतने में मदद कर रहा है।
जिस तरह से कई बीआरएस नेताओं ने कांग्रेस का हाथ थामा है उससे पार्टी यह संदेश देने में सफल होती नजर आ रही है कि भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी है। हाल ही में आलमपुर से विधायक वीएम अब्राहम ने कांग्रेस का हाथ थामा है।
भाजपा के पदाधिकारी का कहना है कि पीएम मोदी का केसीआर और बीआरएस पर हमला बोल रहे हैं उससे पार्टी के कार्यकर्ताओं को आखिरी के दो दिनों में जमीन में उतरकर पार्टी के पक्ष में दम लगाने की हिम्मत दे रहा है।
सोमवार को पीएम मोदी ने एक रैली में कहा भाजपा सरकार केसीआर के सभी घोटालों की जांच करेगी। जिन्होंने गरीबों और युवाओं को धोखा दिया है तेलंगाना के लोग उन्हें छोड़ेंगे नहीं।
पीएम ने अक्टूबर माह में कहा कहा कि हैदराबाद निकाय चुनाव में भाजपा के जबरदस्त प्रदर्शन के बाद केसीआर 2020 में भाजपा के साथ हाथ मिलाना चाहते थे। लेकिन केसीआर ने इस दावे को खारिज कर दिया था।
पीएम मोदी ने सोमवार को एक बार फिर से यही दावा दोहराया। पीएम ने कहा कि केसीआर जब दिल्ली आए थे तो मुझसे मिले थे और फिर से यही अपील की थी। लेकिन भाजपा तेलंगाना के लोगों के खिलाफ कभी काम नहीं कर सकती है। जबसे भाजपा ने केसीआर का प्रस्ताव ठुकराया है बीआरएस बौखलाई हुई है। पार्टी मुझे गालियां देने का कोई मौका नहीं चूकती है।
लोकसभा चुनाव से पहले दक्षिण के राज्य काफी अहम हैं। यहां भाजपा कांग्रेस को सत्ता से दूर रखना चाहती है और चाहती है कि क्षेत्रीय दल यहां मजबूत रहें और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल ना बनने पाए।
भाजपा नहीं चाहती है कि कांग्रेस किसी भी राज्य में मजबूत हो, खासकर कि कर्नाटक में चुनाव हारने के बाद। जिन राज्यों में भाजपा खुद को मजबूत नहीं कर पाई है वहां कांग्रेस को भी मजबूत नहीं होने देना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करे क्योंकि पार्टी के लोकसभा चुनाव विधानसभा चुनाव से ज्यादा अहम हैं।












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