Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Article 142: क्‍या है अनुच्‍छेद 142? जिसे उपराष्‍ट्रपति धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट का "न्‍यूक्लियर मिसाइल" बताया

What is Article 142: देश के उपराष्‍ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देश की न्‍यायपालिका को लेकर बड़ा बयान दिया है और न्‍यायपालिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही उपराष्‍ट्रपति धनखड़ ने कहा "अनुच्‍छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ न्‍यायधीशों के लिए एक न्‍यूक्लियर मिसाइल बन गया है। जो जजों को सातों दिन उपलब्ध है।

आइए जानते हैं आखिर क्‍यों जजों पर भड़के उपराष्‍ट्रपति धनखड़ और संविधान का अनुच्‍छेद 142 क्‍या है जिसे उपराष्‍ट्रपति ने देश की सर्वोच्‍च न्‍यायालय की न्‍यूक्लियर मिसाइल बताया है।

What is Article 142

सुप्रीम कोर्ट के जजों पर क्‍यों भड़के उपराष्‍ट्रपति?

दरअसल, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में एक कार्यक्रम में न्यायपालिका की हालिया कार्रवाइयों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है,खासतौर धनखड़ ने विधायी मामलों के संबंध में राष्ट्रपति को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की आलोचना की है। धनखड़ ने उस आदेश का जिक्र किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राष्ट्रपति पर समय सीमा तय की थी।

What is Article 142

धनखड़ ने कहा "सुप्रीम कोर्ट के हाल ही के एक फैसले में राष्‍ट्रपति को निर्देश दिया गए हैं। देश में क्‍या हो रहा है, हम कहां जा रहे हैं। लोकतंत्र में हमने ऐसे दिन की कभी उम्‍मीद भी नहीं की थी। जज राष्‍ट्रपति डेडलाइन के अंदर फैसले लेने के लिए कहते हैं, अगर ऐसा नहीं होता है तो विधेयक कानून बन जाता है।"

What is Article 142

जज सुपर संसद बन गए हैं

धनखड़ ने इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की तुलना संविधान के अनुच्छेद 142 को लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ "परमाणु मिसाइल" के रूप में इस्तेमाल करने वाले न्यायालय से की। उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक गंभीर खतरा है, क्योंकि हमारे देश में ऐसे जज हैं जो कानून बनाएंगे और ये न्‍यायपालिका में भी काम करेंगे, जो सुपर संसद की तरह काम करेंगे। इनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी क्‍योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है।"

अनुच्‍छेद 142 SC की न्यूक्लियर मिसाइल

धनखड़ ने न्यायिक प्रक्रिया में विसंगति की ओर इशारा करते हुए कहा कि राष्‍ट्रपति के खिलाफ संवैधानिक निर्णय मात्र दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा किया गया, जबकि संविधान के अनुच्छेद 145(3) में ऐसे मामलों के लिए न्यूनतम पांच न्यायाधीशों की पीठ का प्रावधान है। उन्‍होंने कहा वर्तमान समय में सुप्रीम कोर्ट में 30 न्‍यायाधीश हो गए हैं इसलिए अब अनुच्छेद 145(3) में संशोधन करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्‍होंने कहा अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ एक न्यूक्लियर मिसाइल बन गया है, जो न्‍यायपालिका के लिए 24 घंटे उपलब्ध है।

क्‍या है अनुच्‍छेद 142?

भारतीय संवधिान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी मामले में "पूर्ण न्याय" के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की शक्ति प्रदान करता है, जो पूरे भारत में लागू होता है। अनुच्छेद 142 को कानूनी उपायों की अनुपस्थिति में निर्णायक रूप से कार्य करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट इन ऐतिहासिक मामलों में कर चुकी है फैसले

इस प्रावधान का उपयोग विभिन्न ऐतिहासिक मामलों में किया जा चुका है। जिसमें 30 जनवरी 2024 को चंडीगढ़ मेयर चुनाव के नतीजों को पलटना और ऐतिहासिक बाबरी-राम जन्मभूमि का फैसला शामिल है, जिसमें न्यायालय ने पूर्ण न्याय प्राप्त करने के लिए हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को भूमि आवंटित करने का आदेश दिया था।

जानिए पूरा मामला क्‍या है जिसमें SC ने राष्‍ट्रपति को दी थी डेडलाइन

उपराष्ट्रपति की ये टिप्पणी तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के बीच मामले में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जवाब में थी, जहां न्यायालय ने विधायी प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप करके एक मिसाल कायम की। इस फैसले में राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को राज्यपाल द्वारा मंजूरी देने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की गई थी, जिसमें राज्य को समय सीमा पूरी न होने पर राष्ट्रपति के खिलाफ न्यायिक निवारण की मांग की गई थी।

गौतरलब है कि ऐसे मामलों में जहां राज्यपाल द्वारा किसी विधेयक को असंवैधानिक बताकर वापस कर दिया जाता है, राष्ट्रपति को अनुच्छेद 143 के अनुसार निर्णय लेने से पहले सुप्रीम कोर्ट से परामर्श करने की सलाह दी जाती है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+